कांग्रेस में मतभेद खुलकर आए सामने: दिग्विजय बोले- जीतू पटवारी को पूरी जानकारी नहीं थी, पटवारी ने कहा- मेरे सवाल आज भी कायम
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन एक रुपये में ट्रस्ट को दिए जाने के मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी को मामले की पूरी जानकारी नहीं थी और संबंधित ट्रस्ट सरकारी न्यास है, निजी नहीं। वहीं जीतू पटवारी ने कहा कि उन्होंने केवल सवाल उठाए थे और वे आज भी कायम हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन सवालों का जवाब देने की मांग दोहराई। मामला कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय के कारण राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
500 करोड़ की जमीन आवंटन विवाद पर कांग्रेस में अलग-अलग सुर, दिग्विजय ने ट्रस्ट को बताया सरकारी तो जीतू पटवारी बोले- मुख्यमंत्री अब भी दें जवाब।
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए कथित 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन एक रुपये की टोकन राशि पर ट्रस्ट को दिए जाने के आरोपों को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जहां कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान को अधूरी जानकारी पर आधारित बताया, वहीं जीतू पटवारी ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने सवाल उठाए थे और वे आज भी कायम हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
यह मामला अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दिग्विजय सिंह का कहना है कि संबंधित ट्रस्ट पूरी तरह सरकारी न्यास है और उसे एक रुपये में जमीन दिए जाने में कोई अनियमितता नहीं है, जबकि जीतू पटवारी का कहना है कि उन्होंने सरकार से केवल जवाब मांगा था।
दिग्विजय सिंह बोले- जीतू को पूरी जानकारी नहीं थी
सोमवार को बड़वानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले पर जीतू पटवारी से बात की है। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके नेता हैं और पुत्र समान हैं, लेकिन जब उन्होंने बयान दिया था, तब उनके पास पूरे तथ्य उपलब्ध नहीं थे।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी भाजपा के एक विधायक से जानकारी मिली थी, जिनके मुख्यमंत्री मोहन यादव से अच्छे संबंध नहीं हैं। इसके अलावा एक समाचार पत्र में भी यह प्रकाशित हुआ था कि लगभग 500 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति एक निजी ट्रस्ट को मात्र एक रुपये में सौंप दी गई है।
उन्होंने कहा कि इस खबर के बाद उन्होंने स्वयं पूरे मामले की जांच-पड़ताल की। गूगल सर्च और रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज निकलवाने पर उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट कोई निजी संस्था नहीं बल्कि सरकारी सार्वजनिक न्यास है।
सरकारी न्यास की बताई पूरी संरचना
दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस ट्रस्ट की चर्चा हो रही है, उसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं, पदेन उपाध्यक्ष संस्कृति मंत्री होते हैं और सचिव एक सरकारी अधिकारी होता है। ट्रस्ट के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में किसी निजी व्यक्ति का नाम नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह जानकारी जीतू पटवारी के पास नहीं थी, इसलिए उन्होंने निजी ट्रस्ट समझकर बयान दे दिया। दिग्विजय सिंह के अनुसार सरकारी न्यास को एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन आवंटित करने की व्यवस्था नई नहीं है, बल्कि यह पहले से चली आ रही प्रक्रिया है।
जीतू पटवारी बोले- मेरे सवाल आज भी कायम
दूसरी ओर भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने जो बात कही थी, वह आरोप नहीं बल्कि सवाल था और वह सवाल आज भी अपनी जगह कायम है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांग रही है और सरकार को पारदर्शिता के साथ सभी सवालों का उत्तर देना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि दिग्विजय सिंह उनके वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस विषय में अपनी बात रखी है। इसमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है।
दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से शिकायत किए जाने की चर्चाओं पर उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में किसी तरह की कोई शिकायत नहीं की गई है।
क्या था पूरा विवाद
24 जून को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा की मौजूदगी में आरोप लगाया था कि उज्जैन स्थित 'वीर भारत न्यास' को लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपये की टोकन राशि पर दे दी गई।
उन्होंने दावा किया था कि ट्रस्ट के ट्रस्टी मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी हैं और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी मूल्यवान सरकारी भूमि किस आधार पर दी गई।
इसके साथ ही पटवारी ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि खरीद, कथित लैंड बैंक, आय के स्रोत तथा वर्ष 2023 के बाद खरीदी गई संपत्तियों को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की थी। उन्होंने छह विभागों में हुए तबादलों में कथित भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे।
पहले भी दिग्विजय कर चुके हैं बचाव
इससे पहले उज्जैन में आयोजित प्रेस वार्ता में भी दिग्विजय सिंह इस मामले पर अपना पक्ष रख चुके हैं। उन्होंने ट्रस्ट डीड और अन्य सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए कहा था कि संबंधित ट्रस्ट पूरी तरह सरकारी एवं सार्वजनिक न्यास है।
उन्होंने बताया था कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू थी और बाद में कमलनाथ सरकार के समय भी यही नियम जारी रहे। इसलिए सरकारी न्यास को एक रुपये में जमीन दिए जाने को अनियमितता नहीं माना जा सकता।
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा था कि कुछ लोग अधूरी जानकारी के आधार पर झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाने और ब्लैकमेलिंग करने का प्रयास करते हैं।
कांग्रेस में अलग-अलग सुर
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण को सामने ला दिया है। जहां दिग्विजय सिंह दस्तावेजों के आधार पर सरकार के इस निर्णय को नियमों के अनुरूप बता रहे हैं, वहीं प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि उन्होंने केवल सवाल उठाए हैं और उन सवालों के जवाब सरकार को देने चाहिए।
हालांकि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त किया है और इसे किसी प्रकार का आंतरिक विवाद मानने से इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के भीतर अलग-अलग रणनीति और सोच के रूप में देखा जा रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब देती है या नहीं और कांग्रेस इस मुद्दे को आगे किस प्रकार उठाती है। फिलहाल जमीन आवंटन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना हुआ है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस