राहुल गांधी के सामने छात्रों ने खोला पुलिस बर्बरता का राज: लाठीचार्ज, पैलेट गन और जबरन माफी के आरोप; बोले- अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही असली राष्ट्रवाद
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने नीट प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों के हौसले को सलाम किया. उन्होंने साढ़े दस मिनट का छात्रों के साथ बातचीत का वीडियो भी शेयर किया है. इसमें छात्रों ने नीट प्रदर्शन के दौरान अपने साथ हुई घटनाओं का जिक्र किया है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन को लेकर पुणे में नए कार्यक्रम की घोषणा की है। ‘छात्रों की गूंज’ के तहत 22 अगस्त को होने वाला कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं के लिए आयोजित किया जाएगा। राहुल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिंसा का भी आरोप लगाया।
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए देश के युवाओं और छात्रों के संघर्ष की सराहना की है। करीब साढ़े दस मिनट के इस वीडियो में राहुल गांधी उन छात्रों और छात्राओं से बातचीत करते नजर आ रहे हैं, जो नीट परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे थे। बातचीत के दौरान छात्रों ने पुलिस कार्रवाई, कथित हिरासत, बदसलूकी और जबरन माफी मंगवाए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में युवाओं के साहस की तारीफ करते हुए कहा कि देश के युवाओं ने सरकार से जवाबदेही मांगने के लिए मजबूती से आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश की और तमाम दबावों के बावजूद उनका हौसला कायम रहा।
छात्रों ने सुनाई पुलिस कार्रवाई की कथित दास्तां
राहुल गांधी से बातचीत के दौरान एक छात्रा ने बताया कि उसका पेपर लीक नहीं हुआ था, लेकिन वह अपनी बहन के समर्थन और छात्रों के साथ कथित अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुई थी। छात्रा के मुताबिक, युवाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाना उसे अपना कर्तव्य लगा।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने पुलिस पर कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि उसे सात बार लाठियां मारी गईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी नेम-प्लेट हटा रखी थीं और चेहरा ढका हुआ था। कुछ पुलिसकर्मियों के सादे कपड़ों में होने का भी दावा किया गया।
छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के साथ मारपीट की गई और उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष इस विवरण में शामिल नहीं है।
पैलेट गन के इस्तेमाल का भी आरोप
वीडियो में छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का भी दावा किया। एक छात्रा ने राहुल गांधी को एक छात्र के घायल होने की घटना के बारे में बताया। उसके मुताबिक, छात्र के कान के पास पैलेट लगने से गंभीर चोट आई और उसे सर्जरी तक करानी पड़ी।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान छात्रों को देशद्रोही और आतंकवादी तक कहा गया। कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें वाहनों में बंद रखा गया और कई घंटे तक बाहर नहीं निकलने दिया गया।
छात्रों के मुताबिक, इस दौरान उनके मोबाइल फोन भी ले लिए गए। उन्होंने अधिकारियों पर कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप भी लगाए।
सोशल मीडिया पर बदनाम करने का आरोप
वीडियो में मुंबई के नीट प्रदर्शन से जुड़ी रिया अहीर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सामान्य फोटो और वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में प्रसारित किया गया। उनका दावा था कि तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ या उन्हें ब्लर कर इस तरह पेश किया गया, जिससे उन्हें बदनाम और डराने की कोशिश हुई।
छात्राओं ने कहा कि प्रदर्शन के बाद उन्हें सामाजिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। उनका आरोप था कि आंदोलन में शामिल होने वाली लड़कियों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।
जबरन माफी मंगवाने का आरोप
छात्रों ने बातचीत में एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ छात्राओं को कैमरे के सामने माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उनके मुताबिक उन्होंने कोई गलती नहीं की थी।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि अगर छात्राओं ने स्वेच्छा से माफी नहीं मांगी थी, तो उनसे कैमरे के सामने माफी क्यों मंगवाई गई? उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से कथित तौर पर उस माफी को स्वीकार करने और धन्यवाद देने पर भी सवाल उठाए।
छात्रों ने इस पूरी प्रक्रिया को एक तरह का राजनीतिक और सार्वजनिक ड्रामा बताया। उनका कहना था कि आंदोलनकारी छात्राओं को दबाव में लाकर माफी मंगवाने की कोशिश की गई।
राहुल गांधी ने छात्राओं के साहस को सराहा
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विशेष रूप से देश की बेटियों और छात्राओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उन लड़कियों पर गर्व है, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपनी आवाज उठाई।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्राओं को कथित तौर पर गाली-गलौज, धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां ऐसी बनाई गईं कि कुछ लड़कियों को प्रधानमंत्री से माफी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।
राहुल गांधी के मुताबिक, इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद छात्राओं का हौसला नहीं टूटा है। उन्होंने कहा कि अब देश की बेटियों की आवाज को दबाना आसान नहीं होगा।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का ऐलान
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के जरिए युवाओं से जुड़े एक आगामी कार्यक्रम की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 22 अगस्त को 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पुणे पहुंचेगा। इस कार्यक्रम को विशेष रूप से छात्राओं के लिए आयोजित किए जाने की बात कही गई है।
राहुल गांधी के अनुसार, इस मंच पर देश की बेटियां अपनी बात खुद रखेंगी और अपने अनुभव साझा करेंगी। उन्होंने युवाओं से इस अभियान से जुड़ने की अपील भी की है। इसके लिए पोस्ट में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था और क्यूआर कोड/लिंक साझा किए जाने की जानकारी दी गई है।
छात्रों ने कहा—संघर्ष सिर्फ हमारा नहीं
वीडियो के अंत में छात्रों ने अपने आंदोलन को केवल व्यक्तिगत लड़ाई मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष उन सभी नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा है, जो किसी न किसी रूप में अन्याय का सामना कर रहे हैं।
छात्रों ने कहा कि दूसरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना ही वास्तविक राष्ट्रवाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें व्यवस्था के उस रूप का सामना करना पड़ा, जहां जिस पुलिस से सुरक्षा की उम्मीद होती है, उसी पर कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका हौसला नहीं टूटा है और वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों तथा न्याय के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
राजनीतिक मुद्दा बनने की तैयारी
राहुल गांधी द्वारा छात्रों के साथ बातचीत का वीडियो साझा किए जाने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस लगातार युवाओं, छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने उठाती रही है।
राहुल गांधी का यह वीडियो भी इसी राजनीतिक अभियान की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसमें छात्रों के कथित अनुभवों को सामने रखकर सरकार और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की गई है।
हालांकि, वीडियो में लगाए गए पुलिस बर्बरता, हिरासत, पैलेट गन और जबरन माफी जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस विवरण में नहीं हुई है। ऐसे में इन दावों पर संबंधित प्रशासन और पुलिस का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल राहुल गांधी ने छात्रों और खास तौर पर छात्राओं के संघर्ष को अपना समर्थन देते हुए कहा है कि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकेगा। 22 अगस्त को पुणे में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस इस मुद्दे को और व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस