बीजेपी विधायक अजय बिश्नोई ने अपनी ही सरकार को घेरा, बोले- PWD मंत्री की प्राथमिकता में नहीं सड़क; सीएम से लगाई जल्द निर्माण की गुहार

पूर्व मंत्री और पाटन विधायक अजय विश्नोई ने अपनी ही सरकार के मंत्री राकेश सिंह पर हमला बोला है। उनकी शिकायत पाटन रोड को लेकर है। इस पर भोपाल-जबलपुर का ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है, जिसकी वजह से हादसे हो रहे हैं।

बीजेपी विधायक अजय बिश्नोई ने अपनी ही सरकार को घेरा, बोले- PWD मंत्री की प्राथमिकता में नहीं सड़क; सीएम से लगाई जल्द निर्माण की गुहार

मध्य प्रदेश में अपनी सरकार के खिलाफ बोले बीजेपी विधायक, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी लिखा पत्र.

जबलपुर। मध्य प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय बिश्नोई ने अपनी ही सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नेशनल हाईवे-45 पर शहपुरा के क्षतिग्रस्त रेलवे ओवरब्रिज और जबलपुर-पाटन मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर सीधे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को निशाने पर लिया है। बिश्नोई ने कहा कि सड़क निर्माण का प्रस्ताव बजट में शामिल होने के बावजूद मंत्री की प्राथमिकता में नहीं है, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप कर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए अजय बिश्नोई ने कहा कि शहपुरा का पुल पिछले पांच महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। इसके चलते भोपाल-जबलपुर मार्ग का भारी यातायात पाटन रोड की ओर डायवर्ट कर दिया गया है। लगातार भारी वाहनों के गुजरने से पाटन मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है और आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं।

'आज फिर एक जान चली गई'

अजय बिश्नोई ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भोपाल-जबलपुर का ट्रैफिक पाटन की ओर मोड़े जाने के कारण एक और व्यक्ति की जान चली गई। उन्होंने कहा कि शहपुरा का पुल अब तक नहीं बन पाया है, जबकि भारी वाहनों की आवाजाही से पाटन रोड पूरी तरह खराब हो चुकी है। सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और आम लोगों की जान जोखिम में पड़ गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जबलपुर-पाटन सड़क को चौड़ा और मजबूत करने की योजना राज्य के बजट में शामिल है, लेकिन लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की प्राथमिकताओं में यह परियोजना नहीं होने के कारण अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी। इससे क्षेत्र की जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

पूर्व मंत्री बिश्नोई ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस पूरे मामले की जानकारी दी और उन्हें एक पत्र भी सौंपा। पत्र में उन्होंने जबलपुर-पाटन और पाटन-मानकेड़ी सड़क निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन सड़कों का जल्द निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले समय में दुर्घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि शहपुरा पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और वैकल्पिक मार्गों को भी जल्द मजबूत किया जाए ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

तीन साल में ही क्षतिग्रस्त हुआ 400 करोड़ का पुल

शहपुरा के पास नेशनल हाईवे-45 पर बना रेलवे ओवरब्रिज लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। यह पुल भोपाल और जबलपुर के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। लेकिन निर्माण के महज तीन वर्ष के भीतर ही पुल में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने लगीं।

पहले दिसंबर महीने में पुल की एक लेन धंस गई थी। इसके बाद हाल ही में दूसरी लेन का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने पुल पर यातायात बंद कर दिया और पूरे ट्रैफिक को पाटन मार्ग की ओर डायवर्ट कर दिया। इसके बाद से पाटन रोड पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ गया है।

अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

पुल की खराब गुणवत्ता और लापरवाही सामने आने के बाद मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) ने मामले की जांच कराई। जांच में तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक और संभागीय प्रबंधक को लापरवाही का जिम्मेदार माना गया।

इसके बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए उनकी पेंशन रोकने के लिए पत्र जारी किया गया। हालांकि, अधिकारियों पर कार्रवाई के बावजूद पुल का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिससे जनता की परेशानियां लगातार बनी हुई हैं।

विधानसभा में भी उठा था मामला

शहपुरा पुल का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र में भी जोर-शोर से उठा। अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जबलपुर का लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत वाला राष्ट्रीय राजमार्ग पुल चार साल के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले दावा किया था कि पुल तीन महीने में ठीक हो जाएगा, लेकिन छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुल चालू नहीं हो पाया। इससे हजारों लोगों को रोजाना लंबा चक्कर लगाकर यात्रा करनी पड़ रही है।

लखन घनघोरिया ने यह भी आरोप लगाया कि अब ठेकेदार को पुल निर्माण के लिए तीन वर्ष का अतिरिक्त समय दे दिया गया है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए कहा कि खराब निर्माण कार्य का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

दूसरे पुलों की गुणवत्ता पर भी सवाल

विधानसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक ने राज्य में हाल ही में बने अन्य पुलों और पुलियों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिवनी-केवलारी मार्ग पर मोहबर्रा और सारसडोल गांव को जोड़ने वाला लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत का पुल मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित किए जाने के महज दो दिन बाद बारिश में बह गया।

इसी तरह उन्होंने सावेर रोड, होशियार नदी ब्रिज और होशियारखेड़ी पुलिया का भी उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बने ये निर्माण कार्य पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। इससे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सरकार पर बढ़ा दबाव

एक ओर विपक्ष लगातार सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सरकार पर हमलावर है, वहीं अब भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय बिश्नोई द्वारा अपनी ही सरकार के मंत्री पर सवाल उठाने से यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्तारूढ़ दल के भीतर से उठी यह आवाज सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।

फिलहाल लोगों की निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि शहपुरा पुल का निर्माण और जबलपुर-पाटन सड़क का चौड़ीकरण जल्द शुरू नहीं हुआ, तो क्षेत्र में जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ सकते हैं। जनता की सबसे बड़ी मांग यही है कि लंबे समय से अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कर सुरक्षित और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जाए।