राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर अवधेश प्रसाद का BJP पर बड़ा वार: “पहले लाखों का चढ़ावा, अब 11-21-51 रुपये”, बोले—बड़ी मछली को बचाया जा रहा
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के इंटरव्यू में पूछे गए सवालों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इन सवालों को संविधान की मंशा के विरुद्ध बताया.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों से निजी सवाल पूछे जाने की खबरों पर SP सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि जो इंटरव्यू हुआ, वह पूरी तरह से गलत था।.
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण में कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन इसके पीछे मौजूद “बड़ी मछली” को बचाने की कोशिश की जा रही है। सपा सांसद ने कहा कि सरकार को इस पूरे प्रकरण पर सदन में जवाब देना चाहिए और जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले में वास्तविक जिम्मेदार कौन हैं।
अवधेश प्रसाद ने अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर भी बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे। उन्होंने कहा कि पहले रोजाना पांच लाख से लेकर दस लाख तक श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जाती थी और बड़ी संख्या में लोग मंदिर में सोना, चांदी तथा नकदी का चढ़ावा चढ़ाते थे। हालांकि, सपा सांसद का दावा है कि अब अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आई है और रोजाना 10 हजार तक की भीड़ भी नहीं पहुंच पा रही है।
“पहले लाखों का चढ़ावा, अब 5, 11, 21 और 51 रुपये”
सपा सांसद ने चढ़ावे को लेकर भी गंभीर दावा किया। उन्होंने कहा कि पहले मंदिर में लाखों रुपये का चढ़ावा आता था, जबकि अब पांच, 11, 21 और 51 रुपये जैसी छोटी रकम चढ़ाए जाने की स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि, इन आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने अयोध्या की मर्यादा को तोड़ने और उसे कलंकित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि चंदा और चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में यह सामने आना चाहिए कि कथित अनियमितता में कौन-कौन लोग शामिल थे और पूरे मामले के पीछे किसकी भूमिका थी।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और सदन में स्पष्ट जवाब दिया जाए। सपा सांसद का कहना है कि यदि किसी स्तर पर चढ़ावे या मंदिर से जुड़े संसाधनों में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राम मंदिर CEO के इंटरव्यू पर भी उठे सवाल
इसी बीच राम मंदिर के CEO पद के लिए चल रही चयन प्रक्रिया भी चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक उम्मीदवारों से आमने-सामने इंटरव्यू से पहले लगभग तीन दर्जन सवालों वाला ऑनलाइन Google Form भरवाया गया। इसमें प्रशासनिक अनुभव और पेशेवर योग्यता के साथ-साथ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े सवाल भी शामिल बताए गए हैं।
उम्मीदवारों से कथित तौर पर पूछा गया कि क्या वे शिखा रखते हैं, जनेऊ पहनते हैं और शाकाहारी हैं या मांसाहारी। इसके अलावा शराब के सेवन और हिंदू धर्म के प्रति उनकी आस्था से संबंधित सवाल भी फॉर्म में शामिल बताए गए हैं।
उम्मीदवारों से उनके परिवार, पूर्व कार्य अनुभव और बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन से जुड़े अनुभव की जानकारी भी मांगी गई। भगवान राम के प्रति उनकी आस्था और मंदिर से जुड़े भविष्य के विजन को लेकर भी सवाल किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासनिक क्षमता से लेकर धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन तक पर फोकस
CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और बड़े धार्मिक आयोजनों को संभालने के अनुभव को परखने पर जोर दिया जा रहा है। राम मंदिर में लगातार बढ़ती गतिविधियों और श्रद्धालुओं की व्यवस्था को देखते हुए इस पद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उम्मीदवारों से यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि वे बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा, व्यवस्थाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को किस तरह संभाल सकते हैं। मंदिर से जुड़े भविष्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उनके विजन को भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
18 में से 8 उम्मीदवारों का इंटरव्यू
जानकारी के अनुसार मंगलवार को 18 उम्मीदवारों में से आठ का आमने-सामने इंटरव्यू हुआ। इनमें चार पूर्व IAS अधिकारी भी शामिल रहे। चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन और धार्मिक-सामाजिक व्यवस्थाओं की समझ को भी महत्व दिए जाने की बात सामने आई है।
राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक पद पर नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब अयोध्या देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र बन चुकी है। ऐसे में मंदिर प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुविधाओं, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, दान-चढ़ावे की पारदर्शिता और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं।
चढ़ावे के आरोपों पर जवाब का इंतजार
अवधेश प्रसाद के आरोपों के बाद राम मंदिर के चढ़ावे और कथित चोरी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सपा सांसद ने जहां पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सरकार से सदन में जवाब की मांग की है, वहीं उनके द्वारा श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
दूसरी ओर, CEO पद के लिए जारी चयन प्रक्रिया ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है। उम्मीदवारों से धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल पूछे जाने की खबर के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि मंदिर के प्रशासनिक पद के लिए चयन में पेशेवर योग्यता और धार्मिक-सामाजिक जुड़ाव के बीच संतुलन किस तरह तय किया जाएगा।
फिलहाल राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े आरोपों और CEO चयन प्रक्रिया, दोनों पर आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। आने वाले दिनों में सरकार, मंदिर प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों की ओर से सामने आने वाले जवाब इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस