दतिया में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत, भाजपा 6056 वोटों से परास्त; नरोत्तम के गढ़ में भी कमल ढेर

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने 6056 वोटों से जीत दर्ज की है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी बीजेपी पिछड़ी

दतिया में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत, भाजपा 6056 वोटों से परास्त; नरोत्तम के गढ़ में भी कमल ढेर

मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस ने जीत ली है. यहां से कांग्रेस के घनश्याम सिंह जीते हैं. दतिया में कांग्रेस 6,053 वोटों से जीत गई है. दतिया में बीजेपी के आशुतोष तिवारी ये उपचुनाव हार गए हैं. इस हार से दतिया सीट पर बीजेपी को झटका लगा है.

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पराजित कर सियासी हलकों में बड़ा संदेश दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6056 वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। इस नतीजे ने न केवल दतिया की राजनीति को नई दिशा दी है, बल्कि प्रदेश की सियासत में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

चुनाव परिणाम के दौरान सबसे अधिक चर्चा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ नंबर 121 की रही। इस बूथ पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यहां कांग्रेस को 291 वोट, जबकि भाजपा को 264 वोट मिले। इसे भाजपा के लिए प्रतीकात्मक झटका माना जा रहा है, क्योंकि डॉ. मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं।

मतगणना में उतार-चढ़ाव, लेकिन कांग्रेस रही आगे

मतगणना की शुरुआत से ही कांग्रेस ने बढ़त बना ली थी। शुरुआती राउंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, कांग्रेस ने अपनी बढ़त मजबूत कर ली।

नौवें राउंड तक कांग्रेस की बढ़त 9519 वोटों तक पहुंच गई थी। इसके बाद भाजपा ने कुछ राउंड में अंतर कम किया। 14वें राउंड में कांग्रेस को 6614 और भाजपा को 3100 वोट मिले, जिसके बाद बढ़त घटकर 7459 वोट रह गई। अंतिम राउंड तक भाजपा ने कुछ और अंतर कम किया, लेकिन कांग्रेस ने बढ़त बनाए रखी और आखिरकार 6056 वोटों से जीत दर्ज की।

भाजपा प्रत्याशी ने भीतरघात को बताया हार का कारण

परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी के भीतरघात ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा उनके लिए मां के समान है और वे पार्टी नेतृत्व के साथ बैठकर हार के कारणों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने संकेत दिए कि संगठन स्तर पर भी पूरे चुनाव का विश्लेषण किया जाएगा।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगे और भविष्य में अधिक मजबूती के साथ वापसी का प्रयास करेंगे।

कांग्रेस बोली- बदलाव का संकेत है यह जीत

विजयी उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने जीत के बाद कहा कि जनता ने विकास, विश्वास और लोकतंत्र के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस भीतरघात की बात कर रही है, उससे चुनाव परिणाम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है।

घनश्याम सिंह ने दावा किया कि यह परिणाम केवल दतिया की जीत नहीं बल्कि प्रदेश में राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि जनता अब भाजपा की नीतियों से निराश हो चुकी है और परिवर्तन चाहती है।

मेलोडी टॉफी खिलाकर दी जीत की बधाई

चुनाव परिणाम के बाद मतगणना केंद्र के बाहर रोचक दृश्य भी देखने को मिला। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने एक-दूसरे को मेलोडी टॉफी खिलाकर जीत की बधाई दी। हाल के दिनों में मेलोडी टॉफी राजनीतिक चर्चाओं और सोशल मीडिया पर कई बार चर्चा का विषय रही है। इसी कारण नेताओं द्वारा टॉफी खिलाकर जीत का जश्न मनाने की तस्वीरें भी तेजी से वायरल हुईं।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया, मिठाइयां बांटी और जीत का उत्सव मनाया। समर्थकों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में रैली निकालकर अपनी खुशी का इजहार किया।

नरोत्तम मिश्रा के लिए बढ़ी चुनौती

दतिया सीट लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने 7742 वोटों से हराया था। अब उपचुनाव में भी भाजपा को हार मिलने से पार्टी के सामने संगठन और जनाधार को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

विशेष रूप से उनके पोलिंग बूथ पर भाजपा की हार को राजनीतिक विश्लेषक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भाजपा को क्षेत्र में संगठनात्मक स्तर पर नए सिरे से काम करना पड़ सकता है।

क्यों हुआ था उपचुनाव?

दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक फ्रॉड मामले में अदालत द्वारा दो वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद रिक्त हुई थी। कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने यहां उपचुनाव कराया।

इस उपचुनाव में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया। पूरे चुनाव के दौरान दोनों दलों ने जोरदार प्रचार किया और कई वरिष्ठ नेताओं ने सभाएं भी कीं।

प्रदेश की राजनीति पर असर

दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, जबकि भाजपा को संगठन और रणनीति पर गंभीर मंथन करना पड़ेगा। लगातार दूसरी बार दतिया में मिली हार ने भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।

दूसरी ओर कांग्रेस इसे जनता के विश्वास की जीत बताते हुए आगामी चुनावों के लिए सकारात्मक संकेत मान रही है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस परिणाम के राजनीतिक संदेश का अपने-अपने तरीके से विश्लेषण करेंगे, लेकिन इतना तय है कि दतिया उपचुनाव ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।