भोपाल में आज से सीलिंग की कार्रवाई शुरू, रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर निगम की सख्ती

8264 नोटिस के बाद अब भोपाल में सीलिंग का चरण शुरू हो रहा है। आज पुलिस बल के साथ कई जगह कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और 15 सितंबर की अगली सुनवाई से पहले नगर निगम कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर रहा है।

भोपाल में आज से सीलिंग की कार्रवाई शुरू, रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर निगम की सख्ती

रहवासी इलाकों में कारोबार को लेकर भोपाल में सोमवार से कार्रवाई होगी। रविवार को नगर निगम ने दुकानों पर 24 घंटे के नोटिस चस्पा दिए। पुलिस की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की जाएगी। ताकि, हंगामा होने पर सख्ती से निपटा जा सके

भोपाल। राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम सोमवार से बड़ी कार्रवाई शुरू करने जा रहा है। आवासीय भवनों में दुकान, होटल, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान किसी तरह के विवाद या हंगामे की स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम की टीम के साथ पुलिस बल भी तैनात रहेगा।

नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी के तहत रविवार को संबंधित प्रतिष्ठानों पर 24 घंटे के नोटिस चस्पा किए। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद सोमवार से सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में छह स्थानों पर कार्रवाई प्रस्तावित है। इसके बाद सर्वे और नोटिस के आधार पर अन्य क्षेत्रों में भी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।

8264 नोटिस जारी, परीक्षण के बाद होगी कार्रवाई

नगर निगम द्वारा 26 अगस्त तक रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और भवनों से जुड़े उल्लंघनों को लेकर कुल 8,264 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस जारी करने के बाद निगम अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और भवनों की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है। इसी परीक्षण के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि किन प्रतिष्ठानों पर सीलिंग या अन्य कार्रवाई की जानी है।

इस कार्रवाई की शुरुआत के तौर पर वार्ड-58 के गौतम नगर में आवासीय भवन में संचालित एक होटल को सील किया जा चुका है। इसके बाद रविवार को कई प्रतिष्ठानों को 24 घंटे का नोटिस दिया गया। नगर निगम का कहना है कि नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की मौजूदगी में होगी कार्रवाई

आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी में सीलिंग की जाएगी। इसके लिए मिसरोद, हबीबगंज, रातीबड़, कोहेफिजा, गोविंदपुरा, ऐशबाग और कोलार थाना क्षेत्रों से पुलिस बल उपलब्ध कराया जाएगा।

नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की है। सोमवार को पहले चरण में छह स्थानों पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान संबंधित भवनों और प्रतिष्ठानों के दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती

भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को मिली राहत और स्टे ऑर्डर भी निरस्त कर दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच और कार्रवाई में किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है। इससे पहले नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी है। इसी वजह से राजधानी में नोटिस जारी करने, सर्वे कराने और अब सीलिंग की कार्रवाई में तेजी आई है।

नए सर्वे में दूसरे उल्लंघनों की भी जांच

नगर निगम द्वारा किए जा रहे नए सर्वे में केवल व्यावसायिक गतिविधियों की ही जांच नहीं की जा रही, बल्कि भवन से जुड़े अन्य संभावित उल्लंघनों को भी देखा जा रहा है। अधिकारियों की टीम भवन के उपयोग, निर्माण की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है।

निगम ने मुख्य मार्गों के दोनों ओर स्थित भवनों के साथ-साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे शुरू किया है। इसके अलावा नदी और तालाब के किनारे बने भवन, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में स्थित निर्माण को प्राथमिकता से जांचे जाने की बात कही गई है।

अवैध रूप से संचालित मैरिज गार्डन भी निगम की जांच के दायरे में रहेंगे। ऐसे प्रतिष्ठानों को भी नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

कारोबारियों में बढ़ी चिंता

नगर निगम की सख्ती के बाद रहवासी इलाकों में कारोबार कर रहे दुकानदारों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों में चिंता बढ़ गई है। कई कारोबारियों को आशंका है कि यदि उनका प्रतिष्ठान आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन में संचालित पाया गया तो उसे सील किया जा सकता है।

अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी सहित कई इलाकों में नोटिस मिलने के बाद दुकानदार वैकल्पिक तौर पर कमर्शियल क्षेत्रों में जगह तलाश रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि लंबे समय से संचालित दुकानों और प्रतिष्ठानों को अचानक बंद करने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

वहीं नगर निगम का तर्क है कि कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है और जिन भवनों में आवासीय उपयोग की अनुमति है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना नियमों का उल्लंघन है।

मास्टर प्लान को लेकर भी उठ रहे सवाल

शहर में बढ़ती कार्रवाई के बीच अर्बन प्लानिंग से जुड़े विशेषज्ञों ने भोपाल के मास्टर प्लान और व्यवस्थित शहरी विकास को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर प्रभावी मास्टर प्लान लागू होता और आवासीय तथा व्यावसायिक क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग चिह्नित किया जाता तो मौजूदा स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

भोपाल के कई इलाकों में समय के साथ रहवासी कॉलोनियों के भीतर दुकानें, कार्यालय, क्लीनिक, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो गए हैं। अब इनके नियमन को लेकर नगर निगम की कार्रवाई से रहवासियों और कारोबारियों दोनों के सामने नई स्थिति पैदा हो गई है।

मुख्य मार्गों से लेकर नदी-तालाब क्षेत्र तक निगरानी

नगर निगम ने सर्वे का दायरा भी बढ़ा दिया है। मुख्य सड़कों के दोनों ओर बने भवनों के साथ-साथ उनसे जुड़ी आंतरिक गलियों में भी निर्माण और उपयोग की स्थिति देखी जा रही है। नदी-तालाब के किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में किए गए निर्माणों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक सर्वे के दौरान यदि किसी भवन में नियमों के विपरीत निर्माण या उपयोग पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था को नोटिस दिया जाएगा। दस्तावेजों और जवाब के परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

15 सितंबर की सुनवाई से पहले रिपोर्ट तैयार करने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट में 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई को देखते हुए नगर निगम के सामने कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती भी है। इसी कारण नोटिस जारी करने और उनके परीक्षण का काम तेजी से किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में नए नोटिस जारी करने के बजाय पहले से जारी नोटिसों का परीक्षण किया जा रहा था। अब जिन मामलों में कार्रवाई आवश्यक पाई गई है, वहां नियमानुसार सीलिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

भोपाल में शुरू होने वाली यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और व्यापक हो सकती है। फिलहाल नगर निगम का फोकस उन भवनों और प्रतिष्ठानों पर है, जहां आवासीय उपयोग की अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सीलिंग की कार्रवाई के साथ सर्वे जारी रहने से शहर के कई रहवासी क्षेत्रों में कारोबारियों की नजर अब निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।