जनपद पंचायत CEO पर तानाशाही के आरोप, अध्यक्ष राधा अहिरवार समेत जनप्रतिनिधियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू

नरसिंहपुर में जनपद पंचायत कार्यालय के बाहर धरना, CEO की कार्यशैली के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का प्रदर्शन

जनपद पंचायत CEO पर तानाशाही के आरोप, अध्यक्ष राधा अहिरवार समेत जनप्रतिनिधियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू

मूलचन्द मेधोनिया पत्रकार भोपाल 

चीचली। जिला नरसिंहपुर (म. प्र.) 

जनपद पंचायत सीईओ अभिषेक गुप्ता की तानाशाही, जनपद अध्यक्ष राधा अहिरवार के साथ भेदभाव, और अन्याय

हितग्राही मूलक योजनाओं को जानबूझकर विलंब करना महिला अनुसूचित की अध्यक्षा की कुर्सी और हाल में मनमानी मीटिंग करना जनप्रतिनिधियों से भेदभाव जैसे अनेकों शिकायत लेकर धरना प्रदर्शन ब्लॉक मुख्यालय पर जारी

जनपद पंचायत सीईओ अभिषेक गुप्ता द्वारा जनपद अध्यक्ष के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार, हितग्राही मूलक योजनाओं में अनावश्यक विलंब सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान में जानबूझकर देरी व जनपद पंचायत की नियमित बैठकों का आयोजन न किये जाने सहित जनपद अध्यक्ष श्रीमती राधा/कमलेश अहिरवार द्वारा कलेक्टर नरसिंहपुर, जिला पंचायत नरसिंहपुर, अनु विभागीय अधिकारी गाडरवारा को किये जाने के पश्चात सीईओ की तानाशाही, हठधर्मिता क्षेत्र की जनता सहित यहाँ के जनप्रतिनिधि झेल रहे है। आवेदन पत्र में बताया कि लगभग 1 वर्ष से सीईओ यहाँ पर पदस्थ है जो कि लापरवाह अधिकारी के तौर से अपना सिक्का जमाये हुए है। जिससे पूरा जनपद क्षेत्र परेशानी झेल रहा है। 

जनपद अध्यक्ष श्रीमती राधा अहिरवार जो कि अनुसूचित जाति की है उनके साथ भेदभाव रवैया रखते हुए उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। जनपद के विकास कार्यों में रोडे़ अटकाते हुए है, जिसके कारण आमजन में भारी असंतोष है। सीईओ की कार्यप्रणाली के विरोध स्वरूप मुख्यालय पर ही अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। जिसके महत्वपूर्ण कारण बिन्दुवार निम्न है। 

(1) जनपद अध्यक्ष अनुसूचित जाति वर्ग की होने के कारण महिला का सम्मान न कर भेदभाव, छुआछूत का दुर्व्यवहार किया जाता है। (2) जनपद अध्यक्ष की कुर्सी पर सीईओ स्वयं बैठते है तथा अध्यक्ष कक्ष में ही बैठक करते है। जबकि उनका कक्ष अलग है व मीटिंग कक्ष भी अलग से है। अध्यक्ष द्वारा बोला जाता है तो सीईओ द्वारा कहा जाता है कि मेडम बाहर बैठों मैं अभी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा हूँ अन्दर ही नहीं जाने देते है। (3) अध्यक्ष द्वारा जनहित अथवा विभागीय कार्यो की जानकारी मांगी जाती है तो मना कर दिया जाता है। 

(4) ग्राम पंचायतों के हितग्राही, सरपंच, सचिव द्वारा जनपद अध्यक्ष से अपनी ग्राम पंचायत सम्बंधित जानकारी चाहते है तो सीईओ द्वारा साफ तौर पर कहते है कि वह तुम्हारे पास क्यों जाकर पूछते है उनको मेरे पास आकर मिलना चाहिए। (5) जनपद अध्यक्ष की सामान्य सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जाती और सीईओ स्वयं बैठकों में उपस्थित नहीं रहतें है। जिससे विकास कार्य एवं जनहित के कार्य लंबित है। (6) ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन में अनुचित तरीके से कटौती की जाती है। जिससे पंचायतों में सभी कार्य प्रभावित हो रहें है। (7) संबंल योजना के पंजीयन एवं अनुग्रह प्रकरणों के निराकरण नहीं किये जा रहे है। (8) सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान समय पर निराकरण न कर सीईओ सभी फाइलों को अनावश्यक लंबित रखकर मनमानी कर रहे है। 

(9) सीईओ इतने तानाशाह रवैया का रुतबा कर रहे है कि अध्यक्ष द्वारा सम्पर्क करने पर वह कहते है कि मैं कार्यालय में नहीं हूँ। तथा जब अध्यक्ष ब्लॉक मुख्यालय जाकर देखती है तो वह बैठें मिलते हैं लेकिन अनुसूचित जाति अध्यक्ष जनपद को मुख्यालय में न आने की कोशिश करते है। (10), सीईओ को जब भी अध्यक्ष कक्ष में बुलाया जाता है तो वह आते नहीं है। इतना भेदभाव किया जाता है। जो एक जनता के प्रतिनिधि का घौर अपमान है। 

सीईओ इसी तरह अनुकम्पा नियुक्ति फाइल को बिना कारण लंबित रखते है। ग्राम पंचायतों से विभिन्न कार्यो को करने हेतु रुपये की मांग अथवा वसूली किये जाने की शिकायतें है। जनपद में पदस्थ अधिकारियों, व कर्मचारियों की कोई बात न सुनते हुए उल्टा गलत ठहराया जाता है। तथा एक ही सभी को धमकी दहशत दी जाती है कि मैं पहले डीएसपी रहा हूँ? मैं तहसीलदार रहा हूँ? यह रोब जमाते हुए सभी को चमकाते है, कार्यवाही कार्यलय अभिलेख एवं महत्वपूर्ण फाइलों को जनपद मुख्यालय से वह अपने घर ले जाकर उनके निराकरण की जगह लंबित रखा जाता है। ऐसे अधिकारी को पद पर रहना ही ठीक नहीं है। देखना है कि शिकायत का अपार भंडार होने के बाद सरकार और उच्च अधिकारी क्या एक्शन लेते है फिलहाल जनप्रतिनिधि डटे है धरने पर।