MP विधानसभा मानसून सत्र का आगाज आज: खाद-बीज संकट से लेकर UCC तक कई बड़े मुद्दों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

मध्यप्रदेश विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र का आगाज सोमवार से होगा। पहले दिन खाद-बीज संकट और कम बारिश से बने हालात पर अहम चर्चा के साथ डीजे साउंड पर कार्रवाई नहीं होने सहित कई जनहित मुद्दे सदन में गूंजेंगे। विपक्ष सरकार को कानून व्यवस्था, पेपर लीक, जमीन खरीद जैसे मुद्दो पर घेरेगा। वहीं, सरकार यूसीसी बिल पेश करेगी।

MP विधानसभा मानसून सत्र का आगाज आज: खाद-बीज संकट से लेकर UCC तक कई बड़े मुद्दों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक चलेगा, कांग्रेस ने बनाई सरकार को घेरने की रणनीती 

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। 24 जुलाई तक चलने वाले इस सत्र के पहले ही दिन सदन के हंगामेदार रहने के आसार हैं। किसानों को खाद-बीज की कमी, सूखे जैसे हालात, उज्जैन भूमि खरीद मामला, केन-बेतवा परियोजना के विस्थापितों का मुआवजा, नीट यूजी पेपर लीक, सीबीएसई परीक्षा में कथित गड़बड़ियों सहित कई मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, सरकार भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पेश कर सत्र को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में है।

रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के प्रारूप को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। अब इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसे राज्य सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी कदमों में माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा और सवाल उठाने की तैयारी कर चुका है।

सत्र के पहले दिन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार खरीफ सीजन में किसानों को खाद और बीज की कमी तथा कम बारिश से उत्पन्न हालात पर नियम 139 के तहत चर्चा की मांग करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं होने से किसानों की बुवाई प्रभावित हुई है और सरकार इस संकट से निपटने में विफल रही है। विपक्ष इस मुद्दे को पूरे सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाएगा।

इसके अलावा उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े मामलों, केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा न मिलने, नीट यूजी पेपर लीक, सीबीएसई परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। कांग्रेस का कहना है कि जनता से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा।

सत्र के दौरान विभिन्न विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को भी सदन में उठाएंगे। सिलवानी से कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का मामला ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाएंगे। उनका कहना है कि ध्वनि प्रदूषण से आम लोगों को परेशानी हो रही है और प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है।

बुरहानपुर से भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस महाराष्ट्र के पंढरपुर में दर्शन के लिए जाने वाले मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाएंगी। वे इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक समन्वय और व्यवस्थाओं की मांग करेंगी।

भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील राजधानी में मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण और जर्जर सड़कों के सुधार का मुद्दा सदन में रखेंगे। उनका कहना है कि शहर में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या लगातार बढ़ रही है, जबकि कई सड़कें लंबे समय से खराब स्थिति में हैं।

तेंदूखेड़ा विधायक विश्वनाथ सिंह नरसिंहपुर जिले के सिहोरा को जनपद पंचायत का दर्जा देने की मांग करेंगे। वहीं, बिजावर विधायक राजेश शुक्ला छतरपुर जिले के ईशानगर को नगर परिषद बनाने का प्रस्ताव उठाएंगे। परसवाड़ा विधायक मधु भगत सिंगरौली जिले के कोल ब्लॉक की जमीन कम दर पर खरीदे जाने से हुए आर्थिक नुकसान का मामला सदन में रखेंगे।

मानसून सत्र से पहले विधानसभा के सेंट्रल हॉल में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यहां पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्र लगाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2023 में सदन के अंदर आसंदी के दाईं ओर लगी पंडित जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर हटाकर डॉ. भीमराव अंबेडकर का चित्र लगाया गया था, जिस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया था। अब सेंट्रल हॉल में नेहरू का चित्र लगाए जाने को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार की ओर से मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और वित्तीय प्रस्ताव भी पेश किए जाने की संभावना है। इनमें सबसे अधिक चर्चा यूसीसी विधेयक को लेकर है। सरकार इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।

कुल मिलाकर विधानसभा का यह मानसून सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसानों की समस्याओं, शिक्षा, विस्थापन, विकास कार्यों और समान नागरिक संहिता जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। ऐसे में पहले ही दिन से सदन के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं और प्रदेश की राजनीति पर इस सत्र का व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।