बालाघाट में 6 बच्चों की मौत से हड़कंप, दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा खत; जांच से लेकर 10 लाख मुआवजे तक की मांग
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल बिरसा ब्लॉक में दूषित पानी और संक्रमण के कारण कई बच्चों की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक बच्चे बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं।
बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी अंचल मछुरदा के गठिया गांव में बीमारी से पीड़ित एक और 5 वर्षीय बच्ची मंगली मरकाम की मंगलवार को मौत हो गई। इसके साथ ही महामारी से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
भोपाल/बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने का मामला गंभीर होता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की राज्यस्तरीय जांच कराने, लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने और मृत बच्चों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है कि गंभीर रूप से बीमार बच्चों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर और भोपाल के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया जाए। उन्होंने बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग भी की है।
चार गांवों में छह बच्चों की मौत
बालाघाट जिले के अडोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका गांवों में पिछले कुछ समय से बच्चों के बीमार पड़ने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ये सभी क्षेत्र बैगा आदिवासी बहुल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 1 से 13 वर्ष की उम्र के छह बच्चों की मौत हो चुकी है।
लगातार बच्चों के बीमार पड़ने और मौत के मामलों ने प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम प्रभावित गांवों में पहुंची और बीमारी के कारणों की जांच शुरू की।
बच्चों में दिखाई दिए गंभीर लक्षण
बीमार बच्चों में शुरुआत से ही कई गंभीर लक्षण देखने को मिले हैं। इनमें शरीर पर दाने निकलना, तेज बुखार, मुंह में छाले, भूख कम लगना और झटके आने जैसी शिकायतें शामिल हैं। एक साथ कई बच्चों में इस तरह के लक्षण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी है।
विशेषज्ञों ने प्रभावित बच्चों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए पुणे की प्रयोगशाला भेजा है। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की बीमारी के पीछे संक्रमण है या कोई अन्य कारण। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग बीमारी की सटीक पहचान और संभावित संक्रमण को लेकर निगरानी बनाए हुए है।
विशेषज्ञ टीम ने पोषण और दूषित पानी पर जताई चिंता
जबलपुर मेडिकल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र विश्नोई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। टीम ने बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, खान-पान, पानी के स्रोत और आसपास के हालात का जायजा लिया।
विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन में बच्चों में पोषण की कमी और दूषित पानी को संभावित प्रमुख कारणों में माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में संक्रमण का असर बच्चों पर अधिक गंभीर हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बीमारी की अंतिम वजह अभी सामने नहीं आई है। पुणे भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट के बाद ही बीमारी के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
47 बच्चे अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ ही अस्थायी अस्पतालों की व्यवस्था भी शुरू की है। फिलहाल 47 बच्चों का इलाज बैहर और बालाघाट जिला अस्पताल में चल रहा है।
विभाग के अनुसार उपचार के बाद 51 बच्चों की हालत में सुधार हुआ है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में लगातार पहुंचकर बच्चों और ग्रामीणों की जांच कर रही हैं। संदिग्ध लक्षण वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
23 दिन में दूसरी बार पहुंची विशेषज्ञ टीम
बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम पिछले 23 दिनों में दूसरी बार क्षेत्र में पहुंची है। छह बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के बाद विशेषज्ञों की लगातार निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की टीम बीमारी के संभावित कारणों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों का भी आकलन कर रही है। खास तौर पर बैगा आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के पोषण की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है।
पोषण योजनाओं पर भी उठे सवाल
इन घटनाओं ने आदिवासी क्षेत्रों में चल रही पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से कुपोषण दूर करने और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद यदि प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों में गंभीर पोषण की कमी सामने आती है तो योजनाओं के वास्तविक प्रभाव और जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
विशेषज्ञों का शुरुआती आकलन यदि आगे की जांच में सही साबित होता है तो साफ पानी, पर्याप्त पोषण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।
दिग्विजय सिंह ने रखीं कई मांगें
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र में पूरे मामले की राज्यस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि बच्चों की मौत के पीछे यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक या स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की सहायता राशि देने की मांग भी की है। इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के बड़े अस्पतालों में भेजने की बात कही है। दिग्विजय सिंह ने इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाए जाने की मांग की है।
भोपाल भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने छह बच्चों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेज दी है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर और अस्थायी अस्पतालों के माध्यम से इलाज जारी है।
अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की नजर पुणे भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की वास्तविक वजह, संक्रमण की स्थिति और आगे की स्वास्थ्य रणनीति को लेकर तस्वीर ज्यादा साफ हो सकेगी।
फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों में बीमारी को नियंत्रित करना, गंभीर बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और किसी नए मामले को गंभीर स्थिति तक पहुंचने से रोकना है। छह बच्चों की मौत के बाद मामले की पारदर्शी जांच और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस