CJP के बाद सोशल मीडिया पर RHA की एंट्री, 46 लाख फॉलोअर्स का दावा; आरक्षण व्यवस्था में बदलाव को लेकर रखीं 5 प्रमुख मांगें

सीजेपी आंदोलन के खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' तेजी से चर्चा में आ गया। इस अभियान ने महज पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स जुटाने का दावा किया। यह समूह खुद को किसी भी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए आरक्षण नीति में बदलाव की मांग कर रहा। आखिर इस अभियान की प्रमुख मांगें क्या हैं और यह इतना तेजी से क्यों चर्चा में आया?

CJP के बाद सोशल मीडिया पर RHA की एंट्री, 46 लाख फॉलोअर्स का दावा; आरक्षण व्यवस्था में बदलाव को लेकर रखीं 5 प्रमुख मांगें

CJP आंदोलन के बाद RHA की एंट्री

5 दिन में 46 लाख फॉलोअर्स का दावा

क्या है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA)?

इंस्टाग्राम पर कैसे चल रहा है अभियान?

सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में करीब 49 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से चर्चा में आ गया है। रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (Reservation Hatao Movement – RHA) नाम से चल रहा यह अभियान दावा कर रहा है कि उसने महज पांच दिनों के भीतर इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स जोड़ लिए हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी बढ़ती सक्रियता ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है।

यह समूह खुद को किसी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए नागरिकों द्वारा चलाया गया अभियान कहता है। इसका मुख्य उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान के उपयोग को समाप्त करने की मांग उठाना बताया जा रहा है। सीजेपी आंदोलन खत्म होने के बाद अलग-अलग सार्वजनिक नीतियों को लेकर सोशल मीडिया पर नए अभियानों के उभरने के बीच आरएचए भी तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है।

क्या है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन?

यह अभियान इंस्टाग्राम पर reservationhataomovement नाम से संचालित किया जा रहा है। समूह के अकाउंट पर 100 से अधिक पोस्ट मौजूद हैं और प्रोफाइल में लिखा गया है कि यह उन नागरिकों का अभियान है जो देश में सुधार और समानता की आवाज उठाना चाहते हैं। प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे "Educate, Agitate, Organize" का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही हिंदी में लिखा गया है—"सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान" और अंत में "जय हिंद" का संदेश दिया गया है।

समूह का कहना है कि उसका किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं है और वह केवल सामाजिक नीति में बदलाव को लेकर अपनी बात रख रहा है।

आरएचए की पांच प्रमुख मांगें

अभियान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार समूह ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इन मांगों का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान की भूमिका कम करना बताया गया है।

पहली मांग यह है कि यदि सरकार का लक्ष्य जाति आधारित भेदभाव समाप्त करना है तो सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान का उपयोग भी समाप्त किया जाए।

दूसरी मांग के अनुसार किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि केवल भारतीय नागरिक के रूप में होनी चाहिए। समूह का कहना है कि सार्वजनिक रूप से जाति का प्रदर्शन या उल्लेख समाप्त किया जाए।

तीसरी मांग में सरकारी आवेदन पत्रों, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, नौकरी के आवेदन और अन्य सार्वजनिक प्रक्रियाओं में जाति का उल्लेख अनिवार्य नहीं रखने की बात कही गई है।

चौथी मांग के तहत समूह का दीर्घकालिक लक्ष्य "वन नेशन, वन आइडेंटिटी – इंडियन" बताया गया है। उनका कहना है कि नागरिकों की पहचान केवल भारतीय के रूप में होनी चाहिए।

पांचवीं मांग के रूप में अभियान ने अपना नारा दिया है—"आरक्षण हटाओ, जाति हटाओ", जिसे वह सामाजिक समानता की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है।

भाजपा और राजनीति पर क्या कहा?

आरएचए ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। समूह का कहना है कि शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि सरकार बदलने के बाद आरक्षण व्यवस्था में बड़े सुधार किए जाएंगे, लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ।

समूह का दावा है कि भाजपा सरकार भी आरक्षण नीति में व्यापक बदलाव नहीं कर सकी और समय के साथ आरक्षण व्यवस्था का विस्तार ही हुआ। इसलिए उनका कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि नीति का विषय है और उनका अभियान केवल नीति में बदलाव की मांग पर केंद्रित है।

सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक अभियानों का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। आरएचए भी पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। इंस्टाग्राम पोस्ट, वीडियो, रील और ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से समूह अपनी मांगों को प्रचारित कर रहा है।

हालांकि किसी भी सोशल मीडिया अभियान के फॉलोअर्स की संख्या या उसके प्रभाव को केवल ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर पूरी तरह नहीं आंका जा सकता। कई बार ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी आवश्यक होती है।

सीजेपी आंदोलन के बाद नए अभियान

सीजेपी का आंदोलन लगभग 49 दिनों तक चला था और 25 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद उसके समाप्त होने की घोषणा की गई थी। आंदोलन के नेताओं का दावा था कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है, जिसके बाद समर्थकों से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील की गई।

सीजेपी आंदोलन समाप्त होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर अन्य मुद्दों को लेकर भी नए अभियान सामने आने लगे। इनमें E20 जनता पार्टी नाम का अभियान भी शामिल है, जो 100 प्रतिशत पेट्रोल के विकल्प की उपलब्धता और इथेनॉल नीति में बदलाव की मांग कर रहा है। इस अभियान को दिल्ली के टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट संगठनों का समर्थन मिलने का भी दावा किया गया है। इन संगठनों ने 4 अगस्त को संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की है।

आरक्षण पर बहस फिर तेज

आरएचए के सामने आने के बाद आरक्षण व्यवस्था को लेकर बहस एक बार फिर सोशल मीडिया पर तेज हो गई है। एक ओर अभियान के समर्थक इसे समान नागरिक पहचान की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कई लोग आरक्षण को सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने का संवैधानिक माध्यम मानते हैं।

भारत में आरक्षण व्यवस्था संविधान के प्रावधानों और समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय तथा सरकारों के निर्णयों के आधार पर संचालित होती है। ऐसे में इस विषय पर किसी भी बड़े बदलाव के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होती है।

सीजेपी आंदोलन के बाद उभरा रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA) फिलहाल सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। समूह ने खुद को गैर-राजनीतिक बताते हुए आरक्षण व्यवस्था और जातिगत पहचान से जुड़े मुद्दों पर पांच प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। दूसरी ओर, इस विषय पर देश में अलग-अलग विचार मौजूद हैं और आरक्षण को लेकर किसी भी बदलाव का निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या जमीनी स्तर पर भी किसी बड़े जनआंदोलन का रूप लेता है।