खाद बिक्री पर कांग्रेस का सरकार को अल्टीमेटम: जीतू पटवारी बोले- रोक नहीं हटाई तो सड़कों पर उतरेंगे, किसानों के हक में होगा बड़ा आंदोलन

मध्यप्रदेश सरकार ने आगामी आदेश तक राज्य में खाद की बिक्री पर रोक लगा दी है। जिसके बाद जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है और दो मांगें रखी हैं। पीसीसी चीफ ने कहा कि अगर सरकार ने खाद बिक्री पर लगी रोक को नहीं हटाया तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।

खाद बिक्री पर कांग्रेस का सरकार को अल्टीमेटम: जीतू पटवारी बोले- रोक नहीं हटाई तो सड़कों पर उतरेंगे, किसानों के हक में होगा बड़ा आंदोलन

स्टॉक मैचिंग’ के नाम पर खाद बिक्री रोकने का विरोध, कांग्रेस ने तत्काल आदेश वापस लेने और किसानों को बिना परेशानी खाद उपलब्ध कराने की मांग की

भोपाल। मध्यप्रदेश में खाद की बिक्री पर सरकार की ओर से लगाई गई रोक को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर किसानों को खाद के लिए परेशान करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कांग्रेस ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने खाद की बिक्री पर लगाई गई रोक तत्काल वापस नहीं ली और किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था बहाल नहीं की, तो पार्टी किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरेगी।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में किसान पहले से ही खाद की कमी, सीमित आपूर्ति और लंबी कतारों से परेशान हैं। ऐसे समय में सरकार द्वारा खाद की बिक्री आगामी आदेश तक बंद किए जाने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को किसान विरोधी बताते हुए तत्काल बिक्री शुरू करने की मांग की है।

जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के किसान पहले से खाद की भारी कमी और लंबी लाइनों से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने ‘स्टॉक मैचिंग’ के नाम पर पूरे प्रदेश में खाद की बिक्री पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है।

पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा नेताओं से जुड़ी समितियों, सरकारी समितियों, एमपी एग्रो और निजी रिटेलर्स के स्तर पर खाद की बिक्री बंद हो गई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या अपनी नाकामी और खाद की कथित कालाबाजारी को छिपाने के लिए यह फैसला लिया गया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को खाद की जरूरत ऐसे समय में है, जब खेती के लिए उर्वरक की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में बिक्री पर रोक लगाने से किसानों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस ने सरकार के सामने रखीं दो प्रमुख मांगें

जीतू पटवारी ने केंद्र और राज्य सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि किसानों से जुड़ा यह आदेश तत्काल वापस लिया जाए और प्रदेश में खाद की बिक्री दोबारा शुरू की जाए।

दूसरी मांग के तहत उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसानों को बिना किसी परेशानी और रुकावट के तत्काल खाद उपलब्ध हो। कांग्रेस का कहना है कि स्टॉक सत्यापन या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

पटवारी ने कहा कि किसानों को यह समझना जरूरी है कि खाद की उपलब्धता किस स्तर पर है और बिक्री क्यों रोकी गई है। कांग्रेस ने सरकार से खाद के वास्तविक स्टॉक और वितरण व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता बरतने की मांग भी की है।

‘रोक नहीं हटी तो सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस’

कांग्रेस ने सरकार को आंदोलन की सीधी चेतावनी दी है। जीतू पटवारी ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने खाद की बिक्री पर लगाई गई रोक तत्काल नहीं हटाई, तो कांग्रेस किसानों के हक में सड़कों पर उतरकर कड़ा आंदोलन करेगी।

कांग्रेस इस मुद्दे को किसानों के बीच ले जाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि खाद की समस्या केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर किसानों की खेती और उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द व्यवस्था सामान्य करनी चाहिए।

विपक्ष के इस रुख के बाद खाद का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के आसार हैं। कांग्रेस जहां सरकार पर किसान विरोधी फैसले लेने का आरोप लगा रही है, वहीं सरकार की ओर से खाद बिक्री रोकने के पीछे प्रशासनिक और स्टॉक सत्यापन की प्रक्रिया को वजह बताया गया है।

14 अगस्त को जारी हुआ था खाद बिक्री रोकने का आदेश

गौरतलब है कि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की ओर से 14 अगस्त 2026 को खाद की बिक्री से संबंधित आदेश जारी किया गया था। आदेश में प्रदेश में उर्वरकों की बिक्री आगामी आदेश तक बंद रखने की बात कही गई है।

सरकार की ओर से इसके पीछे स्टॉक मिलान की प्रक्रिया को कारण बताया गया है। आदेश के अनुसार किसानों को सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के FMS पोर्टल पर दर्ज खाद के स्टॉक और प्रदेश में उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाना है।

इसी प्रक्रिया के चलते प्रदेश में उर्वरकों की बिक्री को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध स्टॉक और पोर्टल पर दर्ज स्टॉक के बीच स्थिति स्पष्ट करना बताया गया है, ताकि आगे किसानों को खाद वितरण में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

स्टॉक वेरिफिकेशन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस का कहना है कि स्टॉक का सत्यापन अपनी जगह जरूरी हो सकता है, लेकिन इसकी वजह से खाद की बिक्री पूरी तरह बंद कर देना किसानों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। पार्टी ने सरकार से सवाल किया है कि यदि किसानों को खाद की जरूरत है तो सत्यापन की प्रक्रिया के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि खाद की उपलब्धता को लेकर किसान पहले से ही परेशान हैं और कई जगहों पर खाद लेने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। ऐसे में बिक्री पर रोक से समस्या और गंभीर हो सकती है।

विपक्ष का कहना है कि सरकार को स्टॉक मिलान की प्रक्रिया जल्द पूरी करनी चाहिए और किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।

खाद संकट पर बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव

मध्यप्रदेश में खाद का मुद्दा पहले भी किसानों के लिए संवेदनशील रहा है। खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की उपलब्धता को लेकर किसी भी तरह की बाधा किसानों की चिंता बढ़ा सकती है। अब सरकार के आदेश के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

आने वाले दिनों में यदि बिक्री पर लगी रोक जारी रहती है तो कांग्रेस प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपना सकती है। इससे सरकार पर खाद की व्यवस्था जल्द सामान्य करने का दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल सरकार की ओर से स्टॉक मिलान की प्रक्रिया को बिक्री रोकने की वजह बताया गया है। वहीं कांग्रेस तत्काल रोक हटाकर किसानों को खाद उपलब्ध कराने की मांग पर अड़ी हुई है। ऐसे में खाद की बिक्री कब तक दोबारा शुरू होती है और सरकार इस राजनीतिक विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देती है, इस पर किसानों के साथ-साथ पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।