ऊना कांड पर मायावती का बड़ा बयान: "दोषियों को सख्त सजा दिलाए सरकार, अभी भी मौका है गुजरात सरकार अपनी गलती सुधार ले"
गुजरात के ऊना में दलित अत्याचार केस के लगभग सभी आरोपी निचली अदालत से बरी हो चुके हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। बसपा प्रमुख मायावती ने इस मामले में गुजरात सरकार से मदद करने की अपील की है।
मायावती ने गुजरात के ऊना दलित उत्पीड़न कांड के आरोपियों के बरी होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने और सरकारी खर्च पर वकील मुहैया कराने की मांग की है।
नई दिल्ली।बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुजरात के चर्चित ऊना दलित अत्याचार कांड को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में हुए इस जघन्य मामले में स्थानीय अदालत द्वारा अधिकांश आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के बाद अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलानी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवारों को सरकारी खर्च पर मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में दलित युवकों के साथ हुई अमानवीय घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में मार्च 2026 में स्थानीय अदालत द्वारा लगभग सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले से बहुजन समाज में गहरी चिंता और निराशा है। उन्होंने कहा कि न्याय पाने के लिए पीड़ित परिवारों को आर्थिक और कानूनी स्तर पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
"मैं खुद पीड़ितों से मिलने गई थी"
मायावती ने कहा कि इस मामले को लेकर उनकी चिंता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत भी है। उन्होंने याद दिलाया कि घटना के बाद वह स्वयं ऊना जाकर पीड़ित परिवारों से मिली थीं और पूरी सच्चाई जानने के बाद गुजरात सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि देशभर में इस घटना को लेकर व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। इसके बावजूद 40 आरोपियों में से 35 का बरी हो जाना यह दर्शाता है कि दलितों के हितों और उनकी सुरक्षा के प्रति सरकार गंभीर नहीं रही। उन्होंने इसे सरकारी उदासीनता और लापरवाही का परिणाम बताया।
गुजरात सरकार से हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी की अपील
बसपा प्रमुख ने कहा कि अभी भी गुजरात सरकार के पास अपनी गलती सुधारने का अवसर है। सरकार को स्थानीय अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर पूरी मजबूती से पक्ष रखना चाहिए ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके और पीड़ित परिवारों को न्याय प्राप्त हो।
उन्होंने कहा कि यदि दोषियों को सख्त सजा मिलती है तो इससे समाज में यह संदेश जाएगा कि दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
मुफ्त कानूनी सहायता देने की मांग
मायावती ने राज्य सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवारों को उनकी संतुष्टि के अनुसार योग्य वकील सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के दौरान गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था की गई थी और गुजरात सरकार को भी उसी प्रकार की पहल करनी चाहिए।
क्या था ऊना कांड?
गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में जुलाई 2016 में कुछ दलित युवकों को कथित रूप से गौहत्या के संदेह में पकड़कर सार्वजनिक रूप से बेरहमी से पीटा गया था। आरोपियों ने युवकों को वाहन से बांधकर लाठियों से पीटा और घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। इस घटना ने पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया और दलित अधिकारों को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ।
घटना के बाद कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और लंबे समय तक इसकी सुनवाई चलती रही। मार्च 2026 में स्थानीय अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर अधिकांश आरोपियों को बरी कर दिया, जिसके बाद इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई।
न्याय की मांग फिर हुई तेज
स्थानीय अदालत के फैसले के बाद अब पीड़ित परिवार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि आर्थिक संसाधनों और कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मायावती ने सरकार से अपील की है कि वह केवल कानूनी लड़ाई में सहयोग ही न करे, बल्कि यह सुनिश्चित करे कि पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिले।
बसपा प्रमुख के इस बयान के बाद ऊना कांड एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि गुजरात सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई किस दिशा में बढ़ती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस