राम एक शादी करते हैं तो रहीम भी एक ही करें'—यूसीसी पर सीएम मोहन यादव का बयान,बोले—'सबके लिए एक समान कानून'

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भगवान रामचंद्र एक शादी करते हैं, तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जाती है.

राम एक शादी करते हैं तो रहीम भी एक ही करें'—यूसीसी पर सीएम मोहन यादव का बयान,बोले—'सबके लिए एक समान कानून'

UCC पर बोले सीएम मोहन यादव: 'जब देश एक है, तो कानून भी एक होना चाहिए'

'राम हो या रहीम, शादी का नियम सबके लिए एक'—यूसीसी पर सीएम मोहन यादव

भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यूसीसी का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि जब देश एक है तो अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून होने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए और विवाह जैसे मामलों में भी सभी के लिए एक समान नियम लागू होने चाहिए।

इंदौर जिला अस्पताल में 300 बिस्तरों वाली नई इमारत के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब यूसीसी को लेकर गठित समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए राज्य विधि आयोग के पास भेज दिया गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और विविधताओं से भरा देश है, लेकिन कानून के मामले में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब हमारा देश एक है, तो अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होना चाहिए? यदि रामचंद्र नाम का व्यक्ति एक ही शादी करता है, तो रहीम नाम के व्यक्ति से भी यही अपेक्षा की जानी चाहिए कि वह भी एक ही विवाह करे। कानून सबके लिए समान होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री का यह बयान यूसीसी पर चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय प्रदान करना है।

राज्य सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की। समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। इसके बाद रिपोर्ट को राज्य विधि आयोग के पास भेज दिया गया है, जहां कानूनी परीक्षण और आवश्यक सुझावों के बाद विधेयक का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण सिफारिश करते हुए कहा है कि प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से आदिवासी समुदाय को बाहर रखा जाए। समिति का मानना है कि आदिवासी समाज की अपनी पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाएं हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है।

समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन कर सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए समिति ने विभिन्न धर्मों, समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि समिति ने पूरे प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया और 10 लाख से अधिक नागरिकों की राय प्राप्त की। लोगों से लिखित सुझाव लिए गए तथा विभिन्न जिलों में बैठकें आयोजित कर उनकी चिंताओं और सुझावों को रिपोर्ट में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसा कानून बनाना चाहती है जो न्यायपूर्ण, संतुलित और संविधान की भावना के अनुरूप हो।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय को भी हिंदू-मुस्लिम नजरिए से देख रही है और रचनात्मक सहयोग देने के बजाय राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी पर गठित समिति ने सभी राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने का अवसर दिया था, लेकिन कांग्रेस ने समिति की बैठकों में भाग नहीं लिया और न ही कोई सुझाव प्रस्तुत किया।

मोहन यादव ने कहा, “मैं जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि यूसीसी के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने अपना वही दोहरा रवैया अपनाया है। वोट बैंक की राजनीति के कारण कांग्रेस ने समिति की बैठकों से दूरी बनाई और अपनी राय तक नहीं दी। लोकतंत्र में संवाद सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कांग्रेस ने इस प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं करना चाहती, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के उद्देश्य से यूसीसी लागू करना चाहती है। उनका कहना था कि समान नागरिक संहिता संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को और अधिक मजबूत करेगी।

गौरतलब है कि देश में फिलहाल विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन सभी के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू करना है, जिससे सभी नागरिकों पर समान नियम लागू हों। इस विषय पर लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर बहस चल रही है और कई राज्यों ने भी इस दिशा में पहल शुरू की है।

यदि मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश होता है और उसे मंजूरी मिलती है, तो राज्य समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

अब सभी की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर व्यापक बहस होने की संभावना है।