मध्य प्रदेश में UCC विधेयक पास: विधानसभा में भारी हंगामे के बीच कानून को मंजूरी, CM मोहन यादव बोले- 'अलग-अलग मजहबी तौल-कांटा नहीं चलेगा'
मध्यप्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास हो गया. विपक्ष की प्रवर समिति में भेजने की मांग के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राम से रहीम तक पूरा राज्य एक ही संविधान से चलेगा. सीएम ने दावा किया कि 76% मुस्लिम बहनों ने यूसीसी का समर्थन किया है.
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के भारी हंगामे, नारेबाजी और तीखी बहस के बीच यूसीसी विधेयक बहुमत से पारित हो गया है। विधेयक पर वक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर हमला बोला
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित हो गया। विधेयक पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस ने बिल को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाते हुए इसे प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की मांग की, जबकि भाजपा ने इसे "एक देश, एक कानून" की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी, लेकिन अंततः सरकार ने बहुमत के आधार पर विधेयक पारित करा लिया।
CM मोहन यादव का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा कि अब मध्य प्रदेश में अलग-अलग मजहबी कानून नहीं चलेंगे और सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा। उन्होंने कहा कि राज्य "राम से रहीम और एंथोनी से अकबर तक" एक ही संविधान और एक ही कानून से चलेगा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यूसीसी के समर्थन में प्रदेश की 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि समाज में समानता स्थापित करने और भेदभाव समाप्त करने के लिए यह कानून जरूरी है।
उन्होंने विपक्ष पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि "आज के बाद मध्य प्रदेश में अलग-अलग मजहबी तौल-कांटा नहीं होगा। सभी नागरिकों को एक ही कानून के तहत न्याय मिलेगा।"
सदन में लगे 'जय श्री राम' के नारे
जैसे ही कांग्रेस विधायकों ने बिल का विरोध शुरू किया, मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा विधायकों ने सदन में "जय श्री राम" के नारे लगाए। इसके जवाब में कांग्रेस सदस्यों ने सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच लगातार नारेबाजी होती रही, जिससे सदन का माहौल काफी गर्म रहा।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि "इनके खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के अलग। जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार के दो बेटों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते, तो देश और प्रदेश के नागरिकों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए।
कांग्रेस का विरोध, आरिफ मसूद ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इसमें कई कानूनी और संवैधानिक विसंगतियां हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का अधिकार प्राप्त है।
मसूद ने आरोप लगाया कि यूसीसी के माध्यम से एक विशेष वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के कई विवाद, जो अब तक सिविल मामलों के तहत आते थे, उन्हें आपराधिक मामलों में बदला जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इस कानून में राहत दी गई है, तो मुस्लिम समुदाय को भी समान राहत मिलनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय विस्तृत अध्ययन के लिए प्रवर समिति के पास भेजा जाए।
कैलाश विजयवर्गीय बोले- 10 लाख लोगों से ली गई राय
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह विधेयक किसी बंद कमरे में तैयार नहीं किया गया है। सरकार ने प्रदेशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर लगभग 10 लाख लोगों से सुझाव और राय ली है।
उन्होंने कहा कि "एक देश, एक विधान" भारतीय जनता पार्टी का लंबे समय से संकल्प रहा है और जनता की भावना के अनुरूप ही यह कानून लाया गया है। विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर बिना तथ्य के विरोध करने का आरोप लगाया।
प्रह्लाद पटेल का पलटवार
मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि कांग्रेस के पास इस मुद्दे पर ठोस तर्क नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा से बचने के लिए केवल हंगामा कर रहा है। उनके अनुसार यूसीसी सामाजिक समानता और न्याय सुनिश्चित करने वाला कानून है।
उमंग सिंघार ने उठाया प्रक्रिया पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक पेश करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा के नियमों के अनुसार किसी भी विधेयक की प्रति सदस्यों को कम से कम दो दिन पहले उपलब्ध कराई जानी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
सिंघार ने कहा कि प्रदेश को इस समय यूसीसी की नहीं, बल्कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने की अधिक आवश्यकता है। उन्होंने सरकार पर जनहित के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
विधानसभा अध्यक्ष ने दी व्यवस्था
विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की आपत्ति पर स्पष्ट किया कि सामान्यतः कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद ही ऐसे विधेयक सदन में लाए जाते हैं। हालांकि विशेष परिस्थितियों में सरकार तत्काल भी विधेयक प्रस्तुत कर सकती है और इस मामले में सभी संसदीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
मध्य प्रदेश बना चौथा राज्य
विधेयक पारित होने के साथ ही मध्य प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कानून बनाया गया है। सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी, जबकि विपक्ष इसे संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से विवादित बता रहा है।
विधानसभा में दिनभर चले तीखे राजनीतिक टकराव, नारेबाजी और बहस के बाद आखिरकार सरकार ने अपने बहुमत के दम पर यूसीसी विधेयक पारित करा लिया। अब इस कानून के लागू होने के बाद इसके प्रभाव और कानूनी चुनौतियों पर सभी की नजर रहेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस