भोपाल में सीलिंग विवाद ने पकड़ा तूल: सरकार बनाएगी नया मास्टर प्लान, 60 फीट सड़क को अर्ध-व्यावसायिक करने की मांग

भोपाल के सीलिंग विवाद में सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन के साथ व्यापारियों और रहवासियों को राहत देने का रास्ता तलाश रही है। मास्टर प्लान की तैयारी जारी है। व्यापारी चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के पक्ष में हैं।

भोपाल में सीलिंग विवाद ने पकड़ा तूल: सरकार बनाएगी नया मास्टर प्लान, 60 फीट सड़क को अर्ध-व्यावसायिक करने की मांग

भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश हैं। इसके बाद स्थानीय निवासी भी इसके समर्थन में हैं। वहीं, व्यापारियों के सामने इस पर प्रतिबंध से रोजी-रोटी के संकट हैं।

भोपाल में रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चल रहा विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम द्वारा व्यापारियों को नोटिस जारी किए जाने से कारोबारी वर्ग में नाराजगी बढ़ गई है। दूसरी ओर, आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक और मामले के याचिकाकर्ता नियमों के विपरीत संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच राज्य सरकार अब ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों को भी राहत मिल सके।

भोपाल के कई रिहायशी इलाकों में लंबे समय से दुकानें, ऑफिस, क्लीनिक और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। समय के साथ इन क्षेत्रों में कारोबार का विस्तार हुआ, लेकिन शहर की बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों के अनुरूप नए व्यवस्थित व्यावसायिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाए। अब यही स्थिति सीलिंग और कार्रवाई के विवाद का कारण बन रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कार्रवाई

आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम प्रशासन ने संबंधित व्यापारियों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस मिलने के बाद व्यापारियों में चिंता और असंतोष है। उनका कहना है कि कई प्रतिष्ठान वर्षों से संचालित हो रहे हैं और उनमें बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।

व्यापारी संगठनों का तर्क है कि सभी व्यावसायिक गतिविधियों को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। कॉलोनियों की छोटी गलियों में नियमों के विपरीत चल रहे कारोबार और चौड़ी मुख्य सड़कों पर वर्षों से संचालित बाजारों की स्थिति अलग है। इसलिए सरकार को क्षेत्रवार व्यवस्था बनाकर समाधान निकालना चाहिए।

वहीं, रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। पार्किंग की समस्या, ट्रैफिक, शोर, जल निकासी और सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि आवासीय भूखंडों का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए, जिसके लिए उन्हें स्वीकृति मिली है।

नगर निगम अध्यक्ष बोले- आदेशों का पालन भी होगा, राहत भी देंगे

नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा है कि सरकार और नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए समाधान तलाशा जा रहा है।

उनका कहना है कि इस मामले में दोनों पक्षों की अपनी-अपनी समस्याएं हैं। रहवासी चाहते हैं कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां नियंत्रित हों, जबकि व्यापारियों का कारोबार कई वर्षों से संचालित हो रहा है। ऐसे में सरकार कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे दोनों पक्षों के हितों का संतुलन बनाया जा सके।

सूर्यवंशी के मुताबिक सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और बेहतर कानूनी विकल्पों पर काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना किए बिना प्रभावित लोगों को राहत देने की संभावनाएं तलाशना जरूरी है।

मास्टर प्लान पर टिकी व्यापारियों की उम्मीद

सीलिंग विवाद के बीच भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती आबादी के अनुरूप नए व्यावसायिक क्षेत्रों का विकास नहीं हुआ। इसके कारण पुराने बाजारों पर दबाव बढ़ा और धीरे-धीरे आवासीय इलाकों में भी व्यापारिक गतिविधियां फैलती चली गईं।

नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया कि सरकार नए मास्टर प्लान को लेकर काम कर रही है। भोपाल के महानगरीय क्षेत्र के रूप में विस्तार और नए क्षेत्रों को जोड़ने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक विकास योजना तैयार की जा रही है।

सरकार की कोशिश है कि भविष्य में शहर के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से व्यवस्थित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस दिशा में काम चल रहा है और सरकार जल्द ही योजना को शहर के सामने लाने की तैयारी में है।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी बोले- नियम तोड़ने की छूट नहीं

मामले के याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि अरेरा कॉलोनी समेत कई इलाकों में आवासीय भूखंडों का इस्तेमाल व्यावसायिक निर्माण के लिए किया गया है।

उनके मुताबिक इससे स्थानीय रहवासियों को पार्किंग, ट्रैफिक, जल निकासी और सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में आवासीय भवन के निर्माण की अनुमति लेने के बाद उसी परिसर में व्यावसायिक निर्माण या गतिविधियां शुरू कर दी गईं।

त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम को प्रत्येक मामले में यह देखना चाहिए कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ है या नहीं। यदि स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण हुआ है या भूखंड का उपयोग निर्धारित उद्देश्य से अलग किया जा रहा है तो नियमों के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

उनका यह भी तर्क है कि नया मास्टर प्लान लंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि वर्तमान नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति मिल जाती है। जब तक किसी क्षेत्र का भू-उपयोग आधिकारिक रूप से नहीं बदला जाता, तब तक मौजूदा नियमों का पालन जरूरी है।

60 फीट सड़क को अर्ध-व्यावसायिक बनाने की मांग

दूसरी तरफ व्यापारियों ने सरकार के सामने क्षेत्रवार समाधान का प्रस्ताव रखा है। 10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष रामचंद्र पाटीदार का कहना है कि कॉलोनी के अंदर छोटी सड़कों और गलियों में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन 60 और 80 फीट चौड़ी मुख्य सड़कों की स्थिति अलग है।

पाटीदार की मांग है कि 60 फीट चौड़ी सड़कों को अर्ध-व्यावसायिक और 80 फीट चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक क्षेत्र घोषित करने पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि इन मार्गों पर लंबे समय से बड़े स्तर पर कारोबार चल रहा है। यदि इन क्षेत्रों को व्यवस्थित रूप से व्यावसायिक उपयोग की अनुमति मिलती है तो कारोबार भी जारी रह सकेगा और छोटी आवासीय गलियों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार पहले इस समस्या के समाधान के लिए समिति भी बना चुकी है, लेकिन न्यायालय के निर्देशों के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब सरकार को भोपाल की वास्तविक स्थिति न्यायालय के सामने रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशना चाहिए।

बाजार नहीं बढ़े तो आवासीय इलाकों पर बढ़ा दबाव

व्यवसायी अमृत गहलोत का कहना है कि भोपाल में लंबे समय से नए और व्यवस्थित व्यावसायिक बाजार विकसित नहीं हुए। इसके कारण पुराने बाजारों में कारोबार का दबाव बढ़ता गया। जैसे-जैसे शहर का विस्तार हुआ, लोगों की जरूरतें बढ़ीं और कई आवासीय क्षेत्रों में भी दुकानें और अन्य व्यवसाय शुरू होते गए।

गहलोत के मुताबिक समस्या का समाधान पूरी तरह से सीलिंग या पूरी तरह से छूट देने में नहीं है। सरकार को बीच का रास्ता तलाशना चाहिए। चौड़ी मुख्य सड़कों पर जहां पर्याप्त जगह, पार्किंग और यातायात की व्यवस्था संभव है, वहां व्यावसायिक या अर्ध-व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं छोटी सड़कों और अंदरूनी आवासीय गलियों में व्यावसायिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जा सकता है।

रहवासियों की चिंता भी गंभीर

व्यापारियों की दलीलों के बीच रहवासियों की समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ते कारोबार के कारण कई स्थानों पर सड़क किनारे पार्किंग, दिनभर वाहनों की आवाजाही, ग्राहकों की भीड़ और कचरे जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

रहवासियों का तर्क है कि किसी क्षेत्र को आवासीय घोषित किए जाने के पीछे वहां रहने वाले लोगों को शांत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी एक उद्देश्य होता है। यदि उसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो जाएं तो आवासीय क्षेत्र का मूल स्वरूप प्रभावित होता है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

भोपाल का सीलिंग विवाद अब सरकार के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी और निवेश से जुड़ी चिंता है। रहवासी भी चाहते हैं कि नियमों का सख्ती से पालन हो और उनके क्षेत्रों का आवासीय स्वरूप बरकरार रहे।

ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि नियमों और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। नए मास्टर प्लान से भविष्य की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर तत्काल समाधान जरूरी है।

फिलहाल व्यापारी चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक या अर्ध-व्यावसायिक दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, जबकि रहवासी और याचिकाकर्ता नियमों के उल्लंघन वाले निर्माण पर कार्रवाई चाहते हैं। अब सबकी नजर सरकार की अगली कानूनी और प्रशासनिक पहल तथा नए मास्टर प्लान पर है।