UCC विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश, 21 जुलाई को होगी चर्चा, दो बार स्थगित हुआ सदन, काले कपड़े में पहुंचे कांग्रेस विधायक पर भड़के रामेश्वर शर्मा

मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 पेश किया हालांकि मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित भूमि खरीद मामले पर चर्चा की कांग्रेस की मांग को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ।

UCC विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश, 21 जुलाई को होगी चर्चा, दो बार स्थगित हुआ सदन, काले कपड़े में पहुंचे कांग्रेस विधायक पर भड़के रामेश्वर शर्मा

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आगाज, पहले दिन ही सरकार ने सदन में पेश किया समान नागरिक आचार संहिता विधेयक 2026.

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 सदन में पेश कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने घोषणा की कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर 21 जुलाई को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। यूसीसी विधेयक के साथ सरकार ने कुल 14 विधेयक सदन के पटल पर रखे, जिनमें 13 अन्य विधेयक भी शामिल थे। इन अतिरिक्त विधेयकों का उल्लेख मूल कार्यसूची में नहीं होने पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सरकार पर प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

मानसून सत्र की शुरुआत से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। उज्जैन में मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा कथित जमीन खरीद-फरोख्त का मुद्दा, यूसीसी विधेयक को लेकर राजनीतिक टकराव और कार्यसूची को लेकर विवाद के कारण सदन का माहौल तनावपूर्ण बना रहा। लगातार हंगामे और नारेबाजी के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

यूसीसी विधेयक पर कल होगी विस्तृत चर्चा

विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन को बताया कि समान नागरिक संहिता विधेयक पर अगले दिन यानी 21 जुलाई को विस्तार से चर्चा होगी। सरकार का कहना है कि यह विधेयक प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को पर्याप्त समय और प्रक्रिया का पालन किए बिना सदन में प्रस्तुत किया गया।

सरकार की ओर से यूसीसी विधेयक सहित कुल 14 विधेयक पेश किए गए। इनमें कई प्रशासनिक और कानूनी संशोधनों से जुड़े विधेयक भी शामिल हैं। हालांकि विपक्ष का कहना है कि जिन 13 अतिरिक्त विधेयकों को पेश किया गया, उनका उल्लेख 20 जुलाई की मूल कार्यसूची में नहीं था।

उज्जैन जमीन खरीद मामले पर विपक्ष का हमला

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार द्वारा कथित रूप से की गई जमीन खरीद का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के परिवार ने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है और इस पूरे मामले पर सदन में स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा कराई जानी चाहिए।

उमंग सिंघार ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पर संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो सदन में इस विषय पर खुली चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने इसे जनहित और पारदर्शिता से जुड़ा मामला बताया।

हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करने लगे, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई और कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।

सरकार ने कहा—मामला नया नहीं

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि स्थगन प्रस्ताव केवल तात्कालिक और अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों पर ही स्वीकार किया जाता है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष जिस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, वह वर्ष 2023 से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे स्थगन प्रस्ताव के तहत नहीं लिया जा सकता।

सरकार ने स्पष्ट किया कि विधानसभा के नियमों के अनुसार अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है और नियमों के अनुरूप ही कार्यवाही संचालित की गई।

कार्यसूची को लेकर कांग्रेस का विरोध

यूसीसी विधेयक को लेकर केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि प्रक्रियागत विवाद भी सामने आया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस विधेयक को मूल कार्यसूची में शामिल नहीं किया था। बाद में सप्लीमेंट्री कार्यसूची जारी कर इसे सदन के सामने रखा गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत बताया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार ने "चोरों की तरह" इस विधेयक को छिपाकर सदन में पेश किया है।

विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर सभी विधायकों को पहले से पर्याप्त समय मिलना चाहिए था ताकि वे विधेयक का अध्ययन कर सकें और प्रभावी चर्चा में भाग ले सकें।

सरकार का पलटवार

विपक्ष के आरोपों पर मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि विधानसभा की सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री कार्यसूची जारी करना विधानसभा की सामान्य प्रक्रिया है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है।

सरकार का दावा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक कारणों से अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है, जबकि सरकार जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराना चाहती है।

काले कपड़ों में पहुंचे कांग्रेस विधायक

यूसीसी विधेयक के विरोध का एक अलग दृश्य भी विधानसभा परिसर में देखने को मिला। भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे। इसे उन्होंने विधेयक के विरोध का प्रतीक बताया।

इस पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने से उन लोगों को परेशानी हो रही है जो हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक जैसी प्रथाओं का समर्थन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे लोगों की भाषा बोल रही है।

रामेश्वर शर्मा ने यह भी कहा कि आतिफ अकील काले कपड़े पहनें या किसी भी रंग के, इससे सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार प्रदेश में अब किसी भी प्रकार के "काले कारनामे" नहीं चलने दिए जाएंगे।

वहीं कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के इन बयानों को भड़काऊ बताते हुए कहा कि सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

पहले ही दिन गरमाया राजनीतिक माहौल

मानसून सत्र के पहले दिन जिस तरह यूसीसी विधेयक, उज्जैन जमीन खरीद विवाद और कार्यसूची को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए, उससे यह साफ हो गया है कि पूरा सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है।

विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी में है। सदन के भीतर कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली और कार्यवाही बाधित हुई।

अब 21 जुलाई की चर्चा पर निगाहें

अब सभी की नजरें 21 जुलाई को होने वाली यूसीसी विधेयक पर चर्चा पर टिकी हैं। सरकार इस विधेयक को जल्द पारित कराने के पक्ष में दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस सहित विपक्ष इसे प्रक्रियागत और संवैधानिक आधार पर चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर होने वाली चर्चा केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक विमर्श पर भी दिखाई देगा। ऐसे में आगामी दिन का विधानसभा सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।