उज्जैन में भक्ति का अद्भुत संगम: 100 साल पुराने रथ पर निकले भगवान जगदीश, पहली बार तीन रथों पर सवार हुए भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा

उज्जैन समेत मध्यप्रदेश के कई जिलों में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्राएं श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जा रही हैं। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा नगर भ्रमण पर निकले।

उज्जैन में भक्ति का अद्भुत संगम: 100 साल पुराने रथ पर निकले भगवान जगदीश, पहली बार तीन रथों पर सवार हुए भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा

उज्जैन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली. इस्कॉन मंदिर ने पहली बार भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान किया, जबकि 100 साल पुराने पारंपरिक लकड़ी के रथ ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा.

उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया का पर्व इस बार आस्था, परंपरा और भव्यता के अनूठे संगम के रूप में देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर पूरा शहर “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। इस बार की रथ यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही, क्योंकि पहली बार इस्कॉन मंदिर द्वारा भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलदेव और बहन सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया।

वहीं दूसरी ओर उज्जैन के प्रसिद्ध कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से निकली करीब 100 वर्ष पुरानी लकड़ी के रथ की पारंपरिक यात्रा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। प्राचीन परंपरा और आधुनिक भव्यता के इस संगम ने उज्जैन की धार्मिक विरासत को एक बार फिर देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

पहली बार तीन रथों पर निकली इस्कॉन की यात्रा

इस्कॉन मंदिर की ओर से निकाली गई भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र रही। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को एक साथ रथ पर विराजमान कराया जाता है, लेकिन उज्जैन में पहली बार तीन अलग-अलग रथों की व्यवस्था की गई।

भगवान जगन्नाथ के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए रथ को भव्य रूप से सजाया गया था। भगवान बलदेव और माता सुभद्रा के लिए भी अलग-अलग रथ बनाए गए। तीनों रथों पर विराजमान भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

यात्रा के दौरान भक्तों ने जयघोष करते हुए रथ की रस्सी खींची और भगवान से सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का स्वागत किया।

ढाई लाख रुपये की पोशाक में सजे भगवान

इस बार भगवान जगन्नाथ का विशेष श्रृंगार भी चर्चा का विषय रहा। भगवान को करीब ढाई लाख रुपये की आकर्षक पोशाक पहनाई गई। रंग-बिरंगे वस्त्रों, आभूषणों और फूलों से किए गए श्रृंगार ने भगवान के स्वरूप को और भी दिव्य बना दिया।

श्रद्धालु भगवान के इस अलौकिक रूप के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। मंदिर परिसर से लेकर यात्रा मार्ग तक भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ निकली भव्य यात्रा

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को विशेष सम्मान भी दिया गया। गार्ड ऑफ ऑनर के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

100 साल पुराने लकड़ी के रथ पर विराजे भगवान जगदीश

उज्जैन की प्राचीन धार्मिक परंपरा का प्रतीक भगवान जगदीश मंदिर की रथ यात्रा भी श्रद्धालुओं के लिए खास रही। कार्तिक चौक स्थित मंदिर से निकली यह यात्रा करीब 100 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ पर निकाली गई।

यात्रा से पहले मंदिर में भगवान जगदीश का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इसके बाद महाआरती कर भगवान की प्रतिमा को पारंपरिक लकड़ी के रथ में विराजमान कराया गया।

पुराने समय की कला और कारीगरी से तैयार इस रथ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक संस्कृति और परंपरा को करीब से अनुभव करने का अवसर भी था।

1200 गांवों से पहुंचे खाती समाज के लोग

भगवान जगदीश की रथ यात्रा में खाती समाज के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। बताया गया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 1200 गांवों से समाजजन उज्जैन पहुंचे।

श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से रथ खींचकर भगवान जगदीश का नगर भ्रमण कराया। यात्रा में शामिल भक्तों के चेहरों पर आस्था और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।

प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी यात्रा

भगवान जगदीश की रथ यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली। यात्रा कार्तिक चौक से प्रारंभ होकर गणगौर दरवाजा, दानी गेट, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, गुदरी चौराहा और पानदरीबा क्षेत्र से होती हुई वापस मंदिर पहुंची।

पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान का स्वागत किया। कई स्थानों पर पुष्प वर्षा, प्रसादी वितरण और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

आस्था और परंपरा का मिला अद्भुत रूप

उज्जैन में निकली दोनों रथ यात्राओं ने यह साबित कर दिया कि धर्मनगरी की पहचान केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की परंपराएं और आस्था आज भी जीवंत हैं।

एक ओर इस्कॉन मंदिर की आधुनिक भव्यता और पहली बार तीन रथों की व्यवस्था आकर्षण का केंद्र रही, तो दूसरी ओर 100 साल पुराने लकड़ी के रथ ने प्राचीन संस्कृति और विरासत की झलक दिखाई।

भगवान जगन्नाथ और भगवान जगदीश की रथ यात्राओं में उमड़ी भीड़ ने यह संदेश दिया कि उज्जैन में धार्मिक आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं। भक्ति, परंपरा और उत्साह के इस पर्व ने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।