नरेंद्र सिंह तोमर के 'गुलाटी मारने' वाले बयान पर बवाल, कुशवाह समाज और कांग्रेस ने सार्वजनिक माफी की मांग की
मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की कुशवाह समाज पर की गई टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने बयान को संदर्भ से जोड़कर सफाई दी, जबकि कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने इसे समाज का अपमान बताते हुए माफी की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बयान पर सियासी घमासान
भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के एक बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। तोमर के "गुलाटी मारने" संबंधी बयान को लेकर कुशवाह समाज के कुछ संगठनों और कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने इसे समाज विशेष का अपमान बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से सार्वजनिक माफी की मांग की है, जबकि भाजपा ने पूरे विवाद को विपक्ष द्वारा बयान को गलत संदर्भ में पेश करने की कोशिश बताया है।
दरअसल, दतिया जिले के सोनागिर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने संबोधन में पूर्व नेता कालीचरण कुशवाह का उदाहरण देते हुए एक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस और कुशवाह समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोनागिर में विधायक सतीश सिकरवार के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ और संवैधानिक पद पर बैठे नेता को किसी भी समाज के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का पद अत्यंत गरिमामय होता है और इस पद पर बैठे व्यक्ति के शब्द पूरे समाज पर प्रभाव डालते हैं। ऐसे में किसी जाति या समाज को लेकर की गई टिप्पणी उचित नहीं कही जा सकती। उन्होंने नरेंद्र सिंह तोमर से कुशवाह समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
"भाजपा लगातार ओबीसी और दलित समाज का अपमान करती है"
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति समाज को बांटने वाली रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार ओबीसी, दलित और वंचित वर्गों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयान देती रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, समान सम्मान और सभी वर्गों की भागीदारी की राजनीति में विश्वास रखती है। लोकतंत्र में किसी भी समाज का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता और राजनीतिक दलों को भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
भिंड के मामलों का भी उठाया मुद्दा
प्रेसवार्ता के दौरान पटवारी ने भिंड जिले में बघेल समाज के लोगों पर दर्ज मामलों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने इन मामलों को फर्जी बताते हुए सरकार पर राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप लगाया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्दोष लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए तो कांग्रेस ग्वालियर-चंबल संभाग में बड़ा आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी तथा किसी भी निर्दोष नागरिक को परेशान नहीं होने देगी।
कुशवाह समाज में भी नाराजगी
नरेंद्र सिंह तोमर के बयान के बाद कुशवाह समाज के कुछ संगठनों ने भी नाराजगी जताई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सार्वजनिक मंच से किसी समाज का उल्लेख करते समय नेताओं को संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि समाज के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और कई लोगों ने पूरे बयान को उसके संदर्भ में देखने की बात कही है।
भाजपा ने किया बचाव
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष के बयान का बचाव किया। भाजपा जिलाध्यक्ष कमलेश कुशवाह ने कहा कि नरेंद्र सिंह तोमर के बयान को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष ने अपने भाषण में केवल भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से पूर्व नेता कालीचरण कुशवाह का उदाहरण दिया था। उनका किसी समाज का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था।
कमलेश कुशवाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेने के लिए बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है और अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी समाजों का सम्मान करती है और किसी भी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रश्न ही नहीं उठता।
सियासत तेज, बयान पर जारी बहस
नरेंद्र सिंह तोमर के बयान को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार विधानसभा अध्यक्ष से माफी की मांग कर रही है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच राजनीतिक दल अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं और बयान को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस