सज्जन सिंह वर्मा का कैलाश विजयवर्गीय पर तीखा हमला: बोले- "जब पावर नहीं है तो इस्तीफा दे दो, पितृ पर्वत पर बैठकर भगवान की सेवा करो"
मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि भागीरथपुरा में मानव मल-मूत्र से दूषित पानी पीने के कारण 36 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, तब भी मैंने कहा था कि कैलाश विजयवर्गीय भाजपा सरकार में 'हाथ कटे ठाकुर' बनकर रह गए हैं।
सज्जन वर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय पर कसा तंज, बोले- भाजपा में लगती है पर्ची की बोली, मंत्री सिर्फ कुर्सी ढोते हैं
भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश की राजनीति में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कथित पत्र को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने विजयवर्गीय पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई अधिकार नहीं है और उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "पितृ पर्वत तैयार है, वहां बैठकर भगवान और आम जनता की सेवा करो।"
दरअसल, हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे गए कैलाश विजयवर्गीय के एक कथित पत्र की चर्चा पूरे प्रदेश की राजनीति में छाई हुई है। इस पत्र में विजयवर्गीय ने पिछले ढाई वर्षों से उपेक्षा और प्रशासनिक असहयोग का आरोप लगाया था। पत्र सामने आने के बाद भाजपा के भीतर भी हलचल तेज हो गई और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया।
इंदौर की बैठक में नहीं पहुंचे कई बड़े नेता
राजनीतिक विवाद के बीच गुरुवार को इंदौर स्थित एआईसीटीएसएल कार्यालय में कैलाश विजयवर्गीय ने शहर के सभी विधायकों, सांसद, महापौर और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक को इंदौर के विकास और विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
हालांकि बैठक में अपेक्षित संख्या में जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे। केवल विधायक महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला और मधु वर्मा ही बैठक में शामिल हुए। वहीं मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, मनोज पटेल और भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश मेंदोला सहित कई प्रमुख चेहरे बैठक से दूर रहे।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बैठक में शामिल नहीं होने का कारण व्यक्तिगत कार्यक्रम बताया। उनके अनुसार वे खरगोन में एक विवाह समारोह में गए थे और लौटते समय ट्रैफिक जाम में फंस जाने के कारण समय पर नहीं पहुंच सके।
कथित पत्र बना राजनीतिक चर्चा का केंद्र
भाजपा नेताओं की बैठक से दूरी को राजनीतिक गलियारों में विजयवर्गीय के कथित पत्र से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री को लिखे गए इस पत्र में मंत्री ने अपनी उपेक्षा, विभागीय सहयोग नहीं मिलने और निर्णयों में अनदेखी किए जाने जैसी बातें लिखी थीं।
पत्र सार्वजनिक होने के बाद यह सवाल भी उठने लगे कि आखिर यह पत्र लीक कैसे हुआ। भाजपा ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विपक्ष लगातार इसे सरकार के भीतर चल रही खींचतान का प्रमाण बता रहा है।
इंदौर विकास पर होने वाला बड़ा कार्यक्रम भी टला
इधर इंदौर के विकास को लेकर 3 जुलाई को प्रस्तावित महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है। इस कार्यक्रम में शहर के विकास, अधोसंरचना और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होनी थी।
इसके लिए ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर बुक किया जा चुका था और शहर के गणमान्य नागरिकों को आमंत्रण पत्र भी भेज दिए गए थे। हालांकि अंतिम समय में कार्यक्रम को टाल दिया गया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की व्यस्तता के कारण कार्यक्रम स्थगित किया गया है। अब इसके लिए नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
सज्जन सिंह वर्मा का हमला
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने पूरे घटनाक्रम को भाजपा की अंदरूनी कलह का परिणाम बताते हुए कैलाश विजयवर्गीय पर कई तीखे तंज कसे।
उन्होंने कहा, "जब कोई पावर नहीं है तो इस्तीफा दे दो यार। एक स्वाभिमानी आदमी की तरह जियो, उसमें ज्यादा सम्मान है।"
उन्होंने आगे कहा कि अब विजयवर्गीय यह कह रहे हैं कि उनका पत्र कैसे वायरल हो गया। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने फिल्म शोले का उदाहरण देते हुए कहा कि "हाथ कटे ठाकुर के पास जय और वीरू थे, वैसे ही दो लोगों की ड्यूटी लगा दो कि पता करें पत्र किसने लीक किया।"
सज्जन सिंह वर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि पत्र जानबूझकर लीक किया गया या फिर मुख्यमंत्री स्तर से ही बाहर आया। उन्होंने कहा कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
"पितृ पर्वत पर बैठकर भगवान की सेवा करो"
अपने बयान में सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि यदि मंत्री होने के बावजूद अधिकार नहीं मिल रहे हैं तो राजनीति में बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।
उन्होंने कहा, "कैलाश भाई, मेरी सलाह मानिए। पितृ पर्वत तैयार है। वहां जाइए, भगवान की सेवा कीजिए, आम जनता की सेवा कीजिए। राजनीति के इस चक्कर में क्यों पड़े हैं?"
उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि वहां एक बात का ध्यान रखना कि "चंदे की चोरी नहीं हो। वहीं अपना आशियाना बना लो।"
भाजपा में अंदरूनी खींचतान पर बढ़ी चर्चाएं
कैलाश विजयवर्गीय के कथित पत्र और उसके बाद हुई राजनीतिक घटनाओं ने भाजपा के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं होने के संकेत दिए हैं। इंदौर जैसे भाजपा के मजबूत गढ़ में कई वरिष्ठ नेताओं का बैठक से दूर रहना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन और सरकार पूरी तरह एकजुट हैं और विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।
विपक्ष को मिला हमला करने का मौका
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा सरकार की अंदरूनी असंतुष्टि और नेतृत्व संकट से जोड़कर लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि स्वयं कैबिनेट मंत्री ही अपनी उपेक्षा की शिकायत कर रहे हैं तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
आने वाले दिनों में यदि इस कथित पत्र और भाजपा नेताओं की नाराजगी पर पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती है, तो यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गरमा सकता है। फिलहाल कैलाश विजयवर्गीय के कथित पत्र, इंदौर की बैठक में नेताओं की अनुपस्थिति और सज्जन सिंह वर्मा के तीखे बयानों ने मध्यप्रदेश की सियासत को नई बहस दे दी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस