भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन: 2 हजार से ज्यादा किसान सड़कों पर, मूंग की 100% MSP खरीद की मांग पर CM हाउस घेराव की तैयारी
मध्य प्रदेश में मूंग की 100 फीसदी MSP पर खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. भोपाल में डेरा डाले किसानों के बीच राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर खरीद सीमा बढ़ाने की मांग की है. सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई है.
मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था के विरोध को लेकर हजारों किसान भोपाल में सड़क पर उतर आए हैं। सरकार के साथ वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है, जिससे राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन गई है। राज्य के अलग-अलग जिलों से आए 2 हजार से अधिक किसान राजधानी की सड़कों पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) का घेराव करने का ऐलान किया है। आंदोलन का मुख्य मुद्दा मूंग की फसल की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद और खाद वितरण में लागू टोकन व्यवस्था को समाप्त करना है।
मंगलवार को किसानों ने पुलिस की कड़ी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के बावजूद राजधानी में प्रवेश कर लिया। कई स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। देर रात तक किसान सड़क किनारे तिरपाल बिछाकर डटे रहे और स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
मूंग की पूरी सरकारी खरीद की मांग
किसानों का कहना है कि सरकार वर्तमान में मूंग की फसल का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदती है। शेष उत्पादन किसानों को खुले बाजार में बेचना पड़ता है, जहां उन्हें काफी कम कीमत मिलती है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांग है कि सरकार मूंग की पूरी फसल को MSP पर खरीदे, ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके। इसके अलावा खाद वितरण के लिए लागू टोकन सिस्टम को समाप्त करने की भी मांग की जा रही है। किसानों का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पाती, जिससे खेती प्रभावित होती है।
पुलिस की तैयारी के बावजूद भोपाल पहुंचे किसान
किसान संगठनों ने पहले ही "भोपाल चलो" आंदोलन का आह्वान किया था। इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने राजधानी की सीमाओं पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। भोपाल के प्रवेश मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए थे और कई सीमाओं को सील कर दिया गया था।
इसके बावजूद हजारों किसान अलग-अलग रास्तों से बैरिकेडिंग पार करते हुए भोपाल में प्रवेश करने में सफल रहे। पुलिस ने उन्हें आरआरएल तिराहे पर रोकने की कोशिश की, जहां किसानों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया, लेकिन किसान वहीं डटे रहे।
सरकार पर भरोसा नहीं, लिखित आश्वासन की मांग
सरकार की ओर से किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया। कृषि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा कर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया। लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि अब वे केवल मौखिक आश्वासन पर विश्वास नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि पहले भी कई बार वादे किए गए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए इस बार उन्हें सरकार से लिखित आश्वासन चाहिए। किसानों ने साफ कहा कि जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों का आर्थिक गणित
किसानों का दावा है कि एक एकड़ भूमि में औसतन पांच क्विंटल मूंग का उत्पादन होता है। इस फसल को तैयार करने में लगभग 20 हजार रुपये तक की लागत आती है। लेकिन सरकार केवल 120 किलो यानी करीब 1.20 क्विंटल मूंग ही MSP पर खरीदती है।
बाकी उत्पादन किसानों को बाजार में बेचना पड़ता है, जहां मूंग का भाव MSP से काफी कम मिलता है। किसानों का कहना है कि ऐसी स्थिति में खेती लाभ का नहीं बल्कि घाटे का सौदा बनती जा रही है।
आंकड़ों में किसानों की समस्या
मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): 8,668 रुपये प्रति क्विंटल
सरकारी खरीद सीमा: 120 किलो प्रति एकड़
प्रति एकड़ औसत उत्पादन: लगभग 5 क्विंटल
बाजार में वर्तमान कीमत: 5,000 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल
प्रति क्विंटल अनुमानित नुकसान: 3,000 से 4,000 रुपये
किसानों का कहना है कि यदि पूरी फसल MSP पर खरीदी जाए तो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
सात दिन का राशन लेकर पहुंचे किसान
आंदोलन को लंबा चलाने की तैयारी के साथ किसान राजधानी पहुंचे हैं। कई किसान अपने साथ सात दिनों का राशन और पीने का पानी लेकर आए हैं। मंगलवार रात किसानों ने सड़क किनारे तिरपाल बिछाकर विश्राम किया।
विभिन्न जिलों से आए किसानों ने सामूहिक भोजन की व्यवस्था भी की। कई संगठनों ने अपने साथ भोजन सामग्री लाई और पंगत लगाकर सभी किसानों ने एक साथ भोजन किया। इससे साफ संकेत मिला कि किसान लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं।
मंगलवार को क्या हुआ?
मंगलवार को करीब 19 किसान संगठनों के दो हजार से अधिक किसान भोपाल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक लिया।
इस दौरान कई जगह किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जबकि किसान लगातार अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
किसानों के आंदोलन को देखते हुए भोपाल पुलिस पूरी तरह सतर्क है। शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन और वज्र वाहन भी तैयार रखे गए हैं।
प्रशासन ने दावा किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।
प्रशासन और किसानों की बैठक रही बेनतीजा
आंदोलन से पहले किसान प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच करीब एक घंटे तक बैठक हुई। प्रशासन ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक बेनतीजा समाप्त होने के बाद किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।
ट्रैफिक पर पड़ा असर
किसानों के प्रदर्शन का असर भोपाल की यातायात व्यवस्था पर भी देखने को मिला। होशंगाबाद रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा। ट्रैफिक पुलिस ने कई रास्तों पर यातायात डायवर्ट किया, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पहले भी किसान कल्याण पर लिए गए थे फैसले
गौरतलब है कि जून महीने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसान कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। सरकार ने किसानों के हित में विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की घोषणा की थी। हालांकि प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर उनकी प्रमुख समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर बुधवार को प्रस्तावित मुख्यमंत्री निवास घेराव पर टिकी है। यदि सरकार और किसान संगठनों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। फिलहाल राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे राजधानी छोड़कर वापस नहीं जाएंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस