17 वर्षों का इंतजार खत्म, कटनी में देश की सबसे लंबी जल सुरंग ‘स्लीमनाबाद टनल’ से 6 जिलों के 1450 गांवों होंगे लाभान्वित,सीएम ने लिया जायजा
जिले के प्रभारी मंत्री भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। आज सीएम के निरीक्षण के दौरान अक्टूबर माह तक टनल से होकर पानी पहुंचाने को लेकर उद्घाटन में बड़े कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण - 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई - इंजीनियरिंग के चमत्कार से बदल जाएगी विंध्य-महाकौशल की तकदीर - 100 साल तक जैसी बनी है वैसी रहेगी टनल, भूकंप का नहीं होगा असर
कटनी। मध्य प्रदेश के महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी 11.95 किलोमीटर जल सुरंग (स्लीमनाबाद वाटर टनल) लगभग तैयार हो चुकी है। करीब 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह परियोजना अब हजारों किसानों और लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। इस सुरंग के माध्यम से पहली बार बरगी बांध से नर्मदा का पानी कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित छह जिलों तक पहुंचेगा।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने परियोजना को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाओं में से एक बताया। इसके बाद उन्होंने सुरंग निर्माण में जुटे मजदूरों के सम्मान कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उनसे संवाद भी किया। मुख्यमंत्री ने इसी दौरान स्लीमनाबाद में नव-निर्मित सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण भी किया।
1450 गांवों और लाखों किसानों को मिलेगा लाभ
स्लीमनाबाद टनल के शुरू होने के बाद बरगी बांध का पानी पहली बार नर्मदा घाटी से बाहर विंध्य और बुंदेलखंड के क्षेत्रों तक पहुंच सकेगा। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। शुरुआती चरण में लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सीधे सिंचाई का लाभ मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से केवल खेती ही नहीं बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और वर्षा पर निर्भरता कम होगी। लंबे समय से सूखे और जल संकट का सामना कर रहे विंध्य एवं बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
17 साल की कठिन यात्रा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। प्रारंभिक अनुमान की तुलना में निर्माण के दौरान कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियां सामने आईं, जिसके कारण परियोजना की लागत बढ़ते-बढ़ते करीब 2 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
सुरंग निर्माण के दौरान इंजीनियरों को अलग-अलग प्रकार की भूगर्भीय परतों का सामना करना पड़ा। कहीं संगमरमर मिला तो कहीं चूना पत्थर, मिट्टी और विशाल बोल्डरों की कठोर चट्टानें सामने आईं। इन कठिन परिस्थितियों में सुरंग खोदने वाली मशीनों के कटर बार-बार टूटते रहे। केवल कटर बदलने और मरम्मत पर ही लगभग 67 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े।
मीथेन गैस और मशीन खराब होने से रुका काम
परियोजना के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक वर्ष 2013 में सामने आई, जब सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव होने लगा। सुरक्षा कारणों से लगभग चार महीने तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रखना पड़ा।
इसके बाद वर्ष 2016 में अमेरिका से मंगाई गई अत्याधुनिक रॉबिन्स टनल बोरिंग मशीन (TBM) भी खराब हो गई। मशीन में आई तकनीकी खराबी के कारण निर्माण कार्य फिर प्रभावित हुआ। बाद में जर्मनी से नई मशीन मंगाई गई, जिसके बाद निर्माण कार्य दोबारा गति पकड़ सका।
भूजल बना सबसे बड़ी चुनौती
निर्माण के दौरान इंजीनियरों के सामने एक और बड़ी समस्या भूजल के रूप में आई। अनुमान से कहीं अधिक मात्रा में पानी सुरंग के भीतर आने लगा। हर मिनट 18 से 20 हजार लीटर पानी का रिसाव होने से निर्माण कार्य लगातार प्रभावित होता रहा।
शुरुआत में 50 से 100 हॉर्स पावर क्षमता के पंप लगाए गए, लेकिन पानी का दबाव बढ़ने पर इन्हें बदलकर 4000 हॉर्स पावर तक की क्षमता वाले पंप लगाने पड़े। केवल सुरंग से पानी निकालने यानी डी-वाटरिंग पर ही सरकार को 200 करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने पड़े। इसके बावजूद इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने लगातार प्रयास जारी रखे और आखिरकार परियोजना को अंतिम चरण तक पहुंचाया।
मुख्यमंत्री ने मजदूरों का किया सम्मान
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुरंग निर्माण में योगदान देने वाले इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और मजदूरों के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद इस परियोजना को पूरा करना इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने मजदूरों से संवाद करते हुए उनके योगदान को प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण बताया।
सुरक्षा के बीच हुआ मुख्यमंत्री का दौरा
मुख्यमंत्री के कटनी दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। प्रशासन ने किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन या अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इसराइल को उनके घर से हिरासत में ले लिया। उनके साथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों से युवा कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को भी एहतियातन हिरासत में लिया गया। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया।
क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर
स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना को मध्य प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। इसके पूरा होने से न केवल किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि जल संकट से जूझ रहे विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। करीब 17 वर्षों की लंबी तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के बाद यह परियोजना अब अपने लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है और आने वाले समय में लाखों लोगों के जीवन पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस