प्रमोशन में TET की अनिवार्यता पर बवाल: 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, शिक्षक संगठनों ने आदेश वापस लेने की उठाई मांग
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. अब प्रमोशन के लिए सिर्फ वही शिक्षक पात्र होंगे जिन्होंने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास किया है.
प्रमोशन में TET अनिवार्य, शिक्षकों में बढ़ी चिंता
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बदले नियम
करीब 1.5 लाख शिक्षक पदोन्नति से हो सकते हैं बाहर
DEO से मांगी गई TET पास शिक्षकों की जानकारी
1998 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों पर सबसे ज्यादा असर
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति (प्रमोशन) को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के नए निर्णय ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए 1998 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना पदोन्नति की पात्रता से जोड़ दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रमोशन की दौड़ से बाहर होने की आशंका में हैं। वहीं शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए सरकार से आदेश वापस लेने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विभाग का फैसला
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। विभाग ने 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य मानते हुए प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को निर्देश दिए गए कि वे 17 जुलाई को दोपहर 12 बजे तक अपने जिले के TET उत्तीर्ण शिक्षकों की पूरी जानकारी विभाग को उपलब्ध कराएं।
विभाग का उद्देश्य पहले उन शिक्षकों का डेटा तैयार करना है जिन्होंने TET पास किया है। इसके बाद पदोन्नति की पात्रता सूची तैयार की जाएगी। हालांकि अभी तक विभाग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि TET की जानकारी केवल रिकॉर्ड के लिए मांगी गई है या इसे प्रमोशन की अनिवार्य शर्त के रूप में लागू किया जाएगा।
डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर की आशंका
जानकारी के अनुसार वर्ष 1998 से 2009 के बीच प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। उस समय नियुक्त अधिकांश शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं था, क्योंकि उस अवधि में यह व्यवस्था लागू नहीं थी। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षक TET पास नहीं हैं।
यदि विभाग TET को पदोन्नति की अनिवार्य शर्त के रूप में लागू करता है, तो इन शिक्षकों की पदोन्नति रुक सकती है। यही कारण है कि प्रदेशभर के शिक्षकों में असंतोष और चिंता का माहौल है।
जिला शिक्षा अधिकारियों से मांगा गया डेटा
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर TET पास शिक्षकों की विस्तृत जानकारी मांगी है। विभाग ने शिक्षकों का नाम, पद, नियुक्ति वर्ष और TET उत्तीर्ण होने से संबंधित जानकारी निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराने को कहा है।
इस कदम के बाद यह माना जा रहा है कि विभाग पदोन्नति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। हालांकि अंतिम आदेश जारी होने से पहले कई प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
शिक्षक संगठनों ने जताया विरोध
शासकीय शिक्षक संगठन ने विभाग के इस कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन का कहना है कि विभाग ने अभी तक स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया है कि TET की शर्त किन-किन शिक्षक संवर्गों पर लागू होगी और इसका कानूनी आधार क्या है।
संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि अलग-अलग जिलों में अलग-अलग प्रकार की जानकारी मांगी जा रही है, जिससे शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने मांग की कि विभाग पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और तब तक TET के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित न की जाए।
संगठन ने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति ऐसे समय हुई थी जब TET की व्यवस्था लागू ही नहीं थी, उनके प्रमोशन को इस आधार पर रोकना न्यायसंगत नहीं होगा।
आदेश वापस लेने की मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पदोन्नति प्रक्रिया से TET की अनिवार्यता हटाई जाए। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अब नई शर्तों के आधार पर प्रमोशन से वंचित करना उनके साथ अन्याय होगा।
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की और आदेश में संशोधन नहीं किया, तो प्रदेशभर में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन शिक्षकों को बिना TET के अयोग्य मानती है, तो फिर इतने वर्षों तक उन्हें नियमित वेतन क्यों दिया गया? शिक्षक दिवस पर उनका सम्मान क्यों किया जाता रहा?
उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा कर सम्मानजनक समाधान निकालना चाहिए। उनके अनुसार वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
RSS से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप
उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर अनुभवी शिक्षकों की पदोन्नति रोकना चाहती है ताकि नई भर्तियों के माध्यम से आरएसएस से जुड़े लोगों को शिक्षा विभाग में अवसर दिया जा सके। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विभाग ने नहीं दी अंतिम स्थिति
फिलहाल लोक शिक्षण विभाग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि TET की जानकारी केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए मांगी गई है या इसे पदोन्नति की पात्रता का अनिवार्य आधार बनाया जाएगा। विभाग का कहना है कि पहले सभी जिलों से डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
शिक्षकों में बढ़ी चिंता
प्रदेशभर के हजारों शिक्षक इस फैसले को लेकर असमंजस में हैं। जिन शिक्षकों ने दो से ढाई दशक तक सेवा दी है, उन्हें आशंका है कि यदि TET को प्रमोशन के लिए अनिवार्य कर दिया गया तो उनका कैरियर प्रभावित होगा। दूसरी ओर, TET पास कर चुके शिक्षक इस फैसले को नियमों के अनुरूप मान रहे हैं।
आगे क्या?
अब सबकी नजर स्कूल शिक्षा विभाग के अगले आदेश पर है। यदि विभाग TET को प्रमोशन की अनिवार्य शर्त घोषित करता है तो मामला कानूनी और प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकता है। वहीं यदि सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन करती है, तो लाखों शिक्षकों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल प्रदेश में पदोन्नति को लेकर असमंजस बना हुआ है और शिक्षक संगठन सरकार से जल्द स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में विभाग का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि वर्षों से सेवा दे रहे हजारों शिक्षकों का प्रमोशन होगा या वे नई पात्रता शर्तों के कारण इससे वंचित रह जाएंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस