मूंग खरीदी पर शिवराज की चिट्ठी से बढ़ी सियासत,मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य में मूंग खरीद की गति बढ़ाने का अनुरोध किया
मध्य प्रदेश में मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर छिड़ा सियासी और प्रशासनिक घमासान अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केंद्र ने देश भर का 87% मूंग कोटा अकेले मध्य प्रदेश को दे दिया है, लेकिन राज्य ने अब तक सिर्फ 60 हजार मीट्रिक टन ही खरीदी की है.
मूंग खरीद पर केंद्र-राज्य आमने-सामने: शिवराज का CM मोहन को पत्र, बोले- 4.54 लाख मीट्रिक टन का कोटा मिला, खरीद तेज करें
भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की मांग को लेकर जारी किसान आंदोलन के बीच अब मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गर्मा गया है। राजधानी भोपाल में हजारों किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से पूरी उपज की खरीद की मांग कर रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य में मूंग खरीद की प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया है। इस पत्र ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा (PM-AASHA) योजना के तहत मध्य प्रदेश को देश में सबसे बड़ा मूंग खरीद कोटा दिया है। ऐसे में अब राज्य सरकार को उपलब्ध स्वीकृति का पूरा उपयोग करते हुए किसानों से तेजी से खरीद करनी चाहिए।
देश का 87% कोटा अकेले मध्य प्रदेश को
शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा योजना के अंतर्गत देशभर में कुल 5 लाख 23 हजार 243 मीट्रिक टन मूंग खरीद की मंजूरी दी है। इसमें से 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन, यानी लगभग 87 प्रतिशत कोटा, अकेले मध्य प्रदेश को आवंटित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के किसानों को प्राथमिकता देते हुए सर्वाधिक खरीद की स्वीकृति दी है। इसलिए अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों से तेजी से मूंग खरीदे और आवंटित कोटे का पूरा उपयोग सुनिश्चित करे।
'केंद्र लक्ष्य नहीं देता, केवल सीमा तय करता है'
राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने हाल ही में केंद्र सरकार पर मूंग खरीद का पर्याप्त लक्ष्य नहीं देने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने पत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य को खरीद का निश्चित "टारगेट" नहीं देती। केंद्र केवल नियमों के अनुसार राज्य के अनुमानित उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत तक MSP पर खरीद की अनुमति देता है।
अर्थात केंद्र खरीद की सीमा तय करता है, लेकिन उस सीमा के भीतर वास्तविक खरीद करना संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है।
25 प्रतिशत से अधिक खरीद राज्य सरकार का दायित्व
केंद्रीय कृषि मंत्री ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई राज्य 25 प्रतिशत की सीमा से अधिक मूंग खरीदना चाहता है तो उसका वित्तीय भार राज्य सरकार को स्वयं वहन करना होगा।
उन्होंने कहा कि पूर्व वर्षों में भी कई राज्य सरकारों ने अपने बजट से अतिरिक्त खरीद कर किसानों को राहत दी है। इसलिए यदि मध्य प्रदेश सरकार 25 प्रतिशत से अधिक खरीद करना चाहती है तो वह अपने संसाधनों से ऐसा कर सकती है।
इस बयान के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि अतिरिक्त खरीद का निर्णय अब पूरी तरह राज्य सरकार के हाथ में है।
स्वीकृत कोटे के मुकाबले खरीद बेहद कम
पत्र में केंद्रीय मंत्री ने 29 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश को मिले 4.54 लाख मीट्रिक टन के स्वीकृत कोटे में से अब तक केवल लगभग 60 हजार मीट्रिक टन मूंग की ही खरीद की गई है।
यानी उपलब्ध स्वीकृति का बड़ा हिस्सा अभी भी उपयोग नहीं हो पाया है। शिवराज सिंह चौहान ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए राज्य सरकार से खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और किसानों को राहत देने का आग्रह किया।
राज्य सरकार ने भी केंद्र से बढ़ाया था दायरा बढ़ाने का अनुरोध
इससे पहले मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर मूंग खरीद की सीमा बढ़ाने की मांग की थी।
उन्होंने बताया था कि इस वर्ष प्रदेश में 14.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग की बुआई हुई है और कुल उत्पादन लगभग 20.16 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है। ऐसे में वर्तमान खरीद सीमा किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है।
40 प्रतिशत खरीद की मांग
राज्य सरकार ने अपने पत्र में अनुरोध किया था कि पीएम-आशा योजना के तहत अन्य राज्यों द्वारा उपयोग नहीं किए गए कोटे को मध्य प्रदेश में स्थानांतरित किया जाए।
साथ ही, राज्य ने मांग की कि खरीद सीमा को बढ़ाकर कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत, यानी करीब 8.06 लाख मीट्रिक टन किया जाए। राज्य सरकार का तर्क है कि इससे अधिक किसानों को MSP का लाभ मिलेगा और उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
भोपाल में जारी है किसानों का आंदोलन
इधर, राजधानी भोपाल में किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांग है कि एक एकड़ पर 1.20 क्विंटल खरीद की सीमा समाप्त की जाए और उनकी पूरी मूंग फसल MSP पर खरीदी जाए।
किसान संगठनों का कहना है कि इस बार उत्पादन अच्छा हुआ है, लेकिन सीमित खरीद व्यवस्था के कारण उन्हें बाजार में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में किसान भोपाल पहुंचे और सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
हालांकि राज्य सरकार ने किसानों से बातचीत शुरू कर दी है और मूंग खरीद की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक करने का निर्णय भी लिया है, लेकिन किसान अभी भी शत-प्रतिशत खरीद की मांग पर कायम हैं।
अब जिम्मेदारी किसकी?
शिवराज सिंह चौहान के पत्र के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि केंद्र सरकार का कहना है कि उसने मध्य प्रदेश को पर्याप्त खरीद की स्वीकृति दे दी है और अब उपलब्ध कोटे का पूरा उपयोग करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
वहीं, राज्य सरकार का तर्क है कि प्रदेश में उत्पादन अपेक्षा से अधिक हुआ है, इसलिए खरीद सीमा बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में किसान आंदोलन के बीच अब केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार उपलब्ध कोटे के भीतर खरीद कितनी तेजी से बढ़ाती है और क्या केंद्र राज्य की 40 प्रतिशत खरीद वाली मांग पर कोई सकारात्मक निर्णय लेता है। फिलहाल इतना तय है कि मूंग खरीद का मुद्दा किसानों, सरकार और राजनीति—तीनों के लिए बड़ा विषय बना हुआ है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस