फर्जी दस्तावेजों से भूमि विक्रय का आरोप, कानूनी नोटिस भेजने के बाद दंपती ने लगाया धमकाने का आरोप; महिला बोली- मामला वापस नहीं लिया तो झूठे केस में फंसाने और जान से मरवाने की दी जा रही धमकी

भोपाल के बैरागढ़ में भूमि विक्रय विवाद को लेकर एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि कानूनी नोटिस भेजने के बाद उनके पति पर मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। शिकायत में झूठे केस में फंसाने, जान से मरवाने की धमकी और ईओडब्ल्यू मामले में कथित रूप से झूठी गवाही का दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। महिला ने निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

फर्जी दस्तावेजों से भूमि विक्रय का आरोप, कानूनी नोटिस भेजने के बाद दंपती ने लगाया धमकाने का आरोप; महिला बोली- मामला वापस नहीं लिया तो झूठे केस में फंसाने और जान से मरवाने की दी जा रही धमकी

फर्जी दस्तावेजों से भूमि विक्रय का आरोप, नोटिस भेजने के बाद दंपती ने धमकियों की जताई आशंका-बैरागढ़ थाने में महिला ने दी शिकायत, बोलीं- मामला वापस नहीं लिया तो झूठे केस में फंसाने और जान से मरवाने की दी जा रही धमकी

भोपाल। राजधानी भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में भूमि विक्रय से जुड़े एक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। बैरागढ़ निवासी एक दंपती ने आरोप लगाया है कि कथित अनियमितताओं को लेकर कानूनी नोटिस भेजने के बाद उन पर लगातार मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, विरोध करने पर झूठे आपराधिक प्रकरण में फंसाने और जान से मरवा देने तक की धमकियां दिए जाने का आरोप लगाया गया है। मामले में महिला ने थाना बैरागढ़ पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है और परिवार की सुरक्षा के साथ निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता नैना केसवानी ने अपने आवेदन में बताया कि उनके पति हीरो केसवानी ने अधिवक्ता के माध्यम से हीरो ज्ञानचंदानी, होतचंद धनवानी (सिद्ध भाऊ) तथा महेश दयारामानी को विधिक नोटिस भेजा था। नोटिस में भूमि विक्रय प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, कथित रूप से फर्जी अनुमति के आधार पर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई तथा भूमि के डायवर्जन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर कानूनी नोटिस जारी कर संबंधित पक्ष से जवाब मांगा गया था।

नैना केसवानी का आरोप है कि नोटिस भेजे जाने के बाद से उनके पति पर लगातार समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उनसे कहा गया कि यदि मामला वापस नहीं लिया गया तो उन्हें झूठे अड़ीबाज़ी के मामले में फंसा दिया जाएगा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि परिवार को जान से मरवाने की धमकी दी गई, जिससे वे और उनका परिवार भय के माहौल में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं।

महिला ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में दर्ज प्रकरण क्रमांक 77/2026 के संबंध में उन पर कथित रूप से झूठी गवाही देने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि उनसे ऐसे बयान देने के लिए कहा जा रहा है जो वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस दबाव का विरोध किया, जिसके बाद उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

आवेदन में वर्ष 2024 के एक पुराने विवाद का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जीव सेवा संस्थान से जुड़े कुछ मामलों को उठाने वाले लोगों पर भी पूर्व में दबाव बनाने के उद्देश्य से आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के प्रयास किए गए थे। इसी कारण उन्हें आशंका है कि उनके पति के खिलाफ भी दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठा मामला दर्ज कराया जा सकता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए उन्हें अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है।

नैना केसवानी ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि उनकी शिकायत को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि यदि भविष्य में उनके पति या परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ कोई झूठा प्रकरण दर्ज कराया जाता है तो वर्तमान शिकायत को पूर्व में मिली धमकियों के साक्ष्य के रूप में देखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

महिला द्वारा दी गई शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस आयुक्त कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भी भेजी गई है, ताकि मामले की उच्च स्तर पर निगरानी हो सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने की मांग की है।

दूसरी ओर, जिन व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से इस मामले में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है। जांच के दौरान दोनों पक्षों के दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की आपराधिक गतिविधि या धमकी दिए जाने के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि विवादों में दस्तावेजों की वैधता, अनुमति संबंधी अभिलेख और राजस्व रिकॉर्ड की जांच अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी पक्ष को भूमि के विक्रय, रजिस्ट्री या डायवर्जन प्रक्रिया में अनियमितता का संदेह हो तो उसे न्यायालय या संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष साक्ष्यों के आधार पर अपनी बात रखने का अधिकार है। वहीं, यदि किसी व्यक्ति को शिकायत या कानूनी कार्रवाई के कारण धमकी दी जाती है तो वह भी एक गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितना तथ्यात्मक आधार है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।