दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की ताकत बने अवधेश नायक: जीतू पटवारी के साथ मंच पर दिखे, भाजपा पर ब्राह्मण विरोधी राजनीति का लगाया आरोप
दतिया उपचुनाव में गरजे जीतू पटवारी, भाजपा को बताया 'ब्राह्मण विरोधी', कहा- भार्गव और अनूप मिश्रा के बाद नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना अपमान।
कांग्रेस उम्मीदवार के प्रचार में उतरे अवधेश नायक
टिकट नहीं मिलने से आई थी नाराजगी की खबरें
बीजेपी नेताओं ने अवधेश नायक से की थी मीटिंग
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बीच कांग्रेस को उस समय बड़ी राहत मिली जब पार्टी के चर्चित नेता और पूर्व भाजपा नेता अवधेश नायक शनिवार को चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आए। पिछले कई दिनों से उनके चुनावी प्रचार से दूरी बनाए रखने को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ मंच साझा कर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।
शनिवार को आयोजित कांग्रेस की जनसभाओं और जनसंपर्क अभियान में अवधेश नायक ने पार्टी प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में जनता से वोट देने की अपील की। मंच पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने भाजपा सरकार और उसके नेतृत्व पर तीखे राजनीतिक हमले किए तथा कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया।
टिकट नहीं मिलने के बाद थीं नाराजगी की चर्चाएं
अवधेश नायक दतिया की राजनीति का चर्चित चेहरा हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय पार्टी ने पहले उन्हें उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन बाद में टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बना दिया गया। इसके बाद भी उन्होंने पार्टी के साथ बने रहने का फैसला किया।
इस बार दतिया विधानसभा उपचुनाव में भी अवधेश नायक को कांग्रेस टिकट का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी उनके नाम की चर्चा जोरों पर थी। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने अंततः कुंवर घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। टिकट वितरण के बाद अवधेश नायक की नाराजगी की खबरें सामने आने लगीं।
प्रचार से दूरी ने बढ़ाई थीं अटकलें
उम्मीदवार घोषित होने के बाद कांग्रेस की कई महत्वपूर्ण सभाओं और प्रचार कार्यक्रमों में अवधेश नायक नजर नहीं आए। उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी। इस दौरान भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता और मंत्री भी उनके निवास पर पहुंचे, जिससे सियासी अटकलें और तेज हो गईं। वहीं कांग्रेस के कई नेता भी लगातार उनसे संपर्क में रहे और उन्हें चुनाव प्रचार में सक्रिय करने की कोशिश करते रहे।
इन घटनाक्रमों के बाद यह चर्चा होने लगी थी कि कहीं अवधेश नायक पार्टी नेतृत्व से नाराज तो नहीं हैं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन सभी चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
बोले- पहले भी कांग्रेस के साथ था, आज भी हूं
दैनिक भास्कर से बातचीत में अवधेश नायक ने स्पष्ट कहा कि उनका कांग्रेस के प्रति पूरा समर्पण है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े थे और आज भी पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए वे पूरी ताकत से प्रचार करेंगे।
उनके इस बयान के बाद यह संदेश गया कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार का मतभेद अब चुनावी अभियान पर असर नहीं डालेगा और कांग्रेस एकजुट होकर मैदान में उतर चुकी है।
जीतू पटवारी ने भाजपा पर साधा निशाना
चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने समय-समय पर ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की है। पटवारी ने कहा कि पहले गोपाल भार्गव और अनूप मिश्रा जैसे नेताओं को राजनीतिक रूप से किनारे किया गया और अब पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उनका अपमान किया गया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं कर रही है और जनता इस उपचुनाव में इसका जवाब देगी। पटवारी ने कांग्रेस सरकार की पूर्व योजनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है।
कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता
शनिवार के कार्यक्रम में अवधेश नायक की मौजूदगी को कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भी इससे उत्साह देखने को मिला। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि अवधेश नायक के सक्रिय प्रचार में आने से चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि उनका क्षेत्र में अच्छा जनाधार माना जाता है।
कांग्रेस अब पूरे दमखम के साथ दतिया उपचुनाव में भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाकर प्रचार अभियान को तेज करने में जुटा है।
भाजपा भी पूरी ताकत से मैदान में
दूसरी ओर भाजपा भी इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का चुनाव मानते हुए लगातार प्रचार अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री, केंद्रीय नेताओं और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की सभाओं के जरिए पार्टी मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। ऐसे में दतिया विधानसभा उपचुनाव का मुकाबला दिन-ब-दिन और रोचक होता जा रहा है।
राजनीतिक महत्व बढ़ा उपचुनाव का
दतिया विधानसभा उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस इस सीट पर जीत हासिल कर संगठन को नई ऊर्जा देना चाहती है, जबकि भाजपा अपनी राजनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
अब अवधेश नायक के सक्रिय प्रचार में उतरने के बाद चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बड़े नेताओं की सभाएं और जनसंपर्क अभियान इस चुनाव को और अधिक गर्माने वाले हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस