केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का निधन, 76 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का शुक्रवार सुबह भोपाल एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया। लंबे समय से बीमार काशीबाई का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3 बजे सीहोर जिले के जैत गांव में किया जाएगा।
मध्यप्रदेश से एक दुखत खबर सामने आई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशी बाई का निधन हो गया है। उन्होंने आज भोपाल एम्स में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। मां के निधन की खबर से परिवार में शोक का माहौल है।
भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का शुक्रवार सुबह भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 76 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। पिछले एक सप्ताह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। चिकित्सकों की लगातार निगरानी और उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही परिवार, रिश्तेदारों, समर्थकों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।
काशीबाई के निधन से चौहान परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां के निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग शोक संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
भोपाल में अंतिम दर्शन, जैत में होगा अंतिम संस्कार
परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय काशीबाई का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक भोपाल के साकेत नगर स्थित उनके निवास 9-बी पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, परिचित और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे।
इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव जैत, जिला सीहोर ले जाया जाएगा। यहां दोपहर 3 बजे पूरे सम्मान और पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। जैत गांव से चौहान परिवार का पुराना जुड़ाव रहा है। शिवराज सिंह चौहान का जन्म भी इसी गांव में हुआ था। ऐसे में उनकी मां के अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर को गृह ग्राम ले जाने का निर्णय परिवार की भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
एक सप्ताह से एम्स में चल रहा था उपचार
जानकारी के मुताबिक, काशीबाई लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें भोपाल एम्स में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही थी। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पिछले करीब एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।
परिवार को उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से परिवार के सदस्यों को गहरा आघात पहुंचा है। मां का साया उठ जाना किसी भी संतान के लिए जीवन की सबसे बड़ी पीड़ाओं में से एक होता है। शिवराज सिंह चौहान के लिए भी यह व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन समय है।
बचपन में उठ गया था जैविक मां का साया
शिवराज सिंह चौहान के पारिवारिक जीवन से जुड़ी एक भावनात्मक जानकारी यह भी है कि उनकी जैविक मां का नाम सुंदरबाई चौहान था। शिवराज सिंह चौहान के बचपन में ही उनकी जैविक मां सुंदरबाई का निधन हो गया था। मां के निधन के बाद उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने दूसरा विवाह किया था। इसके बाद काशीबाई उनके जीवन में मां के रूप में आईं।
काशीबाई ने परिवार को संभालने और बच्चों के साथ पारिवारिक जीवन आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार में उन्हें मां का स्थान प्राप्त था। शिवराज सिंह चौहान के पिता प्रेम सिंह चौहान और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उनका जीवन ग्रामीण परिवेश और पारिवारिक संस्कारों के बीच बीता।
परिवार में हैं चार भाई-बहन और सौतेले भाई
पारिवारिक जानकारी के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान की जैविक मां सुंदरबाई चौहान से चार संतानें हुई थीं। इनमें शिवराज सिंह चौहान के अलावा उनके भाई नरेंद्र सिंह, रोहित सिंह और बहन शशि शामिल हैं। वहीं, पिता प्रेम सिंह चौहान और काशीबाई के विवाह से एक पुत्र वरुण का जन्म हुआ था।
इस प्रकार काशीबाई चौहान परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। उन्होंने परिवार के साथ अपना जीवन बिताया। उनके निधन से परिवार ने एक ऐसी सदस्य को खो दिया, जिनका जीवन परिवार और रिश्तों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा।
जैत गांव से रहा है शिवराज सिंह चौहान का गहरा नाता
मध्य प्रदेश की राजनीति में शिवराज सिंह चौहान की पहचान एक बड़े जननेता के रूप में रही है। हालांकि, उनके जीवन की शुरुआत सीहोर जिले के छोटे से गांव जैत से हुई। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े शिवराज सिंह चौहान अक्सर अपने गांव, परिवार और बचपन से जुड़ी यादों का जिक्र करते रहे हैं।
जैत गांव उनके लिए केवल जन्मस्थान नहीं, बल्कि उनकी पारिवारिक और सामाजिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी गांव से उन्होंने अपने जीवन का सफर शुरू किया और आगे चलकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली।
उनकी मां काशीबाई का अंतिम संस्कार भी इसी गांव में किया जाना है। ऐसे में गांव के लोगों और परिवार के परिचितों के लिए यह भावुक अवसर होगा। परिवार के साथ गांव के लोग भी दिवंगत आत्मा को अंतिम विदाई देंगे।
राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक
काशीबाई के निधन की खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। शिवराज सिंह चौहान लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और देश-प्रदेश की राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में उनके परिवार में हुए इस दुखद घटनाक्रम पर विभिन्न वर्गों के लोग संवेदना प्रकट कर रहे हैं।
मां का निधन जीवन की ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होती। सार्वजनिक जीवन में व्यस्त रहने वाले व्यक्ति के लिए भी परिवार और मां का स्थान सबसे विशेष होता है। काशीबाई के निधन से चौहान परिवार ने अपनी एक महत्वपूर्ण सदस्य को खो दिया है।
शुक्रवार को भोपाल स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव शरीर को जैत ले जाया जाएगा, जहां दोपहर 3 बजे अंतिम संस्कार होगा। परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों के बीच शोक की इस घड़ी में सभी दिवंगत काशीबाई को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति दें।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस