धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, MP विधानसभा में कांग्रेस का काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन; सदन में जमकर हंगामा

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन की मुख्य खबरें। कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन, चंबल परियोजना पर तीखी बहस और 7,765.76 करोड़ रुपए के अनुपूरक बजट पर पूरी जानकारी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, MP विधानसभा में कांग्रेस का काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन; सदन में जमकर हंगामा

कांग्रेस विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विधानसभा में जोरदार प्रदर्शन किया।

भोपाल।मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विधानसभा परिसर और सदन के भीतर राजनीतिक माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और शिक्षा व्यवस्था, नीट परीक्षा तथा कथित पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही भी कुछ समय के लिए प्रभावित रही।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देशभर में छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार जवाबदेही से बच रही है। विपक्ष का कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अव्यवस्थाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय मामले को नजरअंदाज कर रही है। इसी को लेकर कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।

काली पट्टी बांधकर सदन पहुंचे कांग्रेस विधायक

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर में एकत्र हुए। सभी विधायकों ने अपने हाथों में विरोध प्रदर्शन से जुड़ी तख्तियां ले रखी थीं और बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने "युवाओं को न्याय दो", "पेपर लीक बंद करो", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए। इसके बाद विधायक इसी रूप में सदन के भीतर पहुंचे और वहां भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

विपक्ष के हंगामे के कारण सदन का वातावरण काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा। अध्यक्ष द्वारा व्यवस्था बनाए रखने की अपील के बावजूद कांग्रेस विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

शिक्षा व्यवस्था और NEET को बनाया मुख्य मुद्दा

कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से नीट परीक्षा, कथित पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को उठाया। विपक्ष का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षाएं देते हैं, लेकिन पेपर लीक और भ्रष्टाचार के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इन मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में विफल रही है। उनका कहना था कि यदि सरकार दोषियों पर समय पर कार्रवाई करती तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती।

'केंद्र सरकार जवाबदेही से बच रही'

कांग्रेस ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार की निष्क्रियता चिंताजनक है। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों से जुड़े गंभीर मामलों में सरकार जवाब देने से बच रही है और संसद से लेकर विधानसभा तक विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य और देश के विकास से जुड़ा विषय है। ऐसे में सरकार को पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

उमंग सिंघार ने कैलाश विजयवर्गीय पर साधा निशाना

मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए भाजपा सरकार और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि देशभर में छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए बड़ा आंदोलन किया, लेकिन भाजपा के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस आंदोलन को अस्थिरता फैलाने वाला बताया और छात्रों को "कॉकरोच" कहकर उनका अपमान किया।

सिंघार ने कहा कि युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उनका मजाक उड़ाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है।

'पेपर लीक पर चुप्पी तोड़िए'

उमंग सिंघार ने अपने संदेश में कहा कि NEET पेपर लीक, भर्ती घोटाले, बढ़ती बेरोजगारी और छात्रों पर अत्याचार भाजपा सरकार की युवा नीति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग पूरी तरह स्पष्ट है—सरकार पेपर लीक मामलों पर अपनी चुप्पी तोड़े, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार जवाबदेही तय नहीं कर सकती तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

सदन में गूंजे विपक्ष के नारे

विधानसभा के भीतर कांग्रेस विधायकों ने लगातार नारेबाजी करते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर विफल रहने का आरोप लगाया। विपक्ष ने कहा कि लाखों छात्र और उनके परिवार प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता चाहते हैं, लेकिन बार-बार पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का विरोध किया और कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि कांग्रेस ने सरकार के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए अपना विरोध जारी रखा।

राजनीतिक माहौल गरमाया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के इस प्रदर्शन ने मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म कर दिया। शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो विधानसभा के आगामी दिनों में भी उसका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।