दतिया उपचुनाव में कांग्रेस का दांव: राजघराने के घनश्याम को बनाया प्रत्याशी, बोले- BJP से सीधा मुकाबला; तीसरी पार्टियां भाजपा की बी टीम

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। राजघराने से जुड़े घनश्याम सिंह ने कहा कि उनका सीधा मुकाबला भाजपा से है और अन्य दल भाजपा की बी टीम की तरह काम कर रहे हैं। भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जिसके बाद दतिया की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब मुकाबला घनश्याम सिंह और आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है।

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस का दांव: राजघराने के घनश्याम को बनाया प्रत्याशी, बोले- BJP से सीधा मुकाबला; तीसरी पार्टियां भाजपा की बी टीम

दतिया उपचुनाव 2026: कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर खेला दांव, भाजपा के आशुतोष तिवारी से होगा सीधा मुकाबला

भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल दतिया में होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद जहां पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया, वहीं अब कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी की घोषणा कर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को चुनाव मैदान में उतारते हुए साफ संकेत दिया है कि वह इस सीट पर पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ने जा रही है।

दतिया विधानसभा उपचुनाव अब सीधे तौर पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के भीतर टिकट को लेकर हुई नाराजगी और कांग्रेस द्वारा अनुभवी चेहरे पर दांव लगाने से चुनावी मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प हो गया है।

कांग्रेस ने अनुभवी चेहरे पर जताया भरोसा

कांग्रेस ने दतिया विधानसभा उपचुनाव में पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है। घनश्याम सिंह सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और ग्वालियर-चंबल अंचल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि घनश्याम सिंह का राजनीतिक अनुभव, स्थानीय मुद्दों की समझ और क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता कांग्रेस को चुनाव में बढ़त दिलाने में मदद कर सकती है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी उनके नाम की घोषणा का स्वागत करते हुए चुनाव प्रचार तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है।

भाजपा में टिकट बदलने से बढ़ा सियासी तापमान

दतिया उपचुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना भाजपा द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित करना रही। इस फैसले के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए, हाईवे जाम किया गया और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।

इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। विपक्ष ने इसे भाजपा की अंदरूनी कलह का प्रमाण बताया, जबकि भाजपा नेतृत्व लगातार संगठन की एकजुटता का संदेश देने में जुटा हुआ है।

इसी बीच डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) की ओर से उन्हें अपनी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भी दिया गया। हालांकि, इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

भाजपा ने संगठन को बताया सर्वोपरि

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि उम्मीदवार चयन पूरी तरह पार्टी का निर्णय है और संगठन में सभी उसे स्वीकार करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में संगठन सर्वोपरि है तथा पार्टी द्वारा लिया गया हर निर्णय सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए मान्य होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी नेता और कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव लड़ेंगे।

जगदीश देवड़ा ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा का वरिष्ठ और अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने संगठन और सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है तथा वे पार्टी की कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं किसी प्रकार की नाराजगी है तो उसका समाधान संगठन के भीतर संवाद के माध्यम से कर लिया जाएगा। भाजपा में चुनाव किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे संगठन का होता है और दतिया उपचुनाव में सभी नेता एवं कार्यकर्ता एकजुट होकर पार्टी की जीत सुनिश्चित करेंगे।

कांग्रेस का भाजपा पर हमला

दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के भीतर उभरे विवाद को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार लगातार भाजपा पर हमलावर हैं।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि पहले शिवराज सिंह चौहान और अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि अब दतिया की जनता भाजपा को भी जवाब देगी।

उमंग सिंघार ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही भाजपा का वास्तविक चाल, चरित्र और चेहरा सामने आ गया है। जो पार्टी दूसरे दलों पर गुटबाजी का आरोप लगाती थी, आज उसी की आंतरिक कलह पूरे प्रदेश के सामने आ चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष चरम पर है और इसका असर उपचुनाव में दिखाई देगा। उनके अनुसार दतिया की जनता विकास चाहती है, न कि हिंसा, गुंडाराज और राजनीतिक अहंकार।

चुनावी मुकाबला होगा दिलचस्प

दतिया विधानसभा उपचुनाव अब प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो चुका है। भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत और सरकार के कामकाज के आधार पर चुनाव मैदान में उतर रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा के भीतर की नाराजगी और स्थानीय समीकरणों को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगी।

घनश्याम सिंह का अनुभव और कांग्रेस का आक्रामक अभियान एक ओर है, जबकि भाजपा आशुतोष तिवारी को नया चेहरा बनाकर चुनावी मैदान में उतार चुकी है। ऐसे में दोनों दलों के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और तेज होगा तथा दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे हमले करेंगे। फिलहाल दतिया की सियासत का केंद्र उम्मीदवारों की घोषणा, भाजपा की आंतरिक स्थिति और कांग्रेस की रणनीति बनी हुई है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या भाजपा संगठनात्मक एकजुटता के दम पर सीट बचा पाएगी या कांग्रेस घनश्याम सिंह के नेतृत्व में इस उपचुनाव में बाजी मारने में सफल होगी। दतिया का यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक साख की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।