मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, समिति ने सौंपी रिपोर्ट; सीएम मोहन यादव बोले- कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे
मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में सरकार को समिति की रिपोर्ट मिल गई है. रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है. अब सरकार इसकी समीक्षा के बाद मानसून सत्र में विधेयक ला सकती है.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिति द्वारा मुझे यूसीसी की रिपोर्ट सौंप दी गई है। अब कांग्रेस को भी इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। चाहे यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, कांग्रेस हर विषय को केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कांग्रेस को यूसीसी पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए और हर मुद्दे पर वोट बैंक की राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस यूसीसी और भोजशाला जैसे विषयों को भी केवल हिंदू-मुस्लिम चश्मे से देखने का प्रयास करती है।
सरकार अब इस रिपोर्ट को कानून विभाग के माध्यम से आगे की प्रक्रिया के लिए भेज चुकी है। वरिष्ठ अधिकारियों की समिति रिपोर्ट का परीक्षण करेगी, जिसके बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। यदि कैबिनेट से हरी झंडी मिलती है तो आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है।
रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी थी समिति
यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। मुख्यमंत्री ने समय सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार करने पर समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने व्यापक अध्ययन तथा जनभागीदारी के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है।
तीन भागों में तैयार हुई रिपोर्ट
समिति की रिपोर्ट को तीन प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है।
पहले भाग में देश-विदेश के समान नागरिक कानूनों तथा मध्य प्रदेश में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन और उसके आधार पर सिफारिशें दी गई हैं।
दूसरे भाग में यूसीसी का विस्तृत ड्राफ्ट बिल शामिल किया गया है।
तीसरे भाग में प्रदेशभर से प्राप्त जनसुझावों और उनके विश्लेषण को शामिल किया गया है।
सरकार के अनुसार ड्राफ्ट बिल में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।
9.58 लाख से अधिक लोगों ने दिए सुझाव
यूसीसी का मसौदा तैयार करने से पहले सरकार ने व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया। जिला स्तर पर बैठकों, राज्य स्तरीय संवाद और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नागरिकों से सुझाव मांगे गए। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।
सरकार का कहना है कि मसौदा तैयार करते समय विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की राय को भी महत्व दिया गया।
इन विषयों पर किया गया अध्ययन
समिति को परिवार से जुड़े विभिन्न कानूनों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय शामिल रहे।
समिति ने इन सभी विषयों पर मौजूदा भारतीय कानूनों, न्यायालयों के निर्णयों तथा विभिन्न राज्यों के अनुभवों का अध्ययन करने के बाद मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया।
ST समुदाय को UCC से बाहर रखने की सिफारिश
रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes-ST) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की है।
समिति का मानना है कि जनजातीय समुदायों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाज और संवैधानिक संरक्षण को देखते हुए उन्हें अलग रखा जाना चाहिए। अब इस सिफारिश पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है।
लैंगिक समानता और परंपराओं में संतुलन का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मसौदा तैयार करते समय महिलाओं और पुरुषों के समान अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही प्रदेश की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
समिति ने दावा किया है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता सुनिश्चित करना है, जबकि स्थानीय सामाजिक विविधता का भी सम्मान किया गया है।
सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर साधा निशाना
रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे यूसीसी का विषय हो या भोजशाला का मुद्दा, कांग्रेस हर मामले को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सभी धर्मों के लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी है, लेकिन कांग्रेस ने अब तक अपना स्पष्ट पक्ष नहीं बताया है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को भी ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए ताकि जनता को पता चल सके कि उसका दृष्टिकोण क्या है।
मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
सरकार की योजना के अनुसार रिपोर्ट की प्रशासनिक और कानूनी समीक्षा पूरी होने के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। मंजूरी मिलने पर यूसीसी विधेयक 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
यदि विधानसभा से विधेयक पारित हो जाता है तो मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा देगा। हालांकि अंतिम स्वरूप सरकार द्वारा रिपोर्ट की समीक्षा और विधानसभा में होने वाली चर्चा के बाद ही तय होगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस