दतिया चुनावी रण में उतरीं भोपाल की ट्रांसजेंडर संजना सिंह, किन्नर अखाड़ों के समर्थन से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की नई पहल
मध्य प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह दतिया उपचुनाव लड़ रही हैं।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह ने नामांकन दाखिल किया है. वह किन्नर समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और उनकी आवाज को नीति निर्माण तक पहुंचाने के मकसद से चुनाव लड़ रही हैं. वहीं, भाजपा ने भी चुनाव संचालन समिति बनाकर तैयारियां तेज कर दी हैं.
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और प्रतिनिधित्व के नए संदेश के साथ भी देखा जा रहा है। भोपाल की रहने वाली और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह (संजना नंद गिरि) ने नामांकन दाखिल कर चुनावी मैदान में उतरते हुए इस उपचुनाव को नई पहचान दे दी है। भाजपा, कांग्रेस सहित कुल 22 प्रत्याशियों के बीच हो रहे इस मुकाबले में संजना सिंह की उम्मीदवारी चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
संजना सिंह मध्य प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी रह चुकी हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग में लंबे समय तक सेवाएं दीं। इसके अलावा वे स्वच्छ भारत मिशन और राज्य निर्वाचन आयोग की स्टेट आइकॉन भी रहीं। सरकारी सेवा के दौरान सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्होंने करीब दो वर्ष पहले अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और किन्नर अखाड़े से जुड़ गईं। बाद में उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि भी प्रदान की गई।
समाज की मुख्यधारा में किन्नर समुदाय की भागीदारी लक्ष्य
संजना सिंह का कहना है कि उनका चुनाव लड़ने का उद्देश्य केवल विधायक बनना नहीं है, बल्कि किन्नर समाज को नीति निर्माण और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्यधारा तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को लंबे समय तक केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखा गया, जबकि वे भी शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक सेवा और राजनीति जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित कर सकते हैं।
वे प्रचार के दौरान मतदाताओं से कह रही हैं कि उनका न कोई परिवार है और न ही कोई उत्तराधिकारी होगा। ऐसे में उनका पूरा जीवन समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेगा। उनका कहना है कि उन्हें व्यक्तिगत संपत्ति या पारिवारिक राजनीति की चिंता नहीं है, इसलिए वे पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से जनता के हित में काम करना चाहती हैं।
देशभर से जुटेंगे किन्नर अखाड़ों के प्रतिनिधि
संजना सिंह ने दावा किया है कि उनके चुनाव प्रचार में देशभर के किन्नर समुदाय और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके लिए कई राज्यों के किन्नर समाज से संपर्क किया गया है। उनका कहना है कि यह चुनाव केवल दतिया की एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि पूरे किन्नर समाज के सम्मान, पहचान और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा अभियान है।
उनका मानना है कि यदि समाज किन्नर समुदाय को जनप्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करता है, तो इससे आने वाले समय में देशभर के ट्रांसजेंडर लोगों को राजनीति में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
राजनीतिक मुकाबला हुआ दिलचस्प
दतिया विधानसभा उपचुनाव पहले से ही प्रदेश की प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं। ऐसे में संजना सिंह की एंट्री ने चुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है। कुल 22 उम्मीदवार मैदान में हैं और सभी अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं को साधने में जुटे हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि भले ही चुनावी परिणाम कुछ भी हों, लेकिन संजना सिंह की उम्मीदवारी ने ट्रांसजेंडर समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
भाजपा ने बनाई 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति
दतिया उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सांसद भारत सिंह कुशवाह की सहमति से 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति का गठन किया है।
समिति की कमान प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सौंपी गई है। वहीं पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया को चुनाव अभियान प्रमुख और पूर्व विधायक रणवीर रावत को सह-प्रमुख बनाया गया है।
इसके अलावा समिति में जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह, सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल सहित विभिन्न सामाजिक और जातीय वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई स्थानीय नेताओं को शामिल किया गया है। भाजपा का उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करते हुए चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाना है।
किन्नर समाज के प्रति सोच बदलने की अपील
संजना सिंह का कहना है कि चुनाव लड़ने का उनका सबसे बड़ा उद्देश्य समाज में किन्नर समुदाय के प्रति बनी पारंपरिक धारणाओं को बदलना है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके लिंग से नहीं, बल्कि उसकी योग्यता, ईमानदारी और समाज सेवा से होनी चाहिए।
उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि यदि समाज ट्रांसजेंडर समुदाय को अवसर देगा तो वे भी जनसेवा और विकास के क्षेत्र में बेहतर काम करके दिखा सकते हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी नागरिकों को समान अवसर मिलना चाहिए और राजनीति भी इससे अलग नहीं हो सकती।
चुनाव से बढ़ी नई राजनीतिक बहस
दतिया विधानसभा उपचुनाव में संजना सिंह की उम्मीदवारी ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। पहली बार किन्नर समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र में हर वर्ग को नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा, कांग्रेस और अन्य प्रत्याशियों के बीच होने वाले इस मुकाबले में मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं। लेकिन इतना तय है कि संजना सिंह की एंट्री ने दतिया उपचुनाव को सामान्य राजनीतिक मुकाबले से आगे बढ़ाकर सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान भागीदारी की बहस का केंद्र बना दिया है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस