जनचौपाल में बवाल: ग्रामीण ने विधायक की गाड़ी के बोनट पर बच्चे को लिटाकर किया विरोध, क्षेत्र के आधार पर शिकायत न सुनने का आरोप
शिवपुरी जिले की नरवर तहसील में करैरा विधायक रमेश खटीक की जनचौपाल के दौरान हंगामा हो गया। पोहरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायतें सुनने से विधायक के इनकार करने पर एक व्यक्ति ने विरोध जताते हुए अपने मासूम बच्चे को विधायक की कार के बोनट पर रख दिया
शिवपुरी के नरवर में जनचौपाल के दौरान भाजपा विधायक रमेश खटीक ने दूसरे विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायत सुनने से इन्कार किया, जिसके बाद हंगामा और विरोध हुआ।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की नरवर तहसील में आयोजित जनचौपाल के दौरान उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत केवल इसलिए नहीं सुनी गई क्योंकि वे दूसरे विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं। विरोध के दौरान एक ग्रामीण ने अपने छोटे बच्चे को विधायक की सरकारी गाड़ी के बोनट पर लिटा दिया और वहीं बैठकर नारेबाजी करने लगा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, करैरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रमेश खटीक नरवर तहसील में जनचौपाल लगाकर आम लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। जनचौपाल में बड़ी संख्या में लोग अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान पोहरी विधानसभा क्षेत्र के कुछ ग्रामीण भी सड़क, पेयजल, राशन वितरण और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लेकर वहां पहुंचे।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी समस्याएं बताने की कोशिश की तो उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि वे करैरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। उनका कहना है कि उनकी शिकायत इस जनचौपाल में नहीं सुनी जाएगी क्योंकि वे दूसरे विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। इस कथित जवाब के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने मौके पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विरोध के दौरान स्थिति उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई, जब एक व्यक्ति अपने छोटे बच्चे को विधायक की सरकारी गाड़ी के बोनट पर लिटाकर वहीं बैठ गया। उसने नारेबाजी करते हुए कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि सभी लोगों से वोट मांगते हैं, लेकिन जब जनता अपनी समस्याएं लेकर पहुंचती है तो विधानसभा क्षेत्र का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की भीड़ एकत्र हो गई और कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि कोई नागरिक किसी समस्या को लेकर जनप्रतिनिधि के पास पहुंचता है तो क्या उसकी शिकायत केवल क्षेत्रीय सीमा के आधार पर अस्वीकार की जा सकती है।
घटना की सूचना मिलते ही नरवर थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों की समझाइश के बाद करीब आधे घंटे में स्थिति सामान्य हो गई। इसके बाद बच्चे को सुरक्षित गाड़ी के बोनट से उतार लिया गया और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई। कई लोगों का कहना है कि जनचौपाल का उद्देश्य जनता की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान की दिशा में पहल करना होता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति दूसरे विधानसभा क्षेत्र का भी हो, तब भी उसकी समस्या को कम से कम संबंधित विभाग या जनप्रतिनिधि तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि केवल अपने विधानसभा क्षेत्र के नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हितों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था और विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के कारण शिकायतों के निस्तारण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। यदि कोई मामला दूसरे क्षेत्र से जुड़ा हो तो उसे संबंधित जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक इकाई के पास भेजा जाना चाहिए। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता के साथ संवाद और उचित मार्गदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने ग्रामीण के विरोध के तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि मासूम बच्चे को इस प्रकार विरोध का माध्यम बनाना उचित नहीं है। वहीं कई लोगों ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनका समाधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
फिलहाल इस पूरे मामले में विधायक रमेश खटीक की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि घटना के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया और ग्रामीणों की शिकायतों को संबंधित स्तर पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह घटना अब केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही, जनचौपाल की कार्यप्रणाली और नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं और इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस