नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर सियासत तेज, उमंग सिंघार का तंज— "नरोत्तम रो रहे थे, मोहन यादव हंस रहे थे"-दतिया उपचुनाव में नामांकन के बाद बयानबाजी का दौर तेज, कांग्रेस ने बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर साधा निशाना

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन के बाद आयोजित सभा में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भावुक होकर रो पड़े। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि "नरोत्तम मिश्रा रो रहे थे और मुख्यमंत्री मोहन यादव हंस रहे थे।" उन्होंने आरोप लगाया कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भाजपा में अंदरूनी कलह उजागर हो गई है। वहीं भाजपा का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा संगठन के फैसले के साथ हैं और पूरी ताकत से पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर सियासत तेज, उमंग सिंघार का तंज— "नरोत्तम रो रहे थे, मोहन यादव हंस रहे थे"-दतिया उपचुनाव में नामांकन के बाद बयानबाजी का दौर तेज, कांग्रेस ने बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर साधा निशाना

नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर उमंग सिंघार का तंज

"मुख्यमंत्री खुश थे क्योंकि टिकट कट गया"— उमंग सिंघार

दतिया उपचुनाव में भाजपा की अंदरूनी कलह का आरोप

टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा हुए भावुक

आशुतोष तिवारी के नामांकन में शामिल हुए मुख्यमंत्री

भाजपा बोली— संगठन के फैसले के साथ हैं नरोत्तम मिश्रा

भोपाल/छतरपुर। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन के बाद आयोजित सभा में पूर्व गृह मंत्री और दतिया के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा भावुक होकर रो पड़े। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मंच पर एक तरफ नरोत्तम मिश्रा की आंखों से आंसू बह रहे थे, जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने इसे भाजपा की अंदरूनी कलह का संकेत बताया।

छतरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा कांग्रेस में गुटबाजी का आरोप लगाती है, लेकिन दतिया की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। उनके अनुसार, नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष साफ दिखाई दे रहा है और नामांकन कार्यक्रम में भी यह असहजता नजर आई।

"मुख्यमंत्री इसलिए खुश थे क्योंकि टिकट कट गया"

उमंग सिंघार ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा के आंसू केवल भावनात्मक नहीं थे, बल्कि उनके राजनीतिक दर्द को भी दर्शा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इसलिए प्रसन्न दिखाई दे रहे थे क्योंकि पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाया।

उन्होंने कहा, "नरोत्तम मिश्रा जी के आंसू छलक रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री जी खुश हो रहे थे। मुख्यमंत्री इसलिए खुश थे क्योंकि नरोत्तम मिश्रा जी का टिकट काट दिया गया। यह भाजपा नेताओं की अंदरूनी लड़ाई है। भाजपा हमेशा कांग्रेस में फूट की बात करती है, लेकिन असली फूट तो दतिया में भाजपा के भीतर दिखाई दे रही है।"

सिंघार ने आगे कहा कि नामांकन कार्यक्रम के दौरान नरोत्तम मिश्रा को मजबूरी में मंच साझा करना पड़ा। यदि पार्टी का निर्णय उनके पक्ष में होता तो स्थिति अलग होती।

टिकट कटने के बाद से चर्चा का केंद्र बने नरोत्तम मिश्रा

दतिया उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि भाजपा ने लगातार कई बार विधायक रहे और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट क्यों नहीं दिया। लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे मिश्रा को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया और पार्टी ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया।

इस फैसले के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की और पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए। हालांकि भाजपा नेतृत्व अपने निर्णय पर कायम रहा और आशुतोष तिवारी को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया।

भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा

सोमवार को भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, कई वरिष्ठ नेता और स्वयं नरोत्तम मिश्रा भी मौजूद रहे।

नामांकन के बाद आयोजित जनसभा में भाषण देते समय नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें बहुत सम्मान दिया है और अब वे पूरी ताकत से भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए काम करेंगे। भाषण के दौरान उनकी आंखों से आंसू निकल आए, जिसे देखकर मंच पर मौजूद कई नेता भी भावुक दिखाई दिए।

नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर भाजपा प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पार्टी सर्वोपरि है और वे संगठन के निर्णय का सम्मान करते हैं।

कांग्रेस ने बनाया राजनीतिक मुद्दा

नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे भाजपा की अंदरूनी खींचतान से जोड़ दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की जा रही है।

उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है। यदि सब ठीक होता तो इतने बड़े नेता को टिकट से वंचित नहीं किया जाता और उनके समर्थकों में नाराजगी नहीं दिखाई देती।

भाजपा का जवाब

भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी का हर निर्णय संगठन के हित में लिया जाता है। वरिष्ठ नेताओं की भूमिका केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं होती, बल्कि संगठन को मजबूत करना भी उनकी जिम्मेदारी है। भाजपा का दावा है कि नरोत्तम मिश्रा स्वयं पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरी सक्रियता से चुनाव प्रचार कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील कर चुके हैं।

भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस बेवजह भावनात्मक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है, जबकि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में है।

दतिया उपचुनाव पर सबकी नजर

दतिया विधानसभा उपचुनाव इस समय मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो चुका है। भाजपा ने जहां नए चेहरे पर दांव लगाया है, वहीं कांग्रेस इसे सत्ता और संगठन की प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर मैदान में उतरी है।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना, उनके समर्थकों की नाराजगी, नामांकन के दौरान उनका भावुक होना और उस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया—इन सभी घटनाओं ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।

अब दोनों दल एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। दतिया की जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है, इसका उत्तर मतदान और मतगणना के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल नरोत्तम मिश्रा के आंसू और उस पर उमंग सिंघार का बयान प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।