दतिया उपचुनाव में थमा प्रचार का शोर, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को आएंगे नतीजे; बीजेपी-कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत

दतिया उपचुनाव में मतदान से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने प्रचार तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रोड शो और कुशवाहा सम्मेलन किया, जबकि जीतू पटवारी ने घर-घर जाकर प्रचार किया.

दतिया उपचुनाव में थमा प्रचार का शोर, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को आएंगे नतीजे; बीजेपी-कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मंगलवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार थम गया। अब 30 जुलाई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक 291 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा। जिले के 2.20 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान के लिए 320 मतदान दल और 1280 मतदानकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें कोई भी कर्मचारी दतिया विधानसभा क्षेत्र का नहीं है।

दतिया। मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल दतिया उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम निर्धारित समय पर समाप्त हो गया। अब 30 जुलाई को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि दतिया की जनता ने किसे अपना नया विधायक चुना है। इस उपचुनाव को प्रदेश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम का असर आने वाले समय की राजनीतिक रणनीतियों और समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

दतिया सीट पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव से लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और दोनों दलों के कई बड़े नेताओं ने लगातार जनसभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया।

प्रचार के अंतिम दिन दोनों दलों ने दिखाई पूरी ताकत

प्रचार के आखिरी दिन बीजेपी ने अपनी पूरी संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया पहुंचकर विशाल रोड शो किया और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। रोड शो से पहले उन्होंने क्षेत्र के प्रभावशाली माने जाने वाले कुशवाहा समाज के सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, बीजेपी सांसद एवं उपचुनाव प्रभारी भरत सिंह कुशवाह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस केवल गुटबाजी और समाज को बांटने की राजनीति करती है, जबकि बीजेपी का उद्देश्य विकास, सुशासन और जनसेवा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार विकास कार्यों को गति दे रही है और जनता का विश्वास बीजेपी के साथ है। उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि आशुतोष तिवारी को ऐतिहासिक जीत दिलाकर विकास की इस यात्रा को आगे बढ़ाएं।

नरोत्तम मिश्रा की सक्रिय भूमिका

दतिया विधानसभा सीट लंबे समय तक बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का गढ़ मानी जाती रही है। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद शुरुआत में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों की नाराजगी की चर्चाएं सामने आई थीं।

हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह सक्रिय दिखाई दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ मंच साझा किया, जनसभाओं में हिस्सा लिया और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बीजेपी पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है।

कांग्रेस ने भी किया आक्रामक प्रचार

दूसरी ओर कांग्रेस ने भी प्रचार के अंतिम दिन पूरी ताकत लगाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया के विभिन्न क्षेत्रों में छोटी-छोटी जनसभाएं कीं और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया। उन्होंने बीजेपी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता का समर्थन कांग्रेस के साथ है।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी जनता का विश्वास खो चुकी है और इसलिए धनबल तथा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि दतिया में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये लाए गए हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। पटवारी ने कहा कि दतिया के स्वाभिमानी मतदाता किसी भी प्रकार के प्रलोभन में नहीं आएंगे और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए मतदान करेंगे।

आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस का जोर

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में आदिवासी बहुल इलाकों में व्यापक जनसंपर्क किया। दोनों नेताओं ने बजनी, रामनगर डेरा, प्रकाश नगर सहित कई गांवों में सभाएं कीं और कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि आदिवासी समाज का झुकाव पार्टी की ओर है और यही समर्थन चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। वहीं बीजेपी भी इन क्षेत्रों में लगातार संपर्क अभियान चलाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करती रही।

घनश्याम सिंह बनाम आशुतोष तिवारी

इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को स्थानीय पूर्व शाही परिवार से जुड़े होने का लाभ मिलने की चर्चा है। क्षेत्र में उनकी सामाजिक और पारिवारिक पहचान को कांग्रेस अपनी ताकत मान रही है।

वहीं बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी संगठन से जुड़े सक्रिय नेता माने जाते हैं। पार्टी ने उन्हें युवा चेहरा बनाकर मैदान में उतारा है और पूरा संगठन उनके समर्थन में जुटा हुआ है। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की लगातार मौजूदगी से बीजेपी ने यह संकेत देने की कोशिश की कि यह चुनाव उसके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

क्यों हो रहा है यह उपचुनाव?

दतिया विधानसभा सीट अप्रैल 2026 में खाली हुई थी। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की गई।

यह वही सीट है जहां वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को लगभग 7,500 से अधिक मतों से पराजित कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। इसी कारण इस बार का उपचुनाव पूरे प्रदेश की निगाहों का केंद्र बना हुआ है।

दांव पर दोनों दलों की प्रतिष्ठा

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है। बीजेपी के लिए यह सीट दोबारा अपने कब्जे में लेने और 2023 की हार का बदला चुकाने का अवसर है। वहीं कांग्रेस के लिए यह अपनी पकड़ बनाए रखने और यह साबित करने का मौका है कि दतिया में उसकी लोकप्रियता कायम है।

बीजेपी विकास कार्यों, सरकार की योजनाओं और संगठन की मजबूती को चुनावी मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय असंतोष, बेरोजगारी, महंगाई और सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंची।

मतदान और मतगणना

चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अब सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की नजर 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी है। निर्वाचन आयोग ने मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराया जा सके।

मतदान के बाद सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी। इसके बाद 3 अगस्त को मतगणना होगी और उसी दिन यह तय हो जाएगा कि दतिया विधानसभा की जनता ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी या कांग्रेस के घनश्याम सिंह में से किस पर अपना भरोसा जताया है। पूरे प्रदेश की राजनीतिक नजरें अब इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव के परिणाम पर टिकी हुई हैं।