मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- "मैं मुंह पर बोलता हूं, किसी को बुरा लगे तो लगे", छात्राओं को दोस्ती और नशे से बचने की दी सलाह
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में बेबाक अंदाज में कहा कि वे जो भी कहते हैं, मुंह पर कहते हैं और इससे किसी को बुरा लगता है तो उन्हें इसकी परवाह नहीं है।
कैलाश विजयवर्गीय ने एक स्कूल में छात्राओं के सामने रक्षाबंधन की अहमियत समझाते हुए एक गीत गुनगुनाया. इसके बाद वह छात्राओं को लव लिहाद के खिलाफ भी आगाह करते हुए नजर आए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग पहचान छिपाकर आते हैं और बेटियों को अपने प्रेम के जाल में फंसा लेते हैं. उनसे सावधान रहने की जरूरत है और सोच-समझकर ही दोस्ती करें.
इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से कहा कि वह हमेशा सामने बोलने में विश्वास रखते हैं, पीठ पीछे नहीं। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, "मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं, पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वो गलत है और जो सही है, वो सही। 70 साल का हो गया हूं, यूं ही सठिया गया हूं... किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं और ठहाके लगाए।
शनिवार को कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के दो अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए। विधानसभा-1 क्षेत्र स्थित पीएम राइस स्कूल अहिल्या आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी, नशामुक्ति और युवाओं को सतर्क रहने जैसे विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी।
बेबाक अंदाज में कही अपनी बात
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में स्पष्टवादिता सबसे बड़ा गुण है। उनका कहना था कि किसी भी व्यक्ति को दोहरी सोच नहीं रखनी चाहिए। जो बात सही है, उसे सही कहना चाहिए और जो गलत है, उसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह वर्षों से इसी सिद्धांत पर चलते आए हैं और आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे।
उन्होंने मजाकिया लहजे में अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह 70 वर्ष के हो चुके हैं, इसलिए किसी की नाराजगी की चिंता नहीं करते। उनके इस बयान को सुनकर कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं, शिक्षक और अन्य अतिथि मुस्कुराए और माहौल हल्का-फुल्का हो गया।
छात्राओं को दोस्ती में सतर्क रहने की सलाह
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने छात्राओं को जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति से दोस्ती करने से पहले उसकी सही पहचान और स्वभाव को अच्छी तरह समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर संबंध बनाते हैं और बाद में सच्चाई सामने आने पर परेशानी खड़ी हो जाती है।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कई बार कोई व्यक्ति अपना वास्तविक नाम या पहचान छिपाकर विश्वास जीतने की कोशिश करता है। इसलिए छात्राओं को हमेशा सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए और किसी भी रिश्ते में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार और अभिभावकों की सलाह को महत्व देने की भी अपील की।
नशामुक्ति को लेकर दिया संदेश
कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में नशामुक्ति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि यदि उनका भाई नशे की लत का शिकार है तो रक्षाबंधन के अवसर पर उसे राखी बांधने से पहले यह संकल्प दिलाएं कि वह नशा छोड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यदि भाई नशा नहीं छोड़ता है तो छात्राएं भगवान श्रीकृष्ण, भगवान भोलेनाथ या हनुमानजी को राखी बांध सकती हैं, लेकिन अपने भाई से स्पष्ट कहें कि जब तक वह नशा नहीं छोड़ेगा, तब तक उसे राखी नहीं बांधी जाएगी। उनके अनुसार ऐसा भावनात्मक संदेश कई बार व्यक्ति को अपनी आदत बदलने के लिए प्रेरित कर सकता है।
परिवार की भूमिका पर दिया जोर
मंत्री ने कहा कि नशे की समस्या से लड़ने में परिवार की सबसे बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि परिवार का कोई सदस्य नशे की हालत में घर आता है तो परिवार को उसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार के सदस्य प्रतीकात्मक रूप से भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण कदम उठाकर भी यह संदेश दे सकते हैं कि वे नशे को स्वीकार नहीं करते।
उनका कहना था कि जब पूरा परिवार एकजुट होकर किसी सदस्य को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करता है तो उसके सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
शिक्षा और सुविधाओं पर भी दिया ध्यान
कार्यक्रम के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने विद्यालय को फर्नीचर और वाटर कूलर भी भेंट किए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ अच्छी मूलभूत सुविधाएं मिलना भी आवश्यक है। उनका कहना था कि स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक विद्यालय का वातावरण बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए उन्हें अच्छे संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने की अपील की।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा
कार्यक्रम में दिए गए कैलाश विजयवर्गीय के बयान अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गए हैं। विशेष रूप से उनका यह कहना कि "70 साल का हो गया हूं, यूं ही सठिया गया हूं... किसी को बुरा लगे तो लगे" अलग-अलग राजनीतिक अर्थों में देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही, लेकिन उनके इस बयान को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कैलाश विजयवर्गीय अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए पहले भी कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं। इस बार भी उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हुए छात्राओं को सतर्क रहने, नशे से दूर रहने और परिवार के साथ मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया। वहीं उनके मंच से दिए गए चुटीले बयान ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया और अब यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस