सीज कोचिंग संस्थानों को दोबारा खोलने की मांग, बसपा का डीएम को ज्ञापन; सुरक्षा मानकों के साथ संचालन पर जोर
उरई में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जिलाध्यक्ष डॉ. बृजेश जाटव ने जिलाधिकारी जालौन को ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा मानकों के अभाव में सीज किए गए कोचिंग संस्थानों को आवश्यक शर्तों के साथ दोबारा संचालित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लखनऊ अग्निकांड के बाद सुरक्षा जांच जरूरी थी, लेकिन अचानक बड़ी संख्या में कोचिंग बंद होने से हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कोचिंग संस्थानों को दोबारा खोलने की मांग, बसपा जिलाध्यक्ष ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
सुरक्षा मानकों के साथ संचालन की अनुमति देने की उठाई मांग, छात्रहित और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने पर जोर
उरई। जनपद जालौन में सुरक्षा मानकों के अभाव में सीज किए गए कोचिंग संस्थानों को दोबारा संचालित किए जाने की मांग तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जिलाध्यक्ष डॉ. बृजेश जाटव ने जिलाधिकारी जालौन को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि आवश्यक सुरक्षा शर्तों के साथ बंद पड़े कोचिंग संस्थानों को पुनः खोलने की अनुमति दी जाए, ताकि हजारों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।
ज्ञापन में कहा गया कि हाल ही में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच की गई। इसके तहत जिन संस्थानों में अग्निशमन और अन्य सुरक्षा मानकों की कमी पाई गई, उनके खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई कोचिंग संस्थानों को सीज कर दिया। बसपा का कहना है कि सुरक्षा नियमों का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य जनहित एवं विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पार्टी ने इसे आवश्यक और स्वागतयोग्य कदम बताया है।
हालांकि बसपा नेताओं का कहना है कि अचानक बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थानों के बंद हो जाने से हजारों छात्र-छात्राओं की नियमित पढ़ाई बाधित हो गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड परीक्षाओं और विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने पर चिंता जताई है।
डॉ. बृजेश जाटव ने ज्ञापन में सुझाव दिया कि प्रशासन सुरक्षा और शिक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए व्यावहारिक समाधान निकाले। उन्होंने मांग की कि छोटे एवं मध्यम स्तर के कोचिंग संस्थानों को प्राथमिक अग्निशमन उपकरण, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास व्यवस्था तथा अन्य बुनियादी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की शर्त पर अस्थायी रूप से संचालन की अनुमति दी जाए। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी जारी रहेगी और संस्थानों को सुरक्षा मानक पूरे करने का अवसर भी मिल सकेगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पुराने भवनों अथवा किराए की इमारतों में संचालित कई कोचिंग संस्थानों के लिए सभी सुरक्षा मानकों को तत्काल पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के साथ उचित ग्रेस पीरियड दिया जाना चाहिए। इस दौरान संचालकों से शपथ पत्र लिया जाए कि वे तय समय के भीतर सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे। यदि निर्धारित अवधि में मानकों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तब प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।
बसपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोपरि है। सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन शिक्षा व्यवस्था भी बाधित नहीं होनी चाहिए। प्रशासन यदि मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएगा तो दोनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को ऐसे समाधान पर विचार करना चाहिए जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और सुरक्षा संबंधी सभी नियमों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित हो सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बसपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें मंडल प्रभारी ब्रजभूषण कुशवाहा, मंडल प्रभारी शैलेन्द्र शिरोमणि, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय गौतम, जिला महासचिव उदयवीर दोहरे, जिला प्रभारी उदय चौधरी, राम सनेही जाटव, विनय गौतम, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अल्ताफ खान, कीरत दोहरे, आनंद परिहार, मिथिलेश बरसार सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल रहे।
गौरतलब है कि लखनऊ में हुई आग की घटना के बाद प्रदेश सरकार ने सभी जनपदों में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके तहत अग्निशमन विभाग, प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किए गए। जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी पाई गई, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई और कई स्थानों पर संचालन रोक दिया गया।
इसी क्रम में जालौन जनपद में भी कई कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों और संचालकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब बसपा ने इस मुद्दे को छात्रहित से जोड़ते हुए प्रशासन से पुनर्विचार करने की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक निर्णय या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बंद किए गए संस्थानों को किसी प्रकार की अंतरिम राहत दी जाएगी या नहीं। साथ ही, यह कहना भी उचित नहीं होगा कि सभी कोचिंग संस्थान फर्जी तरीके से संचालित हो रहे थे, क्योंकि इस संबंध में शासन या प्रशासन की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन की कार्रवाई मुख्य रूप से सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। ऐसे में आगे का निर्णय जिलास्तरीय प्रशासन और शासन के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही लिया जाएगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस