मध्यप्रदेश में खाद की बिक्री पर रोक, 82 लाख किसानों की बढ़ी चिंता; स्टॉक मिलान के नाम पर बड़ा फैसला, कालाबाजारी का खतरा
मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन के आखिरी वक्त पर खाद की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। 14 अगस्त शाम 7 बजे से लागू हुआ यह आदेश अगली सूचना तक रहेगा, जिससे प्रदेश के लगभग 82 लाख किसानों के प्रभावित होने की आशंका है। खाद की दिक्कत का सबसे बड़ा असर धान उत्पादक किसानों पर पड़ सकता है।
मध्यप्रदेश सरकार ने खाद बिक्री पर लगाई रोक: 82 लाख किसानों में खौफ, कालाबाजारी का बढ़ा खतरा
भोपाल। मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन के अंतिम दौर में खाद की बिक्री पर रोक लगाए जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विकास विभाग ने 14 अगस्त की शाम 7 बजे से प्रदेशभर में अनुदानित खाद की बिक्री आगामी आदेश तक रोकने के निर्देश दिए हैं। सरकार के इस फैसले का असर प्रदेश के करीब 82 लाख किसानों पर पड़ने की आशंका है। खासतौर पर धान और अन्य खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार की ओर से खाद की बिक्री पर रोक लगाने की मुख्य वजह भारत सरकार के iFMS पोर्टल पर दर्ज खाद के आंकड़ों और वितरण केंद्रों पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के भौतिक सत्यापन यानी मिलान को बताया गया है। विभाग का कहना है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर की स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। स्टॉक का मिलान पूरा होने के बाद खाद की बिक्री को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा।
14 अगस्त शाम 7 बजे से लागू हुआ आदेश
कृषि विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार 14 अगस्त की शाम 7 बजे से खाद की बिक्री पर रोक प्रभावी हो गई। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। फिलहाल सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी और खाद की बिक्री दोबारा किस तारीख से शुरू की जाएगी।
इस फैसले के बाद प्रदेश के खाद वितरण केंद्रों पर बिक्री पूरी तरह रोक दी गई है। आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन को सौंपी गई है।
किन केंद्रों पर लागू है रोक?
खाद बिक्री बंद करने का आदेश प्रदेश के सभी प्रमुख वितरण केंद्रों पर लागू किया गया है। इनमें विपणन संघ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां, एमपी एग्रो के केंद्र और निजी खाद विक्रेताओं के बिक्री केंद्र शामिल हैं।
यानी किसान सहकारी समितियों के साथ-साथ निजी दुकानों से भी अनुदानित खाद नहीं खरीद सकेंगे। विभाग ने सभी संबंधित केंद्रों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
iFMS रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का होगा मिलान
सरकार के अनुसार खाद की उपलब्धता और वितरण से संबंधित आंकड़े iFMS पोर्टल पर दर्ज हैं। दूसरी ओर, अलग-अलग वितरण केंद्रों और विक्रेताओं के पास वास्तविक रूप से कितना खाद उपलब्ध है, इसका भौतिक सत्यापन किया जाना है।
इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में खाद की बिक्री रोककर स्टॉक का मिलान किया जा रहा है। सरकार यह पता लगाना चाहती है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और जमीन पर उपलब्ध खाद के स्टॉक में कितना अंतर है।
स्टॉक मिलान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सरकार आगे की व्यवस्था पर फैसला करेगी।
खरीफ सीजन के बीच किसानों की बढ़ी परेशानी
खाद की बिक्री ऐसे समय रोकी गई है, जब खरीफ फसलों की खेती का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है। धान, सोयाबीन सहित कई फसलों में किसानों को अलग-अलग समय पर उर्वरकों की जरूरत पड़ती है।
ऐसे में बिक्री पर रोक लंबी चली तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जिन किसानों ने पहले से खाद का इंतजाम नहीं किया है, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होने की आशंका है।
विशेष रूप से धान उत्पादक किसानों के लिए खाद की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। फसल की जरूरत के समय उर्वरक नहीं मिलने से उत्पादन और फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ने की चिंता किसानों में है।
किसान संगठनों में नाराजगी
खाद बिक्री पर रोक का फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब मध्य प्रदेश में किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। मूंग की सरकारी खरीद और किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर हाल के दिनों में सरकार पर दबाव रहा है।
अब खाद की बिक्री रोक दिए जाने से किसान संगठनों में भी नाराजगी बढ़ने की संभावना है। किसानों का कहना है कि यदि स्टॉक मिलान के लिए कुछ समय के लिए प्रक्रिया जरूरी है तो सरकार को ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद किसानों को खाद मिलती रहे।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि बिक्री पर रोक कितने दिन चलेगी और खाद की आपूर्ति कब सामान्य होगी।
कालाबाजारी का भी बढ़ सकता है खतरा
खाद की बिक्री पर अचानक रोक लगने के बाद बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। यदि किसानों को सरकारी या अधिकृत केंद्रों से खाद नहीं मिलती है तो कुछ लोग इसका फायदा उठाकर अवैध रूप से खाद बेचने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में खाद की कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूले जाने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि अभी कालाबाजारी बढ़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन किसानों की जरूरत और सीमित उपलब्धता को देखते हुए प्रशासन के सामने निगरानी की चुनौती जरूर रहेगी।
किसानों को भी सलाह दी जाती है कि वे अधिकृत केंद्रों से ही खाद खरीदें और किसी भी तरह की अवैध बिक्री या अधिक कीमत वसूली की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
कलेक्टरों और अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
कृषि विकास विभाग ने आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी कलेक्टरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी है। जिलों में खाद के उपलब्ध स्टॉक और रिकॉर्ड का मिलान कराया जाएगा।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिक्री पर रोक के दौरान किसी भी अधिकृत केंद्र से नियमों के विपरीत खाद की बिक्री न हो। साथ ही वास्तविक स्टॉक और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर सामने आने पर उसकी भी जांच की जाएगी।
बिक्री दोबारा कब शुरू होगी?
फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाद की बिक्री दोबारा कब शुरू होगी। विभाग के आदेश में कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है। इसमें कहा गया है कि स्टॉक मिलान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खाद की बिक्री के संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा।
इसका मतलब है कि फिलहाल किसानों को सरकार के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
खाद की बिक्री रोककर स्टॉक का मिलान करना सरकार के लिए प्रशासनिक स्तर पर जरूरी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन खरीफ सीजन के बीच इसे लागू करने से किसानों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। सरकार के सामने एक ओर रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी है।
यदि मिलान प्रक्रिया जल्द पूरी होती है और खाद की बिक्री जल्द बहाल कर दी जाती है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन रोक लंबी खिंचने की स्थिति में खाद की उपलब्धता, फसल उत्पादन और बाजार में संभावित कालाबाजारी को लेकर सरकार को अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
फिलहाल प्रदेश के लाखों किसान सरकार के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। खाद की बिक्री कब शुरू होगी और स्टॉक मिलान में क्या स्थिति सामने आती है, इस पर किसानों की नजर बनी हुई है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस