दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने दोनों दलों की पहली पसंद: कांग्रेस के बाद भाजपा भी साध रही संपर्क, 25 मिनट की मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल
दतिया उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। वहीं, कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रहे पार्टी के विधानसभा क्षेत्र के बड़े नेता अवधेश नायक की नाराजगी चर्चा में है। वो पार्टी की गतिविधियों से दूर हैं।.
दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने सियासत का केंद्र
टिकट नहीं मिलने के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल
पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने की 25 मिनट बंद कमरे में चर्चा
कांग्रेस ने नाराजगी दूर करने की शुरू की कवायद
भाजपा भी लगातार बनाए हुए है संपर्क
मंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने भी की मुलाकात
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बीच पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता अवधेश नायक प्रदेश की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद नाराज बताए जा रहे अवधेश नायक को लेकर अब कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सक्रिय हो गई हैं। दोनों दल उन्हें अपने पाले में बनाए रखने या शामिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मुकेश नायक उनके निवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब 25 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद दतिया की राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं।
कांग्रेस की बढ़ी चिंता
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, लेकिन टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष भी सामने आया है। अवधेश नायक का नाम टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल था। टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई, जिसके बाद कांग्रेस नेतृत्व भी सतर्क हो गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अवधेश नायक का दतिया विधानसभा क्षेत्र में मजबूत जनाधार है। वे लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और संगठन के साथ-साथ कार्यकर्ताओं पर भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में यदि वे पार्टी छोड़ते हैं तो कांग्रेस को चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इसी चिंता के चलते कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने की कवायद तेज कर दी है। शुक्रवार को पूर्व मंत्री मुकेश नायक का उनके घर पहुंचना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच हुई लंबी चर्चा को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
बंद कमरे में हुई अहम बातचीत
शुक्रवार सुबह हुई इस मुलाकात में करीब 25 मिनट तक दोनों नेताओं ने अकेले बातचीत की। हालांकि बैठक के बाद किसी भी नेता ने चर्चा का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। लेकिन सूत्रों का कहना है कि बातचीत का मुख्य विषय दतिया उपचुनाव और अवधेश नायक की आगे की राजनीतिक भूमिका रही।
कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि अवधेश नायक पार्टी में बने रहें और चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाएं। वहीं, उनके समर्थक भी चाहते हैं कि पार्टी नेतृत्व उनकी राजनीतिक भूमिका और सम्मान को लेकर स्पष्ट आश्वासन दे।
भाजपा भी लगातार बनाए हुए है संपर्क
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी अवधेश नायक को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और एक मंत्री पहले ही उनके निवास पहुंचकर उनसे मुलाकात कर चुके हैं। भाजपा की कोशिश है कि यदि अवधेश नायक कांग्रेस से दूरी बनाते हैं तो उन्हें पार्टी में शामिल कर राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में किया जाए।
भाजपा यह अच्छी तरह समझती है कि अवधेश नायक के आने से दतिया उपचुनाव में उसे अतिरिक्त राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। क्षेत्र में उनके समर्थकों की संख्या और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा उन्हें अपने लिए उपयोगी मान रही है।
हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा है कि पार्टी उनके संपर्क में बनी हुई है।
अवधेश नायक ने नहीं खोले पत्ते
लगातार हो रही राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद अवधेश नायक ने अभी तक अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि "हम अपने कार्यकर्ताओं से सलाह लेकर ही अंतिम निर्णय करेंगे। जो भी फैसला होगा, वह सभी साथियों की राय और जनता की भावना को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।"
उनके इस बयान से साफ है कि फिलहाल उन्होंने किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया है। यही कारण है कि दोनों दलों की निगाहें उनके अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।
समर्थकों की बैठक भी हो सकती है अहम
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि आने वाले दिनों में अवधेश नायक अपने प्रमुख समर्थकों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं की बैठक बुला सकते हैं। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। यदि कार्यकर्ता कांग्रेस में बने रहने की सलाह देते हैं तो वे पार्टी के साथ रह सकते हैं, जबकि भाजपा में जाने की संभावना भी पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जा रही है।
उनके समर्थकों का कहना है कि अवधेश नायक हमेशा कार्यकर्ताओं की राय को महत्व देते रहे हैं और इस बार भी अंतिम निर्णय सामूहिक सहमति से ही लिया जाएगा।
दतिया उपचुनाव में बढ़ा सस्पेंस
दतिया विधानसभा उपचुनाव पहले ही राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में अवधेश नायक का निर्णय चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
यदि वे कांग्रेस के साथ बने रहते हैं तो पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिलेगी। वहीं यदि वे भाजपा का दामन थामते हैं तो कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है। इसके अलावा यदि वे कोई अलग राजनीतिक राह चुनते हैं या तटस्थ रहते हैं, तब भी चुनावी मुकाबले पर उसका असर देखने को मिल सकता है।
दोनों दलों की रणनीति पर टिकी नजर
फिलहाल दतिया की राजनीति का केंद्र अवधेश नायक बने हुए हैं। कांग्रेस उन्हें मनाने में जुटी है तो भाजपा भी उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए है। आने वाले कुछ दिनों में उनका फैसला यह तय कर सकता है कि दतिया उपचुनाव का राजनीतिक मुकाबला किस दिशा में जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवधेश नायक का अगला कदम केवल एक नेता का व्यक्तिगत निर्णय नहीं होगा, बल्कि यह दतिया उपचुनाव के पूरे चुनावी समीकरण को बदलने की क्षमता रखता है। इसलिए प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों के साथ-साथ पूरे राजनीतिक जगत की नजर अब उनके अगले ऐलान पर टिकी हुई है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस