मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती को जेल, बिना अनुमति धरना देने पर पुलिस की कार्रवाई
दंपती ने प्रदर्शन के लिए सोशल मीडिया और टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन से भीड़ जुटाने का प्रयास किया था। सूचना मिलने के 1 घंटे के भीतर पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को हिरासत में लिया और धारा 151 के तहत कार्रवाई की।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे दंपती के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। घटना के बाद मंत्री के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई।
इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इंदौर स्थित निवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे एक दंपती को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, दंपती बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के मंत्री के घर के सामने धरना देने पहुंचे थे। पूछताछ में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और यह भी सामने आया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अन्य लोगों से भी प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। हालांकि, उनके साथ कोई भी प्रदर्शनकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
यह पूरा मामला बुधवार दोपहर का है, जब प्रहलाद पाण्डेय और उनकी पत्नी संगीता हाथों में भारतीय संविधान की प्रति लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर पहुंचे। दोनों ने मंत्री के हालिया बयानों पर नाराजगी जताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू करने का प्रयास किया। लेकिन इससे पहले ही पुलिस को सोशल मीडिया के जरिए उनके प्रदर्शन की जानकारी मिल चुकी थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंत्री के निवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया।
सोशल मीडिया पर की थी प्रदर्शन में शामिल होने की अपील
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रहलाद पाण्डेय और उनकी पत्नी ने प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर संदेश प्रसारित कर लोगों से मंत्री के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्रों के धरना-प्रदर्शन में भी जाकर छात्रों से उनके साथ मंत्री के निवास तक चलने का आग्रह किया था। हालांकि, किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया और दोनों अकेले ही मंत्री के घर पहुंचे।
पुलिस पहले से थी सतर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन की सूचना उन्हें लगभग एक घंटे पहले सोशल मीडिया के माध्यम से मिल गई थी। सूचना मिलते ही मंत्री के बंगले के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई और पुलिस अधिकारी मौके पर तैनात हो गए।
जब दंपती प्रदर्शन के लिए पहुंचे तो पुलिस ने पहले उन्हें रोका और समझाने का प्रयास किया कि बिना अनुमति किसी संवेदनशील स्थान पर धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने उनसे वहां से हटने का अनुरोध किया, लेकिन दोनों नहीं माने।
सड़क पर बैठे, पुलिस ने हिरासत में लिया
बताया गया कि बातचीत के दौरान प्रहलाद पाण्डेय सड़क पर बैठ गए और प्रदर्शन जारी रखने की जिद करने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उठाकर सरकारी वाहन में बैठाया। उनकी पत्नी संगीता को भी हिरासत में लिया गया और दोनों को परदेशीपुरा थाना ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने बिना अनुमति प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। पुलिस का कहना है कि दंपती को बाद में अपनी गलती का एहसास भी हो गया था।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
परदेशीपुरा थाना प्रभारी (टीआई) आर.डी. कानवा ने बताया कि दंपती के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 151 के तहत शांति भंग की आशंका में कार्रवाई की गई। साथ ही बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
मंत्री के बयान से आहत होने का दावा
दंपती का कहना था कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हाल ही में दिए गए कुछ सार्वजनिक बयानों से वे आहत हुए हैं। इसी के विरोध में वे संविधान की प्रति लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे।
हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है। मंत्री के आवास जैसे संवेदनशील स्थान पर बिना अनुमति विरोध प्रदर्शन सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर मामला माना जाता है। इसी कारण समय रहते कार्रवाई की गई।
सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
घटना के दौरान मंत्री के निवास के बाहर पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने स्थिति को शांतिपूर्वक संभाला और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी। चूंकि सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की अपील की गई थी, इसलिए पुलिस किसी भी संभावित भीड़ या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार थी।
राजनीतिक और कानूनी पहलू
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब प्रदेश में विभिन्न मुद्दों को लेकर अलग-अलग संगठनों और नागरिकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए कानून और प्रशासनिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बिना अनुमति संवेदनशील स्थानों पर प्रदर्शन करने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के लिए किए गए संदेशों में और कौन-कौन लोग जुड़े थे। हालांकि अब तक की जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन के समय दंपती के साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और न ही किसी ने उनका साथ दिया। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस