नकुलनाथ ने जीतू पटवारी के साथ साझा किया मंच, दतिया जीत के बाद छिंदवाड़ा में कांग्रेस की नई सियासी रणनीति के संकेत; कमलनाथ के गढ़ में बदलते समीकरणों पर टिकी नजरें

छिंदवाड़ा में जीतू पटवारी और नकुलनाथ के बीच मुलाकात हुई है। दतिया विधानसभा सीट पर जीत के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर सियासी अटकलें लगाई जा रही हैं। कमलनाथ भी लंबे समय से कांग्रेस के कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए हैं।

नकुलनाथ ने जीतू पटवारी के साथ साझा किया मंच, दतिया जीत के बाद छिंदवाड़ा में कांग्रेस की नई सियासी रणनीति के संकेत; कमलनाथ के गढ़ में बदलते समीकरणों पर टिकी नजरें

छिंदवाड़ा में नकुलनाथ-जीतू पटवारी की जुगलबंदी

चार दशक तक कमलनाथ के इर्द-गिर्द रही छिंदवाड़ा की सियासत

नकुलनाथ की हार के बाद बदला राजनीतिक समीकरण

छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने शुरू की संगठन मजबूत करने की कवायद

दतिया उपचुनाव में जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बढ़े उत्साह के बीच छिंदवाड़ा में पार्टी की गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ एक ही मंच साझा किया। दोनों नेताओं की मुलाकात और कार्यक्रम में साथ मौजूदगी को छिंदवाड़ा कांग्रेस की बदलती राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व सांसद नकुलनाथ एक साथ नजर आए। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तौर पर किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। कांग्रेस अब इस जीत को संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा करने के अवसर के रूप में देख रही है। छिंदवाड़ा में आयोजित प्रशिक्षण शिविर भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

चार दशक तक छिंदवाड़ा में रहा कमलनाथ का प्रभाव

छिंदवाड़ा की राजनीति लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द घूमती रही है। करीब चार दशक तक कांग्रेस की राजनीति में कमलनाथ का प्रभाव इतना मजबूत रहा कि छिंदवाड़ा को कांग्रेस और कमलनाथ का गढ़ कहा जाने लगा।

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले तक छिंदवाड़ा में कमलनाथ परिवार की मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके बेटे नकुलनाथ की हार के बाद यहां का राजनीतिक समीकरण बदल गया। भाजपा ने कांग्रेस के इस मजबूत किले में सेंध लगाई और इसके बाद कांग्रेस के सामने संगठन को फिर से मजबूत करने की चुनौती खड़ी हो गई।

अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छिंदवाड़ा में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने के संकेत दिए हैं। यही वजह है कि पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों तक प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता बढ़ी है।

वरिष्ठ पत्रकार मनीष तिवारी के मुताबिक, दशकों तक छिंदवाड़ा में कांग्रेस की राजनीति का मतलब कमलनाथ हुआ करता था। टिकट वितरण से लेकर संगठन के कई महत्वपूर्ण फैसलों तक कमलनाथ की भूमिका निर्णायक रही। लेकिन राज्य में कांग्रेस सरकार के सत्ता से बाहर होने और बाद में नकुलनाथ के लोकसभा चुनाव हारने के बाद परिस्थितियां बदल गईं।

अब छिंदवाड़ा में बदल रहे राजनीतिक नारे

छिंदवाड़ा में कांग्रेस की राजनीति में बदलाव का असर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी दिखाई दे रहा है। जहां कुछ साल पहले तक यहां ‘जय-जय कमलनाथ’ जैसे नारे सुनाई देते थे, वहीं अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के समर्थन में भी नारे लगाए जा रहे हैं।

इसे कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की बदलती भूमिका के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कमलनाथ परिवार का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो गया है। छिंदवाड़ा की राजनीति में कमलनाथ और नकुलनाथ अभी भी महत्वपूर्ण चेहरे हैं।

वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि कमलनाथ के लंबे समय से बने जनाधार को बनाए रखते हुए संगठन को नए नेतृत्व और नई कार्यशैली के साथ आगे कैसे बढ़ाया जाए।

प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने का संदेश

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रशिक्षण शिविर को संगठन के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मंडल और जिला अध्यक्षों के साथ कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

पटवारी के मुताबिक, कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा करने और उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। छिंदवाड़ा में आयोजित यह शिविर दो दिनों का है और इसमें संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पटवारी ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पेपर लीक, किसानों की समस्याओं और युवाओं को रोजगार नहीं मिलने जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने दावा किया कि जनता का रुझान एक बार फिर कांग्रेस की ओर बढ़ रहा है।

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत को भी उन्होंने इसी बदलाव का उदाहरण बताया। पटवारी का कहना है कि कांग्रेस देश को बचाने की मुहिम पर आगे बढ़ रही है और जनता के मुद्दों को लेकर पार्टी लगातार आवाज उठाएगी।

नकुलनाथ ने प्रशिक्षण शिविर को बताया जरूरी

पूर्व सांसद ने भी प्रशिक्षण शिविर को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण लंबे समय से लंबित था और अब इसे छिंदवाड़ा में आयोजित किया गया है।

नकुलनाथ के अनुसार, प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण से कांग्रेस संगठन को नई मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ेगी। नकुलनाथ ने बताया कि छिंदवाड़ा में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने को लेकर उनकी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं से लगातार बातचीत चल रही थी।

जीतू पटवारी के साथ एक ही कार्यक्रम में नकुलनाथ की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि छिंदवाड़ा में कांग्रेस अब पारंपरिक नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

कमलनाथ बेटे नकुलनाथ को कर रहे सक्रिय

छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें से छह सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि एक सीट भाजपा के पास है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद विधानसभा स्तर पर कांग्रेस का संगठन अभी भी मजबूत माना जाता है।

कमलनाथ फिलहाल छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उम्र बढ़ने के साथ अब उनके बेटे नकुलनाथ की सक्रियता भी छिंदवाड़ा की राजनीति में बढ़ रही है। हाल के समय में नकुलनाथ कई बार क्षेत्र के दौरे पर अकेले नजर आए हैं।

राजनीतिक जानकार इसे भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति के तौर पर देखते हैं। कमलनाथ का लंबे समय से छिंदवाड़ा में प्रभाव रहा है और नकुलनाथ को सक्रिय कर कांग्रेस उस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, अब कांग्रेस संगठन में प्रदेश नेतृत्व की भूमिका भी पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है। जीतू पटवारी की सक्रियता और नकुलनाथ की मौजूदगी के बीच पार्टी किस तरह का संतुलन बनाती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा ने साधा निशाना

कांग्रेस की रणनीति पर भाजपा ने भी हमला बोला है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी संदीप सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में लंबे समय तक राजनीति करने के बावजूद संगठन के बजाय अपने परिवार को मजबूत किया।

भाजपा का आरोप है कि कमलनाथ खुद सांसद रहे, उनकी पत्नी भी सांसद रहीं और बाद में उनके बेटे नकुलनाथ को भी लोकसभा भेजा गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे कांग्रेस के दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

हालांकि कांग्रेस इस तरह के आरोपों को राजनीतिक विरोधियों की बयानबाजी बताती रही है।

छिंदवाड़ा में कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती

छिंदवाड़ा में कांग्रेस के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ पार्टी को कमलनाथ परिवार के पारंपरिक प्रभाव और कार्यकर्ताओं के पुराने नेटवर्क को बनाए रखना है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश संगठन को भी मजबूत करना है।

नकुलनाथ और जीतू पटवारी का एक मंच पर आना इसी बदलते समीकरण की तस्वीर पेश करता है। दतिया उपचुनाव की जीत से उत्साहित कांग्रेस अब संगठनात्मक स्तर पर अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि छिंदवाड़ा में कांग्रेस की कमान किस तरह आगे बढ़ती है और कमलनाथ परिवार तथा प्रदेश संगठन के बीच राजनीतिक तालमेल किस रूप में दिखाई देता है। फिलहाल नकुलनाथ और जीतू पटवारी की साझा मौजूदगी ने छिंदवाड़ा की सियासत में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है।