राहुल गांधी ने चढ़ाया चंदा, पप्पू यादव बने पुजारी; संसद परिसर में 'चंदा चोरी' पर विपक्ष का नाटकीय प्रदर्शन

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर भगवान श्रीराम की तस्वीर के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कृत्य से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस से हिंदू समाज से तत्काल सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की।

राहुल गांधी ने चढ़ाया चंदा, पप्पू यादव बने पुजारी; संसद परिसर में 'चंदा चोरी' पर विपक्ष का नाटकीय प्रदर्शन

संसद परिसर में 'चंदा चोरी' पर विपक्ष का नाटकीय प्रदर्शन: भगवा वेश में पुजारी बने पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दिया प्रतीकात्मक चंदा

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को लोकसभा परिसर में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। इस बार केवल नारेबाजी या पोस्टर प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय विपक्षी सांसदों ने एक सांकेतिक लघु नाटक (स्किट) का मंचन किया। इस प्रदर्शन का विषय था 'चंदा चोरी', जिसे लेकर विपक्ष पिछले कई दिनों से लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। प्रदर्शन का वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

इस नाटकीय प्रदर्शन में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी की भूमिका निभाई। उनके सामने प्रतीकात्मक रूप से एक दानपात्र रखा गया, जिसमें चढ़ावा जमा करने का अभिनय किया गया। इस दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा सहित कई विपक्षी सांसद मौजूद रहे। प्रदर्शन का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी वहां पहुंचे और उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से दानपात्र में चंदा डाला।

नाटक की पटकथा के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा चंदा देने के बाद पप्पू यादव दानपात्र लेकर वहां से भागने लगे। तभी वहां मौजूद अन्य विपक्षी सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया और जोर-जोर से "चंदा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए। पूरे घटनाक्रम को विपक्ष ने राजनीतिक व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों की अभिनय शैली और नारों ने उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। संसद परिसर में मौजूद कई सांसद, अधिकारी और मीडिया प्रतिनिधि भी इस प्रदर्शन को देखने के लिए वहां पहुंच गए।

विपक्ष का कहना है कि यह प्रदर्शन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि उन मुद्दों को उजागर करने के लिए किया गया है जिन्हें वह लगातार संसद और जनता के बीच उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि धार्मिक आस्था और चढ़ावे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और सरकार को उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए इस बार विरोध प्रदर्शन को नाटक का रूप दिया गया।

दरअसल, मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, चुनावी मुद्दों और अन्य राजनीतिक विषयों के साथ-साथ अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और दान संबंधी विवाद को भी विपक्ष प्रमुखता से उठा रहा है। इसी क्रम में पिछले कुछ दिनों से संसद परिसर में प्रतीकात्मक दानपात्र लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के सांसद पिछले कई दिनों से संसद परिसर में दानपात्र लेकर पहुंच रहे हैं। वे प्रतीकात्मक रूप से अन्य सांसदों से चंदा मांगते हुए सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इससे पहले समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी दानपात्र लेकर संसद परिसर पहुंची थीं। उन्होंने भी सांकेतिक रूप से सांसदों से चंदा एकत्र करने का प्रदर्शन किया था। शुक्रवार का नाटक उसी अभियान की अगली कड़ी माना जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत में एक विवादित टिप्पणी भी की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, "हमारे खून में चोरी है।" उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह टिप्पणी नाटक और राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा थी तथा इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

संसद का मानसून सत्र इस बार लगातार हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कई बार सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई है। ऐसे माहौल में विपक्ष ने पारंपरिक विरोध के बजाय नाटकीय प्रस्तुति का सहारा लेकर अपना संदेश देने की कोशिश की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में इस तरह के सांकेतिक प्रदर्शन अब भारतीय राजनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं। विभिन्न दल अपने मुद्दों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतीकात्मक कार्यक्रमों और दृश्यात्मक प्रस्तुतियों का उपयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे प्रदर्शन कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ जाता है।

उधर, इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से साझा किया जा रहा है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने नजरिए से इस प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे विपक्ष की रचनात्मक अभिव्यक्ति बताया, जबकि कुछ ने संसद परिसर में इस प्रकार के नाटक को अनुचित करार दिया।

फिलहाल संसद का मानसून सत्र जारी है और आने वाले दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर टकराव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष आगे भी इसी तरह के सांकेतिक प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता है या नहीं। वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों और प्रदर्शनों पर राजनीतिक जवाबी हमला जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।