माता रतनगढ़ मेले को लेकर प्रशासन अलर्ट, 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना; जालौन से जाने वाले सभी मार्गों पर मजिस्ट्रेट तैनात, सुरक्षा के मद्देनजर जारी किए विशेष निर्देश
माता रतनगढ़ मंदिर में 9 से 11 नवंबर तक आयोजित होने वाले दीपावली दौज मेले में 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जालौन प्रशासन अलर्ट हो गया है। जिलाधिकारी समीर ने नदीगांव-रावतपुरा-असवार-सेवढ़ा मार्ग पर मजिस्ट्रेट तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। मेले में ज्वलनशील पदार्थ, नारियल व पॉलीथिन प्रतिबंधित रहेंगे। ट्रैक्टरों में एक से अधिक ट्रॉली लगाकर यात्रा करने से रोकने और श्रद्धालुओं को जागरूक करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
9 से 11 नवंबर तक माता रतनगढ़ मंदिर में लगेगा विशाल मेला
20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
जालौन से माता रतनगढ़ जाने वाले मार्गों पर मजिस्ट्रेट तैनात
नदीगांव-रावतपुरा-असवार मार्ग पर रहेगी विशेष निगरानी
अगरबत्ती, ज्वलनशील पदार्थ, नारियल और पॉलीथिन प्रतिबंधित
उरई। मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित प्रसिद्ध माता रतनगढ़ मंदिर पर दीपावली दौज के अवसर पर आयोजित होने वाले विशाल मेले को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जालौन जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी समीर ने जनपद से माता रतनगढ़ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से जिले के प्रमुख आवागमन मार्गों पर मजिस्ट्रेट की तैनाती करते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी समीर ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट दतिया (मध्यप्रदेश) के अर्द्धशासकीय पत्र दिनांक 30 अक्टूबर 2026 के माध्यम से अवगत कराया गया है कि माता रतनगढ़ मंदिर पर दीपावली दौज के अवसर पर 9 से 11 नवंबर 2026 तक विशाल मेले का आयोजन प्रस्तावित है। इस धार्मिक आयोजन में लगभग 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए मेला आपदा प्रबंधन एवं जनसुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना गया है।
जालौन से जाने वाले मार्गों पर विशेष निगरानी
माता रतनगढ़ मेले में जनपद जालौन से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। विशेष रूप से नदीगांव-रावतपुरा-असवार-सेवढ़ा-भगुवापुरा-माता रतनगढ़ मार्ग से श्रद्धालुओं का आवागमन होने की उम्मीद है। इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने कहा है कि सभी संबंधित अधिकारी अपने-अपने विभागीय दायित्वों के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। श्रद्धालुओं को मेले की निर्धारित तिथियों, आवागमन के तय मार्गों और प्रशासन की ओर से जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई जाए, जिससे यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न न हो।
ज्वलनशील पदार्थ और पॉलीथिन ले जाने पर प्रतिबंध
मेले में जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ वस्तुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन ने अगरबत्ती एवं अन्य ज्वलनशील पदार्थों, नारियल तथा पॉलीथिन के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंधों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं को पहले से ही इन प्रतिबंधों की जानकारी दी जाएगी, ताकि मेला स्थल पर किसी तरह की अव्यवस्था या सुरक्षा संबंधी समस्या पैदा न हो।
प्रशासन का मानना है कि मेले में लाखों लोगों की मौजूदगी के दौरान छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को नियमों का पालन करने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही यात्रा करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
ट्रैक्टरों में एक से अधिक ट्रॉली लगाकर यात्रा करने से रोकने के निर्देश
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से यात्रा करने वालों के लिए भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं को जागरूक किया जाएगा कि वे ट्रैक्टरों में एक से अधिक ट्रॉली लगाकर मेले में जाने से बचें। इस तरह की यात्रा से सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे वाहनों से यात्रा करने वालों को समझाएं और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं। इसका उद्देश्य मार्ग दुर्घटनाओं तथा अन्य संभावित अप्रिय घटनाओं की रोकथाम करना है।
एसडीएम से लेकर नगर निकाय अधिकारियों तक को जिम्मेदारी
जिलाधिकारी ने इस संबंध में समस्त उप जिलाधिकारियों, क्षेत्राधिकारियों, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), समस्त खंड विकास अधिकारियों तथा नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रचार माध्यमों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं तक समय रहते जरूरी सूचनाएं पहुंच सकें।
ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के माध्यम से चलेगा जागरूकता अभियान
प्रशासन ने श्रद्धालुओं को जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और अन्य जनसंपर्क माध्यमों का उपयोग करने पर जोर दिया है। संबंधित अधिकारी स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कर लोगों को मेले की तिथियों, निर्धारित रास्तों, प्रतिबंधित वस्तुओं और सुरक्षित यात्रा के नियमों की जानकारी देंगे।
इसके साथ ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का समय रहते समाधान किया जा सके।
जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
जिलाधिकारी समीर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इस कार्यवाही को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए निर्धारित निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि माता रतनगढ़ मेले में शामिल होने वाले श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा पूरी कर सकें और किसी भी प्रकार की दुर्घटना, अव्यवस्था या अप्रिय स्थिति से बचाव किया जा सके। मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जालौन जिला प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे जारी दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन कराते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन में सहयोग प्रदान करें।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस