नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे, 6 इंच के छेद से पहुंचाई जा रही हवा; बाढ़ में अब तक 804 मौतें

नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।

नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे, 6 इंच के छेद से पहुंचाई जा रही हवा; बाढ़ में अब तक 804 मौतें

नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से तबाही का सिलसिला अभी थमा नहीं है। खबर लिखे जाने तक 682 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल मलबे और प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। नेपाल के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले करीब 898 कर्मचारी बाढ़ और मलबे के बीच फंस गए, जिनमें से 361 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई अचानक भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में बड़ी संख्या में कर्मचारी फंस गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 898 कर्मचारी अब भी सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार तेज किया जा रहा है।

बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों के अंदर जमा मिट्टी, गाद और मलबा है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी और मलबा सुरंगों के रास्ते में जमा हो गया है, जिससे बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद राहत और बचाव टीमें लगातार मशीनों की मदद से रास्ता साफ करने में जुटी हुई हैं।

त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बचावकर्मी सुरंग में जमा मिट्टी और गाद को हटाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग में करीब 6 इंच का एक छेद बनाया गया है। इस छेद के जरिए पाइप अंदर पहुंचाया गया है, ताकि सुरंग में फंसे कर्मचारियों तक हवा पहुंचाई जा सके। बचाव दल का प्रयास है कि जब तक सुरंग में सुरक्षित रास्ता नहीं बन जाता, तब तक अंदर मौजूद लोगों तक आवश्यक हवा पहुंचती रहे।

यह छोटा सा छेद फिलहाल फंसे कर्मचारियों और बाहर मौजूद बचाव दल के बीच महत्वपूर्ण जीवनरेखा बना हुआ है। रेस्क्यू टीम अब इसी छेद को और बड़ा करने की दिशा में काम कर रही है।

6 इंच के छेद को मैनहोल में बदलने की तैयारी

बचाव दल द्वारा बनाए गए 6 इंच के छेद को बड़ा करके मैनहोल में बदलने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसा रास्ता तैयार करना है, जिससे बचावकर्मी सुरंग के अंदर प्रवेश कर सकें और वहां फंसे कर्मचारियों तक सीधे पहुंच सकें।

हालांकि, सुरंग के अंदर जमा भारी मात्रा में मिट्टी और गाद इस काम को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रही है। मशीनों के जरिए मलबा हटाया जा रहा है, लेकिन लगातार बदलते हालात के कारण बचाव अभियान में सावधानी बरती जा रही है।

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग के अंदर मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए एक ओर हवा पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सुरंग तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता तैयार करने का प्रयास जारी है।

898 कर्मचारी अभी भी सुरंगों में फंसे

बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की कई सुरंगों में बड़ी संख्या में कर्मचारी फंस गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 898 कर्मचारी अभी भी सुरंगों में फंसे हुए हैं। वहीं राहत और बचाव टीमों की कोशिशों से अब तक 361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

रेस्क्यू अभियान में अलग-अलग टीमें मशीनों और अन्य संसाधनों के साथ जुटी हुई हैं। अधिकारियों और बचावकर्मियों का ध्यान उन स्थानों पर केंद्रित है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी अंदर फंसे होने की सूचना है।

फंसे लोगों की स्थिति को लेकर उनके परिवारों में चिंता बनी हुई है। बचाव अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही

नेपाल में यह भीषण आपदा 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई बाढ़ के बाद शुरू हुई। नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से आसपास के इलाकों में पानी और मलबे का तेज बहाव पहुंचा।

अचानक आई बाढ़ ने सड़क, पुल, बस्तियों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को प्रभावित किया। कई जगहों पर संपर्क मार्ग बाधित हुए, जबकि कुछ इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान चलाना पड़ा।

बाढ़ का सबसे गंभीर असर उन हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर पड़ा, जहां निर्माण और संचालन से जुड़े कर्मचारी सुरंगों के भीतर मौजूद थे। पानी और मलबा भरने के बाद उनके बाहर निकलने के रास्ते बाधित हो गए।

सुरंगों में बचाव अभियान बना बड़ी चुनौती

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में रेस्क्यू अभियान सामान्य बचाव कार्यों की तुलना में अधिक कठिन माना जा रहा है। सुरंगों के भीतर जगह सीमित होती है और मलबा हटाने के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

बचावकर्मी पहले सुरंग के अंदर हवा और संचार की व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद मलबा हटाकर सुरक्षित रास्ता बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

6 इंच के छेद से पाइप के जरिए हवा पहुंचाने की व्यवस्था इसी रणनीति का हिस्सा है। यदि इस रास्ते को पर्याप्त बड़ा करके मैनहोल में बदला जा सका, तो बचाव दल को सुरंग के अंदर पहुंचने और फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।

नेपाल में 804 लोगों की मौत की जानकारी

इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल में अब तक 804 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। वहीं तिब्बत में भी बाढ़ से 16 लोगों की जान जाने की सूचना है।

बाढ़ के कारण कई परिवार प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और कई स्थानों पर राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटी हैं।

आपदा के बाद मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है, क्योंकि कई इलाकों में अभी भी लोगों के लापता होने और संपर्क टूटने की खबरें सामने आ रही हैं।

राहत और बचाव कार्य लगातार जारी

नेपाल में बचाव एजेंसियों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक राहत पहुंचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता बनी हुई है।

त्रिशूली-3 ‘ए’ प्रोजेक्ट में 6 इंच का छेद बनाकर पाइप के जरिए हवा पहुंचाना रेस्क्यू अभियान का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब बचाव दल इस छेद को बड़ा करके मैनहोल बनाने की तैयारी में जुटा है।

फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। बचावकर्मी उम्मीद कर रहे हैं कि सुरंग तक सुरक्षित पहुंच बनाने में सफलता मिलने के बाद अंदर फंसे लोगों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जा सकेगा।

नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और हाइड्रोपावर परियोजनाओं के सामने मौजूद जोखिम को उजागर किया है। फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य सुरंगों में फंसे 898 कर्मचारियों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। राहत एवं बचाव अभियान जारी है और प्रशासन की नजर प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र पर बनी हुई है।