40 करोड़ की सड़क टेस्टिंग में ही फटी: पानी के प्रेशर से सड़क के उड़े परखच्चे, कार-बाइक सवार बाल-बाल बचे

इंदौर के गोराकुंड चौराहे के पास स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया. बताया जा रहा है कि नई पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क के नीचे से पानी फूटने के बाद यह स्थिति बनी. घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

40 करोड़ की सड़क टेस्टिंग में ही फटी: पानी के प्रेशर से सड़क के उड़े परखच्चे, कार-बाइक सवार बाल-बाल बचे

इंदौर में पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान 40 करोड़ की सड़क फट गई है। इस दौरान वहां से कई वाहन गुजर रहे थे। गनीमत रही कि किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि निगम का कहना है कि सड़क का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ था।

इंदौर के गोराकुंड इलाके में सोमवार को उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब 24 घंटे जलापूर्ति के लिए बिछाई गई नई पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान अचानक करोड़ों रुपए की सड़क धंस गई। करीब तीन साल पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगभग ₹40 करोड़ की लागत से विकसित की गई सड़क पानी के तेज दबाव को सहन नहीं कर सकी। सड़क के बीचोंबीच अचानक बड़ा गड्ढा बन गया और डामर व पेवर ब्लॉक उखड़कर बिखर गए।

घटना के वक्त सड़क पर सामान्य आवाजाही चल रही थी। कार, ऑटो और बाइक सवार वहां से गुजर रहे थे। अचानक सड़क के नीचे से पानी का तेज बहाव निकला और कुछ ही पलों में सड़क का हिस्सा फट गया। पानी के जबरदस्त प्रेशर को देखकर लोग घबरा गए और कई वाहन चालक अपनी गाड़ियां छोड़कर सुरक्षित जगह की ओर भागे। गनीमत रही कि इस घटना में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

पाइपलाइन कनेक्शन के बाद शुरू हुई थी टेस्टिंग

जानकारी के मुताबिक, गोराकुंड क्षेत्र में 24 घंटे पानी की सप्लाई के लिए नई पाइपलाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है। कनेक्शन जोड़ने के बाद इंजीनियर पाइपलाइन में पानी छोड़कर उसकी टेस्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान पाइपलाइन में बने दबाव का असर सड़क के नीचे दिखाई दिया और अचानक सड़क का हिस्सा टूट गया।

वीडियो में सड़क के बीच से पानी का तेज बहाव निकलता दिखाई दे रहा है। कुछ ही देर में सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास पानी फैल गया।

तीन साल में ही सड़क की मजबूती पर सवाल

गोराकुंड की यह सड़क स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत विकसित की गई थी। एमजी रोड और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, ड्रेनेज और अन्य सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। ऐसे में महज तीन साल के भीतर पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान सड़क के इस तरह धंसने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों ने मामले की तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। सवाल यह भी उठ रहा है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क की संरचना को किस तरह बहाल किया गया था और क्या सड़क के नीचे पर्याप्त मजबूती सुनिश्चित की गई थी।

जांच के बाद सामने आएगी असली वजह

फिलहाल सड़क धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। विशेषज्ञ सड़क के नीचे की मिट्टी, ड्रेनेज व्यवस्था, पाइपलाइन की स्थिति, पानी के दबाव और सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की जांच कर सकते हैं।

यदि जांच में निर्माण या पाइपलाइन कार्य में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ₹40 करोड़ की सड़क तीन साल में ही पानी के दबाव में कैसे टूट गई?

गोराकुंड की इस घटना ने स्मार्ट सिटी के तहत हुए करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सड़क की मरम्मत के साथ तकनीकी जांच कब पूरी होती है और जिम्मेदारी किसकी तय की जाती है।