स्वाधीनता दिवस पर भी बंद मिला सरकारी स्कूल, नहीं हुआ झंडारोहण! किशुनपुरा प्राथमिक पाठशाला पर उठे गंभीर सवाल
स्वाधीनता दिवस पर रामपुरा ब्लॉक के किशुनपुरा प्राथमिक पाठशाला के सुबह करीब 9 बजे तक बंद मिलने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में झंडारोहण भी नहीं हुआ। दो तैनात शिक्षकों पर नियमित विद्यालय नहीं आने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, आरोपों की अभी विभागीय पुष्टि नहीं हुई है।
स्वाधीनता दिवस पर भी बंद मिला सरकारी स्कूल, नहीं हुआ झंडारोहण!
15 अगस्त पर स्कूल में लटका रहा ताला, शिक्षकों की मौजूदगी पर सवाल
राष्ट्रीय पर्व पर नहीं खुला किशुनपुरा प्राथमिक स्कूल, ग्रामीणों में नाराजगी
उरई। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया गया और सरकारी व निजी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को राष्ट्रभक्ति एवं देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया गया, वहीं जालौन जिले के रामपुरा विकासखंड क्षेत्र से सरकारी स्कूल की व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। किशुनपुरा प्राथमिक पाठशाला में 15 अगस्त की सुबह विद्यालय का ताला तक नहीं खुलने और झंडारोहण नहीं होने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के दिन सुबह करीब 9 बजे तक विद्यालय बंद था। विद्यालय परिसर में न तो शिक्षक दिखाई दिए और न ही झंडारोहण की कोई तैयारी नजर आई। राष्ट्रीय पर्व के दिन स्कूल बंद मिलने की सूचना जैसे ही ग्रामीणों को हुई, लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में दो शिक्षक तैनात हैं, लेकिन दोनों के नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
राष्ट्रीय पर्व पर भी नहीं खुला स्कूल
15 अगस्त देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है। इस दिन सरकारी विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यालयों में ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की चर्चा और बच्चों को आजादी के महत्व की जानकारी दी जाती है।
ऐसे में यदि किसी सरकारी प्राथमिक विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस के दिन सुबह तक ताला लगा मिले और वहां ध्वजारोहण न हो, तो यह निश्चित रूप से व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला विषय है। किशुनपुरा प्राथमिक पाठशाला को लेकर सामने आई जानकारी ने इसी कारण ग्रामीणों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है।
हालांकि, विद्यालय बंद मिलने और शिक्षकों के लंबे समय से विद्यालय नहीं पहुंचने के आरोप फिलहाल ग्रामीणों के बताए अनुसार हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में दो शिक्षक तैनात हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें हैं। आरोप है कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंचते, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पूरी तरह से विद्यालय और वहां तैनात शिक्षकों पर निर्भर रहती है। यदि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंचेंगे तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि केवल स्वतंत्रता दिवस के दिन विद्यालय बंद रहने की जांच ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन की भी जांच होनी चाहिए।
‘सर्व शिक्षा’ के दावों पर सवाल
सरकारी स्तर पर बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। विद्यालयों में संसाधन उपलब्ध कराने, शिक्षकों की नियुक्ति और बच्चों को नियमित शिक्षा देने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
लेकिन यदि राष्ट्रीय पर्व के दिन ही किसी सरकारी विद्यालय में ताला लगा मिले और ध्वजारोहण जैसा अनिवार्य कार्यक्रम भी न हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जमीन पर क्या है?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश के भविष्य हैं। उन्हें स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर देशभक्ति, संविधान, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय मूल्यों की जानकारी दी जानी चाहिए। ऐसे में विद्यालय का बंद रहना बच्चों के साथ-साथ राष्ट्रीय पर्व की गरिमा से भी जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय में शिक्षक नियमित नहीं पहुंच रहे हैं या राष्ट्रीय पर्व पर विद्यालय नहीं खोला गया, तो इसकी जानकारी विभागीय स्तर पर क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय के निरीक्षण का रिकॉर्ड, शिक्षकों की उपस्थिति पंजिका और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि विद्यालय में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं या नहीं।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले में विभागीय जांच का इंतजार है। विद्यालय वास्तव में कितने समय तक बंद रहा, स्वतंत्रता दिवस पर वहां कोई कार्यक्रम आयोजित हुआ या नहीं, तैनात शिक्षकों की उपस्थिति क्या रही और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं—इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग मामले को संज्ञान में लेकर विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच करता है या नहीं। यदि जांच होती है तो शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यालय संचालन और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों की मांग है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालय केवल भवन और ताले तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि वहां बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना जरूरी है।
फिलहाल किशुनपुरा प्राथमिक पाठशाला को लेकर सामने आए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विद्यालय बंद होने, झंडारोहण न होने तथा शिक्षकों के लंबे समय से विद्यालय नहीं पहुंचने संबंधी बातें ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित हैं। विभागीय जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस