पानी की कमी से मुक्त हुआ बुंदेलखंड, 99.79% ग्रामीण आबादी तक पहुंचा नल से जल : जल शक्ति मंत्री

उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड अब जल संकट से उबरकर "हर घर जल" लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 99.79 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंच चुका है। सरकार के जल संरक्षण, अमृत सरोवर, चेकडैम और नदी पुनर्जीवन अभियानों से भूजल स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

पानी की कमी से मुक्त हुआ बुंदेलखंड, 99.79% ग्रामीण आबादी तक पहुंचा नल से जल : जल शक्ति मंत्री

पंचनद भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

99.79% ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल

डार्क जोन से सुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़ा बुंदेलखंड

अमृत सरोवर और चेकडैम से बढ़ा भूजल स्तर

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से हो रही 50% तक जल बचत

नदी पुनर्जीवन अभियान से बदली प्रदेश की तस्वीर

उरई। उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री ने कहा कि एक समय था जब बुंदेलखंड की पहचान सूखे, जल संकट और पेयजल की भारी किल्लत से होती थी, लेकिन आज यह क्षेत्र तेजी से जल समृद्धि की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि बुंदेलखंड के 99.79 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नल के माध्यम से सुनिश्चित की जा चुकी है और क्षेत्र जल्द ही पूर्ण रूप से "हर घर जल" लक्ष्य हासिल कर लेगा।

पंचनद क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने भारतीय संस्कृति में नदियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंगा ने हमें आध्यात्मिकता, यमुना ने भक्ति, सरस्वती ने ज्ञान, गोदावरी ने तपस्या और नर्मदा ने साधना का संदेश दिया है। पंचनद का संगम भारत की उस सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, जहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाली नदियां अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए एक बड़े उद्देश्य के लिए एक हो जाती हैं। यही भारत की सांस्कृतिक शक्ति और सनातन परंपरा का मूल स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जल संकट से जूझ रही है, लेकिन भारत हजारों वर्षों पुरानी उस परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है जिसमें जल को केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कार का आधार माना गया है। यदि जल को केवल उपभोग की वस्तु समझा जाएगा तो संकट गहराता जाएगा, जबकि उसे परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देने से उसका संरक्षण स्वतः संभव हो जाएगा।

जल शक्ति मंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड में जल जीवन मिशन के तहत अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। जिन गांवों में वर्षों तक लोग पानी के लिए कई किलोमीटर दूर तक भटकते थे, वहां अब घर-घर पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन और नाइट्रेट जैसे हानिकारक तत्वों के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता था, वहां सतही जल आधारित योजनाओं और आधुनिक जल शोधन संयंत्रों के जरिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है और जलजनित रोगों के साथ-साथ दिमागी बुखार जैसी गंभीर बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है।

उन्होंने कहा कि सरकार के जल संरक्षण अभियानों के परिणामस्वरूप बुंदेलखंड के कई ऐसे विकासखंड, जिन्हें कभी डार्क जोन घोषित किया गया था, अब सुरक्षित श्रेणी में लौट रहे हैं। मानसून के बाद भूजल स्तर में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। रिचार्ज संरचनाओं और जल संरक्षण कार्यों के कारण गर्मी के मौसम में भी कुओं और हैंडपंपों में पानी उपलब्ध रह रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने अब तक 15 हजार से अधिक अमृत सरोवर विकसित किए हैं। इनमें से 6200 से अधिक अमृत सरोवर बुंदेलखंड के सात जिलों में बनाए या पुनर्जीवित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 5800 से अधिक चेकडैम का निर्माण कराया गया है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देते हुए लगभग ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से जोड़ा गया है, जिससे 40 से 50 प्रतिशत तक जल की बचत हो रही है और किसानों की सिंचाई लागत भी कम हुई है।

उन्होंने पंचनद क्षेत्र की जैव विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। चंबल और सिंध नदियों का स्वच्छ जल दुर्लभ गंगा डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने, जल की प्रत्येक बूंद को प्रसाद समझकर बचाने तथा वृक्षारोपण और जल संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की 64 छोटी-बड़ी नदियों का सफल पुनर्जीवन किया जा चुका है। इसके साथ ही वर्षों से विलुप्त हो चुकी 110 नहरों को भी पुनर्जीवित किया गया है। "एक जनपद-एक नदी" अभियान के तहत प्रत्येक जिले में एक विलुप्त या प्रदूषित नदी को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा रहा है। इस कार्य में रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन मैपिंग तथा आईआईटी कानपुर, बीएचयू और आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का वैज्ञानिक सहयोग लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कानपुर की नून नदी, पीलीभीत की गोमती, बुलंदशहर की नीम नदी, संभल की सोत नदी, रामपुर की मौसमी नदियों, बिजनौर की मालिन तथा श्रावस्ती की बूढ़ी राप्ती सहित अनेक नदियों के पुनर्जीवन से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे न केवल जल उपलब्धता बढ़ी है बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिली है।

नमामि गंगे अभियान की चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। इसके अलावा 6627 से अधिक चेकडैम बनाए गए हैं, 1417 से अधिक तालाबों का निर्माण कराया गया है तथा 34 हजार से अधिक सरकारी भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की गई है। इन प्रयासों के कारण पिछले वर्षों में प्रदेश के 29 जिलों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की सिंचाई क्षमता 82 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 105 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। वहीं 3869 किलोमीटर लंबे 523 तटबंधों के माध्यम से लाखों हेक्टेयर भूमि को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की जा रही है। औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए भी विभिन्न परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। राष्ट्रीय नदी डॉल्फिन रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 2397 डॉल्फिन दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार बेहतर हो रहा है।

अपने संबोधन के अंत में जल शक्ति मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं से जल संरक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। जब तक राजशक्ति के साथ जनशक्ति नहीं जुड़ेगी, तब तक कोई भी संकल्प पूर्ण नहीं होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से जल संरक्षण, नदी संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए जल की प्रत्येक बूंद और प्रत्येक नदी की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी, माधौगढ़ विधायक मूलचंद निरंजन, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, जल शक्ति मंत्री के प्रतिनिधि अरविंद चौहान, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह, परमार्थ संस्था के संजय कुमार, वरुण सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जल सहेलियां एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।