MSME भुगतान नियमों में बदलाव की मांग, टेक्सटाइल-गारमेंट सेक्टर के लिए 75 दिन की सीमा का सुझाव — चम्पालाल बोथरा
CAIT ने MSME भुगतान नियमों में बदलाव की मांग करते हुए टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर के लिए अधिकतम भुगतान अवधि 45 से बढ़ाकर 75 दिन करने का सुझाव दिया है। CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने सरकार से MSMED Act और Income Tax Act की धारा 43B(h) में आवश्यक सामंजस्य की मांग की है।
MSME संशोधन कानून का CAIT ने किया स्वागत, टेक्सटाइल-गारमेंट उद्योग के लिए 75 दिन की भुगतान सीमा की मांग
नई दिल्ली। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की नेशनल टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा पारित नए MSME संशोधन कानून का स्वागत करते हुए इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार बताया है। CAIT का कहना है कि नए प्रावधानों से MSME क्षेत्र में विलंबित भुगतान से जुड़े विवादों के त्वरित निपटारे, वित्तीय सुरक्षा और व्यापारिक कार्यक्षमता को मजबूती मिलेगी। हालांकि, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र की विशिष्ट आपूर्ति श्रृंखला को देखते हुए संगठन ने भुगतान की अधिकतम वैधानिक अवधि को 45 दिन से बढ़ाकर 75 दिन किए जाने का नीति सुझाव दिया है।
CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय MSME मंत्री जितन राम मांझी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा चांदनी चौक से सांसद एवं CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल को विस्तृत नीतिगत पत्र भेजकर टेक्सटाइल और गारमेंट कारोबार से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। पत्र में उद्योग की सप्लाई चेन, भुगतान चक्र और वर्किंग कैपिटल से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए आवश्यक नीतिगत संशोधनों की मांग की गई है।
नए कानून से MSME क्षेत्र को मजबूती की उम्मीद
CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के अनुसार, नए MSME संशोधन कानून में विलंबित भुगतान विवादों के त्वरित निपटारे के साथ ऑनलाइन विवाद समाधान यानी ODR, MSME फैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC), TReDS प्लेटफॉर्म और रिकवरी मैकेनिज्म को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। संगठन का मानना है कि इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से छोटे और मध्यम कारोबारियों को समय पर भुगतान प्राप्त करने में मदद मिलेगी और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
CAIT का कहना है कि MSME इकाइयों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक समय पर भुगतान नहीं मिलना है। कारोबार में भुगतान अटकने से छोटी इकाइयों का कार्यशील पूंजी चक्र प्रभावित होता है। इससे उत्पादन, कर्मचारियों के भुगतान, कच्चे माल की खरीद और अगले ऑर्डर को पूरा करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।
45 दिन की सीमा को लेकर टेक्सटाइल उद्योग की चिंता
CAIT के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान MSMED Act के तहत निर्धारित 45 दिनों की अधिकतम भुगतान सीमा टेक्सटाइल एवं गारमेंट उद्योग की वास्तविक सप्लाई चेन संरचना से कई मामलों में मेल नहीं खाती। इस क्षेत्र में कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद और अंतिम बिक्री तक कई चरण होते हैं।
टेक्सटाइल एवं गारमेंट उद्योग की सप्लाई चेन में धागे से लेकर वीविंग, निटिंग, प्रोसेसिंग, प्रिंटिंग, वैल्यू एडिशन, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, थोक व्यापार, रिटेल और निर्यात तक कई स्तर शामिल हैं। प्रत्येक चरण में उत्पादन, प्रोसेसिंग, गुणवत्ता जांच, पैकिंग, परिवहन और बिक्री जैसी प्रक्रियाओं में समय लगता है।
CAIT का तर्क है कि इस बहुस्तरीय व्यापारिक ढांचे में सभी लेन-देन को 45 दिन की कठोर समय सीमा में समेटना कई MSME इकाइयों के लिए व्यावहारिक कठिनाई पैदा कर सकता है। इससे कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल जरूरत और वास्तविक भुगतान चक्र के बीच असंतुलन की स्थिति बन सकती है।
75 दिन की सीमा का प्रस्ताव क्यों?
CAIT ने सरकार से आग्रह किया है कि लिखित समझौते के आधार पर अधिकतम भुगतान अवधि को 45 दिन से बढ़ाकर 75 दिन किया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया है कि 75 दिन का प्रस्ताव भुगतान में देरी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि इसे केवल वैधानिक अधिकतम सीमा के रूप में रखा जाए।
CAIT के मुताबिक, यदि खरीदार और सप्लायर के बीच 15, 30 या 45 दिन की भुगतान शर्त पहले से तय है, तो भुगतान उसी अवधि के अनुसार किया जाएगा। 75 दिन की व्यवस्था केवल उन व्यापारिक परिस्थितियों में लागू होगी, जहां टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र की प्रकृति और लंबी सप्लाई चेन के कारण अपेक्षाकृत अधिक समय की आवश्यकता होती है।
संगठन का मानना है कि इससे छोटे कारोबारियों के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ वास्तविक व्यापारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकेगा।
Income Tax Act की धारा 43B(h) में भी बदलाव की मांग
CAIT ने केंद्र सरकार के समक्ष केवल MSMED Act में संशोधन की मांग नहीं रखी है, बल्कि Income Tax Act की धारा 43B(h) में भी इसके अनुरूप बदलाव किए जाने का आग्रह किया है।
संगठन का कहना है कि यदि MSMED Act के तहत अधिकतम भुगतान अवधि 75 दिन निर्धारित की जाती है, तो आयकर कानून में भी उसी के अनुरूप आवश्यक संशोधन होना चाहिए। इससे दोनों कानूनों के बीच नीतिगत सामंजस्य स्थापित होगा और व्यापारियों एवं करदाताओं को अनुपालन के संबंध में स्पष्टता मिलेगी।
CAIT के अनुसार, अलग-अलग कानूनों में भुगतान अवधि को लेकर अलग-अलग प्रावधान होने से व्यापारियों के सामने व्यावहारिक और अनुपालन संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए MSME और आयकर से संबंधित प्रावधानों में एकरूपता जरूरी है।
CAIT ने सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें
CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि MSMED Act के तहत लिखित समझौते के आधार पर अधिकतम भुगतान सीमा 45 दिन से बढ़ाकर 75 दिन की जाए।
दूसरी मांग Income Tax Act की धारा 43B(h) में इसके अनुरूप आवश्यक संशोधन किए जाने की है, ताकि दोनों कानूनों में नीति संबंधी सामंजस्य बना रहे।
तीसरी मांग के तहत CAIT ने कहा है कि 75 दिन की अवधि को केवल अधिकतम कॉन्ट्रैक्चुअल लिमिट के रूप में परिभाषित किया जाए। इससे खरीदार और विक्रेता अपनी व्यापारिक आवश्यकताओं के अनुसार इससे कम अवधि की भुगतान शर्त तय कर सकेंगे।
चौथी मांग MSME और टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए स्पष्ट, पारदर्शी एवं एकीकृत दिशानिर्देश जारी करने की है, ताकि व्यापारियों और उद्यमियों को कानून के अनुपालन में किसी तरह की भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।
सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
CAIT ने विश्वास व्यक्त किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार MSME क्षेत्र की वास्तविक व्यापारिक परिस्थितियों और छोटे कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी।
CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय MSME मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और संबंधित नीति-निर्माता संगठन द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार करेंगे।
CAIT का कहना है कि टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र देश की व्यापारिक और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में MSME इकाइयां, निर्माता, व्यापारी, प्रोसेसर, थोक विक्रेता और छोटे कारोबारी जुड़े हुए हैं। ऐसे में कानून में उद्योग की जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर प्रावधान किए जाने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
संगठन के अनुसार, भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता, विवादों का त्वरित समाधान और व्यावहारिक भुगतान अवधि के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि सरकार CAIT के सुझावों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र की MSME इकाइयों को अपने कार्यशील पूंजी प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिल सकता है और कारोबार की निरंतरता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस