सीजेपी ने सरकार को दी चेतावनी, कहा- छात्रों पर पुलिस कार्रवाई नहीं रुकी तो फिर होगा जंतर-मंतर आंदोलन
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष ने चेतावनी दी है कि अगर सभी एफआईआर तुरंत वापस नहीं ली गईं, गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया और भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो सीजेपी को दोबारा धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार पर प्रदर्शनकारियों के साथ हुए कथित समझौते को तोड़ने का आरोप लगाते हुए सभी एफआईआर वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर वह दोबारा बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगी।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चला आंदोलन समाप्त होने के बाद एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। पार्टी का आरोप है कि 25 जुलाई को हुए समझौते के बावजूद विभिन्न राज्यों में आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी है। सीजेपी ने कहा है कि यदि छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया और पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो संगठन दोबारा जंतर-मंतर पर धरना शुरू करेगा।
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को टैग करते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन समाप्त करने के समय सरकार ने आश्वासन दिया था कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई नई पुलिस कार्रवाई नहीं होगी और पहले से दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाएगा। लेकिन समझौते के बाद भी बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से छात्रों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न की खबरें सामने आ रही हैं।
रांका का कहना है कि दिल्ली में भी कई छात्रों की निगरानी (सर्विलांस) की जा रही है और उन्हें विभिन्न तरीकों से परेशान किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को तत्काल वापस लिया जाए और भविष्य में भी किसी छात्र के खिलाफ इस आंदोलन के संबंध में कोई मुकदमा दर्ज न किया जाए।
सीजेपी ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय तक इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और कार्रवाई जारी रही, तो संगठन फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगा। रांका ने कहा कि सरकार बताए कि समझौते के तहत वह क्या कदम उठा रही है और कब तक सभी लंबित मामलों का समाधान किया जाएगा।
हालांकि, अब तक किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस की ओर से ऐसी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ नए मामले दर्ज किए गए हैं या बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। स्वयं सीजेपी ने भी सार्वजनिक रूप से किसी विशेष मामले या एफआईआर का उदाहरण पेश नहीं किया है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि 25 जुलाई को सरकार और सीजेपी के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। उस समय सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद थे। बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और पहले से दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने का भरोसा दिया गया था। उसी दिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी।
सीजेपी ने इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की। इसमें आशुतोष रांका ने कहा कि तीसरे दौर की वार्ता में यह स्पष्ट सहमति बनी थी कि आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस लिया जाएगा और भविष्य में कोई नया केस दर्ज नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संगठन ने सरकार को एक लिखित मसौदा भी सौंपा था। अब सरकार से बुधवार तक उस समझौते की आधिकारिक लिखित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
फिलहाल सीजेपी का कहना है कि यदि सरकार समझौते का पूरी तरह पालन करती है और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई रोकने के साथ मामलों को वापस लेती है, तो आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो संगठन फिर से जंतर-मंतर पर धरना देने और देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय ले सकता है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस