आजादी के बाद पहली बार जनगणना में पूछी जाएगी जाति, 40 सवालों से जुटेगी देश की पूरी तस्वीर; कोविड वैक्सीन से बैंक खातों तक मांगी जाएगी जानकारी

जनगणना 2027 के लिए केंद्र ने जनसंख्या गणना चरण में पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित कर दिया है. इनमें जाति, अनुसूचित जाति-जनजाति की स्थिति और कोविड टीकाकरण से जुड़ी जानकारी भी शामिल है. बर्फीले इलाकों में 1 सितंबर से गणना शुरू होगी, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह अगले साल होगी.

आजादी के बाद पहली बार जनगणना में पूछी जाएगी जाति, 40 सवालों से जुटेगी देश की पूरी तस्वीर; कोविड वैक्सीन से बैंक खातों तक मांगी जाएगी जानकारी

गृह मंत्रालय ने आज 40 सवालों की एक सूची जारी की है। इसमें निर्देश दिया गया है कि जनगणना अधिकारी जानकारी इकट्ठा करने के लिए ये सभी सवाल पूछेंगे। जानें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। देश में होने वाली जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने जनसंख्या गणना चरण में पूछे जाने वाले सवालों को अधिसूचित कर दिया है। इस बार जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। आजादी के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जातिगत जानकारी जुटाई जाएगी। इसके साथ ही लोगों से उनकी सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्थिति से जुड़े करीब 40 सवाल पूछे जाएंगे।

रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, जनसंख्या गणना के दौरान लोगों से अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। उनसे यह पूछा जाएगा कि वे SC या ST से संबंधित हैं या नहीं और उनकी जाति क्या है। इससे देश में अलग-अलग जातीय समूहों से जुड़े व्यापक आंकड़े सामने आने की उम्मीद है।

जाति के साथ कोविड वैक्सीन की भी जानकारी

जनगणना 2027 के सवालों में कई ऐसे विषय शामिल किए गए हैं, जो पिछली जनगणना की तुलना में अलग हैं। लोगों से कोविड-19 वैक्सीन से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। उनसे पूछा जाएगा कि उन्होंने कोविड का टीका कहां लगवाया था।

इसके अलावा परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। परिवार में उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को दर्ज किया जाएगा। बैंक खातों से संबंधित जानकारी भी गणना के दौरान पूछे जाने वाले सवालों में शामिल है।

सरकार का उद्देश्य केवल देश की कुल आबादी का आंकड़ा जुटाना नहीं है, बल्कि लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की व्यापक तस्वीर तैयार करना भी है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य में सरकारी योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यक्रमों की योजना बनाने में किया जा सकता है।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में मकानों और आवास से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें घर की स्थिति, आवासीय सुविधाओं और परिवार से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दर्ज की जाएगी।

दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी जुटाई जाएगी। इसी चरण में जाति सहित व्यक्ति और परिवार से जुड़े निर्धारित सवालों के जवाब दर्ज किए जाएंगे।

बर्फीले क्षेत्रों में सितंबर से गणना

देश के सभी हिस्सों में जनसंख्या गणना एक ही समय पर नहीं होगी। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले तथा गैर-समान क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा।

इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इससे पहले अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी। इसके लिए 17 से 31 अगस्त 2026 तक सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में कराया जाएगा। इस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गणना का कार्यक्रम तैयार किया गया है।

2021 में नहीं हो सकी थी जनगणना

भारत में नियमित अंतराल पर जनगणना कराने की परंपरा रही है, लेकिन वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण नहीं हो सकी थी। महामारी के दौरान देशभर में लागू प्रतिबंधों और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के चलते इसे टालना पड़ा था।

अब जनगणना 2027 के जरिए देश की नई जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का व्यापक डेटा जुटाया जाएगा। यह देश की 16वीं जनगणना होगी, जबकि आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी।

पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना

जनगणना 2027 को तकनीकी रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के मुताबिक यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। गणना के दौरान मोबाइल और डिजिटल तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।

गणनाकर्मियों के जरिए जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी। साथ ही लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी जा रही है। इससे कागजी प्रक्रिया कम करने और डेटा को तेजी से डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

क्यों महत्वपूर्ण है जातिगत डेटा?

भारत में जाति से जुड़े आंकड़ों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा होती रही है। देश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित आंकड़े जनगणना के माध्यम से उपलब्ध होते रहे हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर सभी जातियों की गणना लंबे समय से नहीं हुई थी।

जनगणना 2027 में जातिगत जानकारी शामिल किए जाने से देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की आबादी और उनकी स्थिति से संबंधित विस्तृत आंकड़े सामने आ सकते हैं। ऐसे आंकड़े सरकारी योजनाओं के लक्ष्य तय करने, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की योजना बनाने और संसाधनों के बेहतर वितरण में उपयोगी हो सकते हैं।

हालांकि जातिगत आंकड़ों के संग्रह के साथ उनकी गोपनीयता और सही तरीके से उपयोग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। जनगणना में दर्ज जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और इसके आधार पर भविष्य की नीतियां कैसे तैयार होती हैं, इस पर भी नजर रहेगी।

लोगों से मांगी जाएगी विस्तृत जानकारी

इस बार जनगणना में केवल नाम और उम्र जैसी सामान्य जानकारी तक प्रक्रिया सीमित नहीं रहेगी। परिवार और व्यक्ति से संबंधित कई सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को रिकॉर्ड किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश की बदलती जनसंख्या संरचना की अधिक व्यापक तस्वीर तैयार करना है।

जाति, SC-ST की स्थिति, कोविड वैक्सीन से जुड़ी जानकारी और बैंक खातों जैसे सवालों को शामिल किए जाने से यह जनगणना पिछली गणनाओं से काफी अलग नजर आ रही है।

डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से डेटा संग्रह की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का विकल्प देगी।

जनगणना 2027 पर देश की नजर

जनगणना किसी भी देश के लिए केवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं होती। इसके आंकड़े सरकार की नीतियों और योजनाओं के लिए आधार का काम करते हैं। स्कूल, अस्पताल, रोजगार, आवास, सड़क, परिवहन, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं की भविष्य की जरूरतों का अनुमान लगाने में जनसंख्या से जुड़े आंकड़े महत्वपूर्ण होते हैं।

जनगणना 2027 इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें डिजिटल तकनीक, सेल्फ-एन्यूमरेशन और व्यापक जातिगत डेटा जैसे नए पहलू शामिल किए गए हैं। 2021 की जनगणना महामारी के कारण टलने के बाद अब होने वाली यह प्रक्रिया देश की मौजूदा सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को नए सिरे से सामने लाएगी।

सबसे बड़ा बदलाव जातिगत जानकारी का व्यापक संग्रह माना जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार इस स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाने से आने वाले वर्षों में सरकारी नीतियों और सामाजिक-आर्थिक योजनाओं पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। साथ ही डिजिटल जनगणना देश में डेटा संग्रह की प्रक्रिया को एक नए दौर में ले जाने वाली है।