CJP ने सरकार के सामने रखी शर्त, कहा- नड्डा के दफ्तर नहीं जाएंगे, बातचीत करनी है तो जंतर-मंतर आएं

एक तरफ जहां सरकार गतिरोध समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर आने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी तरफ CJP ने अपनी शर्त रख दी है. इसके साथ ही सीजेपी ने शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन की अपील की है.

CJP ने सरकार के सामने रखी शर्त, कहा- नड्डा के दफ्तर नहीं जाएंगे, बातचीत करनी है तो जंतर-मंतर आएं

नीट पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध बना हुआ है. एक तरफ जहां सरकार गतिरोध समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर आने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी तरफ CJP ने अपनी शर्त रख दी है. इसके साथ ही सीजेपी ने शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन की अपील की है.

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। करीब एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश तेज हो गई है। हालांकि, बातचीत की जगह को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को साफ किया कि वह CJP के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से पिछले 24 घंटे में CJP को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए चार बार प्रस्ताव भेजा गया है।

लेकिन CJP ने सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। संगठन ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बातचीत करना चाहती है तो उसे जंतर-मंतर आना चाहिए या फिर किसी तटस्थ स्थान पर बैठक करनी चाहिए। CJP का कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल के नेता के घर या कार्यालय में जाकर बातचीत नहीं करेगा।

24 जुलाई को देशभर में प्रदर्शन का ऐलान

CJP ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना चाहिए।

इससे पहले 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ सख्ती की, जबकि प्रशासन का कहना था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए।

जंतर-मंतर पर एक महीने से जारी प्रदर्शन

CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा है। छात्रों की मांग है कि NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

इस आंदोलन को उस समय और ज्यादा चर्चा मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए। उन्होंने 28 जून से अनशन शुरू किया था। लगातार अनशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सरकार के रुख में बदलाव क्यों आया?

लगातार बढ़ते दबाव के बीच सरकार का रुख भी बदलता नजर आ रहा है। शुरुआत में प्रशासन ने प्रदर्शन को सीमित रखने के लिए बैरिकेडिंग, हिरासत और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए थे। लेकिन अब सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

इसके पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं।

1. आंदोलन का देशभर में विस्तार

शुरुआत में यह प्रदर्शन केवल कुछ छात्रों तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसे कई राज्यों से समर्थन मिलने लगा। सोनम वांगचुक के जुड़ने और छात्रों की लगातार मौजूदगी से आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

2. विपक्ष का समर्थन

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष संसद में भी इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

3. संसद मार्च के बाद बढ़ा दबाव

20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद हुआ। इस घटना के बाद मामला और राजनीतिक रूप से गरमा गया। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोला और संसद में भी हंगामा हुआ।

4. कांग्रेस के प्रदर्शन से सरकार घिरी

21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने भी पेपर लीक मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को बातचीत की पहल के लिए आगे किया गया।

5. बातचीत की जगह पर विवाद

सरकार चाहती है कि बातचीत जेपी नड्डा के घर या कार्यालय में हो, लेकिन CJP इससे सहमत नहीं है। संगठन का तर्क है कि इससे आंदोलन पर राजनीतिक रंग लग सकता है।

CJP खुद को छात्र आंदोलन बता रहा है। ऐसे में किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में जाकर बातचीत करने से उसकी निष्पक्ष छवि प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

संगठन चाहता है कि बैठक जंतर-मंतर या किसी ऐसे स्थान पर हो जहां दोनों पक्ष बराबरी की स्थिति में बातचीत कर सकें।

अब आगे क्या होगा?

सरकार और CJP के बीच बातचीत को लेकर अंतिम सहमति अभी नहीं बन पाई है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर कायम हैं। एक तरफ सरकार समाधान के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कह रही है, वहीं CJP अपनी मांगों और स्थान को लेकर स्पष्ट रुख अपना रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी बीच के रास्ते पर सहमत होते हैं या फिर आंदोलन और तेज होता है। NEET पेपर लीक का मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।