मंच से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर तंज, बोले- "महापौर जी, आजकल आप बहुत व्यस्त हैं, हमारी बैठकों में नहीं आते"
इंदौर की राजनीति में भाजपा के भीतर बदलते समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मेयर को लेकर किया गया तंज इस बात के संकेत दे रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच पहले जैसा तालमेल नहीं रहा।
कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को बैठकों में आने की नसीहत दी
बोले-'आजकल आप बहुत व्यस्त हैं, हमारी बैठकों में नहीं आते'
महापौर और पार्षदों से हर वार्ड में वॉटर हार्वेस्टिंग पर काम शुरू करने को कहा
कहा- इस बार गर्मी में इंदौर के अधिकांश बोरवेल सूख गए थे
भविष्य में जल संकट से बचने के लिए वर्षा जल संचयन पर जोर दिया
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आयोजित 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के कार्यक्रम में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर सार्वजनिक रूप से तंज कस दिया। विजयवर्गीय ने मंच से मुस्कुराते हुए कहा, "महापौर जी, आजकल आप बहुत व्यस्त रहते हैं। हमारी बैठकों में नहीं आ रहे हैं।" मंत्री की यह टिप्पणी सुनते ही मंच पर मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी कुछ पल के लिए असहज नजर आए।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को महज हल्की-फुल्की टिप्पणी नहीं, बल्कि दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी और बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में हुआ, जिससे इस टिप्पणी की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई।
जल संरक्षण की बात से शुरू हुई टिप्पणी
कार्यक्रम के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पर्यावरण संरक्षण और जल संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इंदौर में जल संकट की स्थिति देखने को मिली और शहर में अधिक से अधिक पेड़ लगाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि पेड़ों की संख्या बढ़ने से भूजल स्तर बेहतर होता है और भविष्य में पानी की समस्या कम हो सकती है।
इसी दौरान उन्होंने महापौर की ओर देखते हुए कहा, "महापौर जी, आप भी इस बात पर ध्यान दीजिए। आजकल आप बहुत व्यस्त रहते हैं। हमारी बैठकों में नहीं आ रहे हैं।" मंत्री की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मुस्कुराकर प्रतिक्रिया दी, लेकिन राजनीतिक जानकारों ने इसे गंभीर संकेत माना।
मुख्यमंत्री के पास बैठे थे महापौर
जब विजयवर्गीय ने यह टिप्पणी की, उस समय महापौर पुष्यमित्र भार्गव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ठीक बगल वाली कुर्सी पर बैठे थे। मंच पर मौजूद कई नेताओं ने इस बयान को ध्यान से सुना। कुछ क्षणों के लिए माहौल असहज भी दिखाई दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी यह दर्शाती है कि मंत्री और महापौर के बीच संवाद पहले जैसा सहज नहीं रह गया है।
बैठकों से दूरी बनी चर्चा का विषय
सूत्रों के अनुसार, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा बुलाई गई कई महत्वपूर्ण बैठकों में हाल के दिनों में महापौर पुष्यमित्र भार्गव लगातार अनुपस्थित रहे हैं। यही वजह है कि मंत्री ने मंच से इस बात का जिक्र किया।
नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग के बीच बेहतर समन्वय किसी भी शहर के विकास कार्यों के लिए आवश्यक माना जाता है। ऐसे में महापौर की अनुपस्थिति को लेकर मंत्री की नाराजगी अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है।
मुख्यमंत्री से बढ़ती नजदीकी की चर्चा
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पिछले कुछ समय से महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ नजदीकियां बढ़ी हैं। मुख्यमंत्री के कई कार्यक्रमों में महापौर की सक्रिय भूमिका दिखाई दी है।
इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इंदौर भाजपा की राजनीति में शक्ति संतुलन बदल रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन विजयवर्गीय की सार्वजनिक टिप्पणी ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है।
पोस्टरों से गायब रहे विजयवर्गीय
हाल ही में इंदौर नगर निगम द्वारा आयोजित कई कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री मोहन यादव मुख्य अतिथि रहे, लेकिन उन आयोजनों के पोस्टर और होर्डिंग्स में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर नहीं दिखाई दी।
इस मुद्दे को विजयवर्गीय समर्थक पार्षद मनीष मामा ने महापौर परिषद की बैठक में भी उठाया था। उनका कहना था कि जिस विभाग के मंत्री स्वयं कैलाश विजयवर्गीय हैं, उनके फोटो का पोस्टरों में नहीं होना उचित नहीं है।
इस घटना ने भी दोनों पक्षों के बीच मतभेदों की चर्चाओं को हवा दी।
उपेक्षा का मुद्दा भी उठा चुके हैं विजयवर्गीय
कुछ समय पहले कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इंदौर और पीथमपुर के साथ हो रही कथित उपेक्षा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने विकास कार्यों और योजनाओं को लेकर चिंता जताई थी।
उस पत्र के बाद भी राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं। अब मंच से महापौर पर किया गया तंज उसी कड़ी का अगला संकेत माना जा रहा है।
कभी बेहद करीबी रहे हैं विजयवर्गीय और पुष्यमित्र
राजनीतिक रूप से देखें तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव को आगे बढ़ाने में कैलाश विजयवर्गीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जब भाजपा ने इंदौर महापौर पद के लिए नए चेहरे की तलाश शुरू की थी, तब तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पुष्यमित्र भार्गव का नाम प्रस्तावित किया था और उस पर विजयवर्गीय ने अपनी सहमति दी थी।
दोनों परिवारों के बीच भी लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं। पुष्यमित्र भार्गव के पिता और कैलाश विजयवर्गीय वर्षों पुराने मित्र बताए जाते हैं और साथ में पढ़ाई भी कर चुके हैं।
विधानसभा चुनाव में भी किया था समर्थन
2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब इंदौर की तीन नंबर विधानसभा सीट से आकाश विजयवर्गीय का टिकट नहीं मिला था, तब कैलाश विजयवर्गीय ने उसी क्षेत्र से पुष्यमित्र भार्गव के नाम का सुझाव भी दिया था।
यही वजह रही कि लंबे समय तक महापौर को विजयवर्गीय खेमे का करीबी माना जाता रहा। नगरीय प्रशासन विभाग और नगर निगम के बीच भी बेहतर तालमेल देखने को मिला।
बदलते राजनीतिक समीकरण
अब हालात पहले जैसे नहीं दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। इंदौर जैसे महत्वपूर्ण शहर में भी विभिन्न नेताओं के बीच राजनीतिक संतुलन लगातार बदलता नजर आ रहा है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का सार्वजनिक मंच से महापौर को बैठकों में नहीं आने की याद दिलाना केवल प्रशासनिक टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, भाजपा की ओर से किसी प्रकार के मतभेद या विवाद को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में मंत्री और महापौर के बीच तालमेल पहले जैसा दिखाई देता है या फिर इंदौर की राजनीति में यह दूरी और स्पष्ट होती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस